आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन तथा अन्य आरोपियों को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट में पेशी के दौरान एसीबी की ओर से एक आरोपी को छोड़कर बाकी सभी के लिए जुडिशियल कस्टडी (न्यायिक हिरासत) की मांग की गई, जबकि एक अन्य आरोपी अंकित श्रीवास्तव की 2 दिन की पुलिस कस्टडी (पीसी) मांगी गई है. हालांकि, सत्येंद्र जैन के वकील ने कोर्ट में इस पूरी गिरफ्तारी और एसीबी की कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए इसे पूरी तरह से गैरकानूनी और राजनीति से प्रेरित बताया है.
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पार्टी को डिस्टर्ब करने और चुनाव से जुड़ी साजिश का आरोप
सत्येंद्र जैन के वकील ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह से 'पॉलिटिकली मोटिवेटेड' है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्येंद्र जैन आम आदमी पार्टी के सह-प्रभारी हैं और आगामी पंजाब चुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. पार्टी को डिस्टर्ब करने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से यह साजिश रची गई है. उन्होंने कहा कि जिस 2022 के टेंडर घपले के मामले में सत्येंद्र जैन की भूमिका बताई जा रही है, उस मई 2022 के दौरान वे पहले से ही ईडी और सीबीआई के मामलों में जेल में बंद थे.
जांच में सहयोग के बावजूद अचानक गिरफ्तारी पर सवाल
बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि इस मामले में 2024 में एफआईआर दर्ज की गई थी. 2024 से लेकर 2026 तक जब भी जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए बुलाया, तब-तब सत्येंद्र जैन और अन्य आरोपियों ने जांच को जॉइन किया और पूरा सहयोग दिया. 5 अगस्त से लेकर अब तक ऐसा कोई नया घटनाक्रम या डेवलपमेंट नहीं हुआ था जिसके आधार पर अचानक से कल शाम उन्हें गिरफ्तार किया जाता. उन्होंने आरोप लगाया कि एसीबी पर भारी दबाव है और गिरफ्तारी का यह आदेश एसीबी का नहीं बल्कि बीजेपी दफ्तर से आया हुआ लगता है.
एसीबी के दोहरे रवैये और कस्टडी की मांग पर घेरा
कोर्ट रूम के अंदर हुई बहसों का जिक्र करते हुए वकील ने कहा कि एसीबी अपनी ही लिखी बातों और मौखिक तर्कों में अंतर रख रही है. एक तरफ सत्येंद्र जैन को न्यायिक हिरासत में भेजने की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ सह-आरोपी अंकित श्रीवास्तव की दो दिन की कस्टडी मांगी जा रही है, जो एसीबी के विरोधाभासी रवैये को दर्शाती है. बचाव पक्ष ने अदालत से यह भी मांग की है कि 5 अगस्त से अब तक की केस डायरी को सील व सीज किया जाए और उस पर हस्ताक्षर किए जाएं ताकि बाद में रिकॉर्ड के साथ कोई छेड़छाड़ न की जा सके.
जमानत याचिका की तैयारी और आगे की कानूनी रणनीति
कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए वकील ने बताया कि कोर्ट में बहस के दौरान उन्होंने गिरफ्तारी का पुरजोर विरोध किया है. जैसे ही कोर्ट का रुख और फैसला सामने आता है, सत्येंद्र जैन की तरफ से तुरंत इमीडिएट बेल एप्लीकेशन (जमानत याचिका) दाखिल की जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि निचली अदालत से राहत नहीं मिलती है तो वे इस गैरकानूनी गिरफ्तारी के खिलाफ ऊपरी अदालतों का रुख भी करेंगे.
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