Saurabh Bhardwaj Contempt of Court Case: दिल्ली के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को केस की सुनवाई से अलग कर लिया है. जहां एक तरफ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए इसे एक राहत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जस्टिस शर्मा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के छह बड़े नेताओं पर कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) का चाबुक चला दिया है.
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इन छह नेताओं में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विनय मिश्रा और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज का नाम शामिल है. कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज किया है.
आखिर क्यों भड़कीं जज साहिबा
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आम आदमी पार्टी के इन नेताओं ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अदालत की सत्यनिष्ठा और निष्पक्षता को धूमिल करने के लिए एक सोची-समझी रणनीति के तहत नैरेटिव चलाया.
विशेष रूप से सौरभ भारद्वाज का जिक्र करते हुए न्यायाधीश ने कहा कि उनके द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को आम आदमी पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर जानबूझकर तब साझा किया गया, जब मामला अदालत में सूचीबद्ध होने वाला था. जस्टिस शर्मा ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:
"प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछा गया कि बीजेपी का हाई कोर्ट की जज से क्या रिश्ता है? सार्वजनिक रूप से अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाना कोई उचित आलोचना नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर कोर्ट की अवमानना है."
10 मार्च की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले थे सौरभ भारद्वाज?
अदालत के निशाने पर आई यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सौरभ भारद्वाज ने 10 मार्च 2026 को की थी. लगभग 7 मिनट की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का एक पुराना बयान और बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का 'पिक्चर अभी बाकी है' वाला ट्वीट दिखाया था.
वीडियो में सौरभ भारद्वाज यह कहते सुने जा रहे हैं:
"वीरेंद्र सचदेवा पहले से ही कैसे दावा कर रहे हैं कि निश्चित तौर पर सजा मिलेगी? कपिल मिश्रा को कैसे पता कि पिक्चर में आगे क्या बाकी है? यह बात तो अभी खुद हाई कोर्ट की जज साहिबा को भी नहीं पता होगी जब तक वह केस न पढ़ लें. क्या बीजेपी नेता यह संदेश देना चाहते हैं कि जो फैसला वे चाहेंगे, वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से करा लेंगे? जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का भारतीय जनता पार्टी से क्या रिश्ता है, इन्हें बताना चाहिए."
परसेप्शन बनाने की कोशिश का आरोप
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपने आदेश में साफ किया कि यह पूरी कवायद किसी अदालती फैसले की सामान्य कानूनी आलोचना नहीं थी. यह आम जनता के बीच सिंगल जज की पीठ के खिलाफ एक नकारात्मक परसेप्शन (धारणा) बनाने और दबाव बनाने का प्रयास था. इसी वजह से अब सौरभ भारद्वाज समेत 'आप' के दिग्गज नेताओं को इस क्रिमिनल कंटेंप्ट केस के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.
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