Sonam Wangchuk hunger strike: देश भर में नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर आवाज उठा रहे प्रमुख जलवायु एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है. शुक्रवार देर रात उन्होंने समर्थकों और मीडिया को जानकारी दी कि केंद्र सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है.
ADVERTISEMENT
वांगचुक के अनुसार, देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ-साथ लद्दाख एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की. इस बैठक में सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों को स्वीकार कर लिया है.
1. छात्रों पर नहीं दर्ज होंगे आपराधिक मामले
अनशन समाप्त करते हुए वांगचुक ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता आंदोलन में शामिल युवाओं का भविष्य बचाना थी. सरकार इस बात पर सहमत हो गई है कि जंतर-मंतर या हाल ही में आयोजित मार्च में शामिल किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी पर पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि अक्सर कानूनी पचड़ों में फंसकर युवाओं का करियर बर्बाद हो जाता है, जिसे रोकना बेहद जरूरी था.
2. संसद में होगी परीक्षा प्रणाली पर व्यापक बहस
इसके साथ ही, विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने वांगचुक से मुलाकात कर हस्ताक्षर युक्त पत्र सौंपा है. सांसदों ने भरोसा दिया है कि वे आगामी संसद सत्र में नीट पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे. सरकार ने भी सदन के पटल पर इस विषय पर चर्चा कराने का आश्वासन दिया है.
3. पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे पर सहमति
नीट गड़बड़ी के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए वांगचुक ने बताया कि सरकार प्रभावित परिवारों को उचित वित्तीय मुआवजा देने पर गंभीरता से विचार कर रही है.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर क्या बोले?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि इस विषय पर फिलहाल सरकार की ओर से कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है. उन्होंने कहा, "मेरे सामने दो विकल्प थेया तो मैं अनशन जारी रखकर अपनी जान जोखिम में डालूं, या इस संघर्ष को जीवित रखकर आगे बढ़ाऊं. समर्थकों की सलाह पर मैंने आंदोलन को जारी रखने का फैसला किया."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस्तीफा न देने से छात्रों का नहीं बल्कि स्वयं सरकार की साख का नुकसान हो रहा है. संसद में जवाबदेही तय होने पर इस मुद्दे का हल भी निकल आएगा.
ADVERTISEMENT


