'पढ़ा-लिखा नहीं हूं, लेकिन हक की बात जानता हूं', सोनम वांगचुक के अनशन में पहुंचे 'वायरल बॉय इरफान' ने सरकार को घेरा

दिनेश यादव

• 04:06 PM • 16 Jul 2026

Viral Boy Irfan: सोनम वांगचुक के अनशन को अब 'वायरल बॉय' मोहम्मद इरफान का भी समर्थन मिल गया है. आंदोलन स्थल पर पहुंचे इरफान ने शिक्षा व्यवस्था, मजदूरों की स्थिति, छात्रों की आत्महत्या, संविधान, मानवाधिकार और नशा मुक्त भारत जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे. जानिए सोनम वांगचुक के आंदोलन में इरफान ने ऐसा क्या कहा कि उनका बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है.

Viral Boy Irfan
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देश के जाने-माने वैज्ञानिक और पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के आंदोलन को अब जमीनी स्तर पर भी बड़ा समर्थन मिलने लगा है. अपनी बेबाक और ज्ञान से भरी बातों के लिए सोशल मीडिया पर मशहूर हुए 'वायरल बॉय' मोहम्मद इरफान (मोहम्मद अली खान) अब सोनम वांगचुक के प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे हैं. बिना किसी स्कूली शिक्षा के भी संविधान और समाज के आंकड़ों पर गहरी पकड़ रखने वाले इरफान ने इस आंदोलन में पहुंचकर न सिर्फ सोनम वांगचुक की मांगों का समर्थन किया, बल्कि देश के गृह मंत्री अमित शाह से लेकर शिक्षा मंत्री तक के सामने कई तीखे सवाल और मांगें भी रखी हैं.

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सोनम वांगचुक के आंदोलन को बताया गांधीवादी रास्ता

इरफान ने बताया कि वह इस हंगर स्ट्राइक में इसलिए शामिल हुए हैं क्योंकि यहां देश के सम्मानित वैज्ञानिक सोनम वांगचुक और कई छात्र पिछले 23-24 दिनों से सिर्फ पानी पीकर अनशन पर बैठे हैं. उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अनशन के कारण प्रदर्शनकारियों का शरीर लगातार कमजोर हो रहा है और कई छात्रों की तबीयत इस हद तक बिगड़ चुकी है कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा है. इरफान ने इसे अपनी बात रखने का एक बेहद पवित्र और गांधीवादी रास्ता बताया. 

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में मौजूद लाचारियों और कमियों को तुरंत दुरुस्त किया जाना चाहिए. जिन अधिकारियों या नीतियों की वजह से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और छात्रों को सुसाइड जैसा कदम उठाना पड़ा है, उनके प्रति न्यायपूर्ण व्यवहार होना चाहिए. इरफान ने मांग की कि वर्तमान शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेकर किसी नए व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में संवाद का महत्व होना चाहिए, अहंकार का नहीं.

NCRB के आंकड़े गिनाकर देश के हालात पर जताई चिंता

सोशल मीडिया पर अपनी बेबाकी के लिए पहचाने जाने वाले इरफान ने देश में बढ़ रही आत्महत्याओं और श्रमिकों की बदहाली पर एनसीआरबी (NCRB) के 2024 के आंकड़ों का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि डेटा के मुताबिक 1,70,746 लोगों ने सुसाइड किया है, जिसका मतलब है कि देश में हर दिन लगभग 467 लोग और हर एक मिनट में तीन लोग अपनी जान दे रहे हैं.

इरफान ने जोर देकर कहा कि इन आत्महत्याओं में सबसे बड़ा हिस्सा दिहाड़ी मजदूरों का है, जो आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के कारण ऐसा कदम उठाने को मजबूर हैं. इसके अलावा इस डेटा में 8 से 9 प्रतिशत छात्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यह तो वह आंकड़ा है जो पुलिस रिकॉर्ड तक पहुंच पाया है, जबकि झुग्गी-झोपड़ियों (स्लम) में रहने वाले कई लोगों के मामले तो पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते.

मजदूरों के आर्थिक शोषण और मानवाधिकारों पर उठाए सवाल

स्वयं को एक रेहड़ी-पटरी मजदूर बताने वाले इरफान ने दिल्ली जैसे महानगर में श्रमिकों के हो रहे शोषण पर अपनी आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि देश की राजधानी, जहां नीति निर्माता बैठते हैं, वहां महिलाओं को केवल 6 से 8 हजार रुपये और पुरुषों को 10 से 14 हजार रुपये की दिहाड़ी मिल रही है. इसके साथ ही पुरुषों के लिए काम के घंटों की कोई सीमा तय नहीं है और उन्हें ओवर-टाइम का पैसा भी नहीं दिया जाता. 

इरफान ने कहा कि श्रमिक और मजदूर अपनी मजदूरी के लिए परेशान हैं और छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने भारतीय संविधान के आर्टिकल 19 का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था ने देश के हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार दिया है, इसलिए अपनी बात रखना या असहमति जताना कोई अपराध नहीं है.

आर्थिक मदद लेने से किया साफ इनकार

इरफान ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने सामाजिक संघर्ष की शुरुआत अन्ना आंदोलन से की थी. हाल ही में जब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर वायरल हुआ, तो किसान आंदोलन से जुड़े कुछ एक्टिविस्टों और अन्य लोगों ने उन्हें आर्थिक सहायता देने की पेशकश की थी. इस पर इरफान ने साफ किया कि उन्होंने किसी भी तरह की निजी आर्थिक मदद लेने से पूरी तरह से मना कर दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद के लिए कोई लोभ या लालच नहीं है, बल्कि वह इस देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक बेहतर और सम्मानजनक जीवन चाहते हैं. 

आगे इरफान ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें इस बात का डर रहता है कि सोशल मीडिया की इस दुनिया में कोई यह न कह दे कि मजदूरों की बात करने वाला अब खुद भीख मांगने लगा है. वह एक वक्त की रोटी कम खा सकते हैं, लेकिन बदनामी का जीवन नहीं जीना चाहते. अपनी निराशा और संघर्ष को बयां करने के लिए उन्होंने मंच से कवि गोपालदास नीरज और रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं की पंक्तियां भी सुनाईं.

गृह मंत्री अमित शाह से नशा मुक्त भारत की भावुक अपील

बातचीत के आखिरी हिस्से में इरफान ने देश में फैल रहे नशे के जाल पर गहरी चिंता व्यक्त की. दिल्ली के शाहदरा या स्लम जैसे इलाकों में नशे की गंभीर समस्या का जिक्र करते हुए उन्होंने देश के गृह मंत्री अमित शाह से हाथ जोड़कर भावुक विनती की. इरफान ने कहा कि गृह मंत्री जी, सिर्फ करोड़ों रुपये खर्च करके बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापनों का प्रचार करने से नशा नहीं रुकेगा. अगर आप वाकई नशा रोकना चाहते हैं, तो सीधे पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश दें कि समाज और देश के युवाओं के जीवन को बर्बाद करने वाले इस नशे को पूरी तरह से जड़ से खत्म किया जाए. उन्होंने कहा कि वह भले ही सरकार के वैचारिक विरोधी हो सकते हैं, लेकिन सामाजिक विरोधी नहीं हैं, क्योंकि देश की भलाई सरकार और वह दोनों ही चाहते हैं.