ये एक ऐसे दौर की कहानी है जब देश में सुप्रीम कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग तक पर सरकार के दबाव में काम करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं. विपक्ष लगातार चिल्ला रहा है कि संवैधानिक संस्थाएं पिंजरे का तोता बन चुकी हैं. ऐसे माहौल में, दिल्ली की एक निचली अदालत से न्याय की एक ऐसी गूंज सुनाई दी जिसने राजनीतिक और कोर्ट कचहरी के गलियारों को हिलाकर रख दिया है. राउज एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ACJM नेहा मित्तल ने एक ऐसा कड़ा फैसला सुनाया है, जिसने न सिर्फ बीजेपी के प्रभावशाली नेता और दिल्ली के डिप्टी सीएम प्रवेश वर्मा की हेकड़ी निकाल दी, बल्कि उन्हें लोकतंत्र का पाठ भी पढ़ा दिया. ऐसे में अब चर्चाएं तेज है कि आखिर क्या है पूरा मामला और कौन हैं जज नेहा मित्तल? विस्तार से जानिए पूरी बात.
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जज नेहा मित्तल ने ऐसा क्या कहा कि होने लगी चर्चा?
जज नेहा मित्तल ने ऑर्डर में कह दिया कि सरकार कभी अपने से अलग राय भी सुन लिया करें. सरकार को जनता की क्या सुननी होगी, क्या नहीं, इसका कोई फैसला नहीं दिया. देश की राजनीति और अभिव्यक्ति की आजादी के लिहाज से नजीर बना दी कि सत्ता में बैठे लोगों को जनता और विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना ही होगा.
जज नेहा मित्तल ने ये हिम्मत भी दिखाई कि उन्होंने प्रवेश वर्मा को बहुत बड़ा झटका दे दिया. आम आदमी पार्टी के बड़े नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दायर की गई उनकी आपराधिक मानहानि याचिका को भी खारिज कर दिया है. सौरभ भारद्वाज के खिलाफ केस कोर्ट में शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया. ये कहते हुए कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और उसकी आलोचना करना मानहानि नहीं हो सकता. जन-प्रतिनिधियों और सरकार को कभी-कभी अपने से अलग राय रखने वालों की बात भी सुननी चाहिए.
प्रवेश वर्मा ने क्यों लगाया था मानहानि का आरोप?
प्रवेश वर्मा दिल्ली बीजेपी के इतने बड़े नेता हैं कि एक वक्त दिल्ली के सीएम बनते-बनते रह गए. सीएम नहीं बने लेकिन रेखा गुप्ता की सरकार में डिप्टी सीएम होने को नाते नंबर 2 की हैसियत रखते हैं. राजनीति शुरू से विवादित रही है. कुछ न कुछ विवाद होता ही रहता है. ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब उन्होंने विकासपुरी इलाके में घटिया सड़क का सच दिखाने पर आप के समर्थक को सरेआम थप्पड़ मार दिया था. सौरभ भारद्वाज भी कम नहीं हैं. केजरीवाल के पुराने दोस्त और पार्टी के बड़े भरोसेमंद नेता हैं. दिल्ली आप के अध्यक्ष हैं. दिल्ली चुनाव हारने के बाद जब केजरीवाल पूरी पार्टी के साथ पंजाब में दिखते हैं तब सौरभ भारद्वाज ने अकेले दिल्ली में टिककर बीजेपी की नाक में दम कर रखा है.
हाई-प्रोफाइल विवाद मई में तब शुरू हुआ जब सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स X, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कुछ वीडियो और पोस्ट शेयर किए थे. इन पोस्ट्स में दिल्ली के विकासपुरी के स्कूल ट्रस्ट में अमरजीत सिंह बाबू नाम के व्यक्ति को ट्रस्टी बनाए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे. सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि स्कूल की एक 3 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए पॉक्सो मामले में सरकार और मंत्री प्रवेश वर्मा अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर आरोपियों और स्कूल अधिकारियों को बचा रहे हैं. इन तीखे सवालों और 500 करोड़ के ट्रस्ट में कथित भाई-भतीजावाद के आरोपों से तिलमिलाए मंत्री प्रवेश वर्मा ने इसे अपनी और अपने परिवार की छवि खराब करने की कोशिश बताते हुए कोर्ट में आपराधिक मानहानि का केस ठोक दिया.
