दिल्ली के जंतर-मंतर पर 37 दिनों तक चले ऐतिहासिक आंदोलन को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है. 26 दिनों तक आमरण अनशन पर बैठकर इस आंदोलन की रीढ़ बने 59 वर्षीय सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेतृत्व की पोल खोलकर रख दी है. एक पॉडकास्ट के दौरान वांगचुक ने पर्दे के पीछे का सच बयां करते हुए दावा किया कि सीजेपी के नेता अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे और हाथ जोड़कर इस आंदोलन से बाहर निकलने का रास्ता मांग रहे थे. विस्तार से जानिए पूरी बात.
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भीड़ कम होते ही डगमगाने लगा था नेताओं का हौसला
सोनम वांगचुक ने बताया कि अनशन शुरू होने के करीब 8-9 दिनों बाद जब जंतर-मंतर पर जनता की भीड़ कम होने लगी, तो सीजेपी नेताओं का हौसला डगमगाने लगा था. वांगचुक के अनुसार, पार्टी के नेतृत्व में शामिल कुछ लोग बार-बार यह सवाल उठाते थे कि इस आंदोलन से बाहर कैसे निकला जाए. जब वांगचुक ने उनसे पूछा कि वे और कितने दिन वहां रुक सकते हैं, तो उनमें से कुछ लोगों ने हाथ जोड़कर कहा कि वे अब इस जगह को छोड़कर जाना चाहते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सीजेपी नेताओं का जज्बा केवल मैदान में जुटी भीड़ के भरोसे ही टिका हुआ था.
अनशन तुड़वाने के लिए राहुल गांधी के नाम पर भी हुआ विचार
वांगचुक ने आगे बताया कि 20 जुलाई को संसद मार्च से ठीक पहले जब उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया, तब पार्टी नेतृत्व को लगने लगा था कि इस आंदोलन का कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है. इसके बाद अनशन का एक सम्मानजनक अंत दिखाने के लिए कई तरह के विकल्पों पर विचार किया जाने लगा. इस दौरान अनशन तुड़वाने के लिए लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम भी सामने लाया गया था, ताकि किसी भी तरह से आंदोलन को समाप्त किया जा सके. वांगचुक के मुताबिक सीजेपी के इस बदलते रवैये के पीछे उनके राजनीतिक दिमाग की अहम भूमिका रही.
आंदोलन शुरू होने से पहले ली गई थी निष्ठा की परीक्षा
सोनम वांगचुक ने यह भी खुलासा किया कि 20 जून को आंदोलन की शुरुआत करने से पहले उन्होंने सीजेपी नेताओं की निष्ठा की परीक्षा ली थी. उस समय स्विट्जरलैंड में वांगचुक की एक साइंस कॉन्फ्रेंस थी, जिसके कारण उन्होंने नेताओं से कहा था कि वे खुद 28 जून को अनशन पर बैठेंगे और तब तक पार्टी अकेले मोर्चे को संभाले. 8 दिनों के इस लंबे इंतजार की बात सुनकर सीजेपी नेता हैरान रह गए थे, लेकिन जब कार्यकर्ताओं ने मजबूती से मोर्चा संभाले रखा, तब वांगचुक 28 जून को अनशन में शामिल हुए. गौरतलब है कि उस समय पार्टी नेतृत्व में अभिजीत दीपके, आशुतोष शंका, सौरभ दास और विजेता दहिया शामिल थे, जिन्हें बाद में पार्टी से बाहर कर दिया गया. इस बड़े खुलासे के बाद अब सीजेपी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले को CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने किसकी जीत बताई, फैसले पर क्या बोले ?
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