दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बीच एक बड़ी कानूनी जंग देखने को मिली. केजरीवाल ने मांग की थी कि जस्टिस शर्मा इस केस की सुनवाई न करें, लेकिन जज ने न केवल इस अर्जी को खारिज किया, बल्कि कड़े शब्दों में पलटवार भी किया. आइए जानते हैं आखिर कौन हैं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा और कैसा रहा है उनका अब तक का सफर.
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दौलतराम कॉलेज से हाई कोर्ट तक का सफर
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का करियर बेहद प्रभावशाली रहा है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध दौलतराम कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य (English Literature) में स्नातक किया. वे अपने कॉलेज की 'बेस्ट ऑलराउंडर स्टूडेंट' भी चुनी गई थीं. 1991 में वकालत की डिग्री लेने के बाद, उन्होंने बहुत कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं:
- 24 साल की उम्र में मजिस्ट्रेट: उन्होंने महज 24 वर्ष की आयु में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया.
- 35 साल की उम्र में सेशन जज: वे केवल 35 वर्ष की आयु में सेशन जज की कुर्सी तक पहुँच गई थीं.
उच्च शिक्षा: 2004 में उन्होंने एलएलएम (LLM) किया और साल 2025 में उन्हें पीएचडी (PhD) की उपाधि मिली. उनकी रिसर्च यूके, यूएस, सिंगापुर और कनाडा की न्यायिक शिक्षा प्रणालियों पर आधारित है.
लेखिका के रूप में पहचान: लिखी हैं 5 किताबें
जस्टिस शर्मा केवल कानून की विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील लेखिका भी हैं. उन्होंने अब तक पांच पुस्तकें लिखी हैं, जो अलग-अलग सामाजिक विषयों पर आधारित हैं:
- डोंट ब्रेक आफ्टर ब्रेकअप: यह किताब मुश्किल ब्रेकअप से गुजर रही महिलाओं को संबल देती है.
- बियॉन्ड बागबान: बुजुर्गों की आर्थिक और भावनात्मक चुनौतियों पर केंद्रित यह पुस्तक काफी सुर्खियों में रही.
- तुम्हारी सखी: महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए लिखी गई.
- लवफुल सर्कल: यह उनका एक फिक्शन उपन्यास है.
- जुडिशियल एजुकेशन: यह उनकी पीएचडी रिसर्च पर आधारित शैक्षणिक पुस्तक है.
केजरीवाल के आरोपों पर करारा जवाब
केजरीवाल ने उन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा था कि जज और उनके परिवार के सदस्य बीजेपी से जुड़े कार्यक्रमों में जाते हैं. इस पर जस्टिस शर्मा ने कहा कि केजरीवाल ने उनके लिए 'कैच-22' (दुविधा) वाली स्थिति पैदा करने की कोशिश की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि "झूठ हजार बार बोलने से सच नहीं बनता" और किसी भी नेता को अपनी पसंद का जज चुनने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
शानदार न्यायिक करियर
- तीन दशकों से ज्यादा के करियर में जस्टिस शर्मा ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है:
- वे सीबीआई की विशेष अदालत, फैमिली कोर्ट और महिला अदालत में जज रही हैं.
- मार्च 2022 में वे दिल्ली हाई कोर्ट की स्थाई जज बनीं.
- इससे पहले वे राउज एवेन्यू कोर्ट में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज के पद पर भी तैनात थीं.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपने हालिया फैसले से यह स्पष्ट कर दिया है कि न्याय सोशल मीडिया के शोर या धारणाओं से नहीं, बल्कि संविधान की शपथ से चलता है.
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