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
प्रवेश वर्मा का वही मानहानि केस दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट में पहुंचा जहां जज की कुर्सी पर बैठी थीं नेहा मित्तल. प्रवेश वर्मा के खिलाफ मामला तब हो गया जब सबूत में पता चला कि प्रवेश वर्मा ने खुद फेसबुक पर अमरजीत सिंह बाबू के साथ कॉलेज के दिनों से पुरानी दोस्ती और जन्मदिन की बधाई की पोस्ट डाली थीं, जबकि कोर्ट में बयान देते समय उन्होंने कहा कि उनका बाबू से कोई संबंध नहीं है.
इस विरोधाभास पर जज ने कहा कि याचिकाकर्ता साफ हाथ, साफ दिल और साफ दिमाग के साथ अदालत नहीं आया. कहा कि भारद्वाज के आरोप सवाल पूछने की तरह थे और उनसे मानहानि नहीं होती. जनता के नुमाइंदों से कानून-व्यवस्था पर सवाल पूछना किसी भी सूरत में मानहानि के दायरे में नहीं आता.
सौरभ को राहत, प्रवेश वर्मा के पास अभी भी विक्लप!
प्री-कॉग्निजेंस यानी संज्ञान लेने की स्टेज पर ही याचिका खारिज होने के बाद सौरभ भारद्वाज को बहुत बड़ी राहत मिली है, क्योंकि उनके खिलाफ कोई ट्रायल यानी मुकदमा शुरू नहीं होगा. हालांकि, प्रवेश वर्मा के पास कानूनी विकल्प अभी बंद नहीं हुए हैं. वो इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर कर सकते हैं. प्रवेश वर्मा ने पहले से सौरभ भारद्वाज के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में 5 करोड़ का सिविल मानहानि का मुकदमा भी दर्ज करा रखा है, जो कि अभी हाईकोर्ट में पेंडिंग है.
कौन हैं जज नेहा मित्तल?
जज नेहा मित्तल सरकारी कर्मचारी वाली जज हैं. दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विसेस (DJS) कैडर की युवा जज हैं. ACJM एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हैं. भारत में LLB की पढ़ाई पूरी करने और बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के बाद, जज बनने के लिए राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली ज्यूडिशियल सर्विसेस परीक्षा PCS-J / DJS पास करनी होती है. नेहा मित्तल ने दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा के प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू पास कर जज बनी हैं. रोहिणी कोर्ट, तीस हजारी के बाद आज कल राउज एवेन्यू कोर्ट में जज हैं. प्रशासनिक तौर पर वे राउज एवेन्यू कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (District Judge) को रिपोर्ट करती हैं. उनके न्यायिक फैसलों की अपील सीधे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट या दिल्ली हाईकोर्ट में की जा सकती है.
क्या होता ACJM का अधिकार?
एक ACJM के पास किसी भी आपराधिक मामले में आरोपियों को समन जारी करने, पुलिस चार्जशीट पर संज्ञान (Cognizance) लेने, आपराधिक मानहानि, धोखाधड़ी, चोरी जैसे मामलों की सुनवाई करने का अधिकार होता है. वो अधिकतम 7 साल तक की जेल की सजा सुना सकती हैं. मजिस्ट्रेट होने के नाते हत्या डकैती या पॉक्सो (POCSO) जैसे गंभीर संगीन जुर्मों में सीधे खुद अंतिम सजा नहीं सुना सकतीं. ऐसे मामलों को सुनवाई और जांच के बाद ऊपरी अदालत यानी सेशन कोर्ट (District & Sessions Court) को भेज देती हैं.
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