NSUI से टिकट कटा तो निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन, जानिए DUSU के नए उपाध्यक्ष की पूरी कहानी

न्यूज तक डेस्क

• 06:24 PM • 19 Sep 2026

DUSU Election Result 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है. NSUI से जुड़े रहे दीपांशु को पार्टी का टिकट नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. चुनाव में उन्हें 30,615 वोट मिले. जानिए कौन हैं DUSU के नए उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन और टिकट कटने से जीत तक की उनकी पूरी कहानी.

Deepanshu Shokeen
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 में दीपांशु शौकीन का नाम चर्चा में है. उपाध्यक्ष (Vice President) पद पर जीत दर्ज करने वाले दीपांशु शौकीन की पहचान एक ऐसे छात्र के तौर पर सामने आई है, जिसने पार्टी के आधिकारिक सिंबल के बिना चुनाव मैदान में उतरकर अपनी दावेदारी पेश की. उनकी जीत के बाद अब उनके संघर्ष, छात्र राजनीति से जुड़ाव और कैंपस में सक्रियता की चर्चा हो रही है. आइए विस्तार से जानते हैं कौन हैं दीपांशु और कैसे रही उनकी जर्नी.

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कौन हैं दीपांशु शौकीन?

दीपांशु शौकीन मूल रूप से दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके के रहने वाले हैं. उनके पिता राकेश कुमार दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर कंडक्टर के तौर पर काम करते हैं. शहीद भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद दीपांशु फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय से बुद्धिस्ट स्टडीज में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं.

दीपांशु शौकीन पिछले करीब चार साल से NSUI के कार्यकर्ता के तौर पर कैंपस में सक्रिय रहे हैं. दिए गए कंटेंट के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने छात्रों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर अपनी सक्रियता बनाए रखी.उनकी पहचान खास तौर पर सत्य निकेतन इलाके में एक PG की इमारत गिरने के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन से बनी. इस हादसे के बाद दीपांशु ने विरोध के प्रतीक के तौर पर जूते-चप्पल छोड़ दिए और कई महीनों तक नंगे पैर कैंपस में घूमते हुए छात्रों की सुरक्षा, हॉस्टल और PG से जुड़े मुद्दों को उठाया. नंगे पैर कैंपस में छात्रों के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहना उनकी सार्वजनिक पहचान का अहम हिस्सा बन गया.

NSUI ने पहले बनाया था उम्मीदवार, फिर टिकट कटने का दावा

दीपांशु के मुताबिक, उनकी कैंपस में सक्रियता और लोकप्रियता को देखते हुए NSUI ने शुरुआत में उन्हें DUSU के उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार तय किया था. उनके नाम का आधिकारिक पोस्टर भी जारी किया गया था. हालांकि, दीपांशु का आरोप है कि अंतिम समय में उनका टिकट काट दिया गया और कांग्रेस के एक बड़े नेता के बेटे को उम्मीदवार बनाया गया. उनका दावा है कि पार्टी के भीतर एक बड़े नेता के बेटे को प्राथमिकता दी गई. टिकट कटने के बाद दीपांशु ने चुनाव से पीछे हटने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया.

'भाईचारे' को बनाया चुनाव अभियान का आधार

निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते हुए दीपांशु ने छात्रों के बीच अपनी पहुंच को अभियान का आधार बनाया. उनके अभियान का नारा 'डीयू का यकीन, दीपांशु शौकीन' रहा. जानकारी के मुताबिक, उनके अभियान में किसी बड़े पार्टी फंड या आधिकारिक पार्टी सिंबल की जगह छात्रों के बीच सीधे संपर्क पर जोर रहा. इसी के जरिए उन्होंने अपनी दावेदारी को आगे बढ़ाया. उनके पोस्टर में नाम को 'दीपांशु 100कीन' के रूप में भी इस्तेमाल किया गया.

DUSU उपाध्यक्ष पद पर जीत

आखिरकार DUSU चुनाव 2026 में दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की. उनकी जीत के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हुई कि छात्र राजनीति में कैंपस के मुद्दों और जमीनी सक्रियता के जरिए भी अपनी पहचान बनाई जा सकती है.

दीपांशु की कहानी में एक तरफ DTC कंडक्टर के बेटे की पारिवारिक पृष्ठभूमि है, तो दूसरी तरफ पिछले कुछ वर्षों से कैंपस में छात्र मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता. NSUI से जुड़े रहने के बाद टिकट नहीं मिलने और फिर निर्दलीय चुनाव लड़ने का उनका फैसला भी उनके राजनीतिक सफर का अहम मोड़ रहा. यही वजह है कि DUSU चुनाव में जीत के बाद दीपांशु शौकीन अब दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में चर्चा में आए नए चेहरों में शामिल हो गए हैं.

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