दिल्ली: स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह के घर के बाहर क्यों जुटे सैकड़ों डॉक्टर्स? जानें क्या है पूरा मामला

दिल्ली में विदेशों से पढ़कर आए लगभग 250 से अधिक एफएमजी (FMG) डॉक्टरों की इंटर्नशिप रुकी हुई है. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने डॉक्टरों से मुलाकात के बाद जुलाई के पहले हफ्ते तक सरकारी अस्पतालों में सीटें अलॉट करने का ठोस आश्वासन दिया है.

स्वास्थ्य मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन
स्वास्थ्य मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन

न्यूज तक

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दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवहन मंत्री डॉक्टर पंकज सिंह के निवास स्थित कार्यालय पर अचानक सैकड़ों डॉक्टरों की भारी भीड़ जमा हो गई. ये सभी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMG) डॉक्टर्स हैं, जो विदेशों से मेडिकल की डिग्री लेकर भारत लौटे हैं. परीक्षा पास करने के बावजूद पिछले 5 से 6 महीनों से इन डॉक्टरों का भविष्य अधर में लटका हुआ है, क्योंकि दिल्ली के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल इन्हें इंटर्नशिप के लिए सीटें आवंटित नहीं कर रहे हैं. अपनी मांग और भविष्य को बचाने की गुहार लेकर ये डॉक्टर्स स्वास्थ्य मंत्री के घर पहुंचे, जहां डॉ. पंकज सिंह ने उनसे मुलाकात की और जल्द ही इस समस्या के समाधान का बड़ा आश्वासन दिया है.

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क्या है पूरा विवाद? क्यों फंसा है पेंच?

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश है. सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि विदेशों से पढ़कर आने वाले एफएमजी (FMG) डॉक्टरों को भी इंटर्नशिप के दौरान उसी प्रकार भत्ता (Stipend) या सैलरी दी जानी चाहिए, जिस प्रकार भारत से पढ़े इंडियन मेडिकल ग्रेजुएट्स (IMG) डॉक्टरों को दी जाती है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के सामने बजट का संकट खड़ा हो गया है. अस्पतालों का कहना है कि उनके पास FMG डॉक्टरों को स्टाइपेंड देने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है. बिना स्टाइपेंड के डॉक्टरों को इंटर्नशिप पर रखना अब कानूनी रूप से गलत (Illegal) होगा, इसलिए अस्पताल इन छात्रों को सीटें अलॉट नहीं कर रहे हैं. इसी वजह से लगभग 250 से अधिक डॉक्टरों की इंटर्नशिप पिछले कई महीनों से रुकी हुई है.

डॉक्टरों का दर्द

प्रदर्शन और मुलाकात करने पहुंचे ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) के दिल्ली टीम के उपाध्यक्ष डॉ. कुश्मित बत्रा ने बताया, "जनवरी 2026 में हमारा FMG का रिजल्ट आया था, तब से हम सीट एलोकेशन के लिए भटक रहे हैं. हॉस्पिटल्स फंड की कमी का हवाला दे रहे हैं. आज हमारी स्वास्थ्य मंत्री से सकारात्मक बातचीत हुई है."

वहीं पोलैंड से एमबीबीएस करके आईं डॉ. निकिता शर्मा और उनके पिता संजय कुमार शर्मा ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि अन्य राज्यों ने अपने डोमिसाइल के छात्रों को इंटर्नशिप पर रख लिया है, लेकिन दिल्ली के छात्र होने के बावजूद उन्हें दिल्ली में जगह नहीं मिल रही है. एक अन्य छात्र डॉ. दिलराज राल ने तो यहां तक कहा, "अगर सरकार के पास स्टाइपेंड देने के पैसे नहीं हैं, तो हमसे फ्री में मजदूरी (काम) करा ले, लेकिन कम से कम हमारी इंटर्नशिप तो शुरू कराए ताकि हमारा साल और भविष्य खराब न हो."

स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आश्वासन

सैकड़ों डॉक्टरों की परेशानी को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने संवेदनशीलता दिखाई. उन्होंने डॉक्टरों के सामने ही तुरंत फाइनेंस सेक्रेटरी (वित्त सचिव) को फोन मिलाया. मंत्री ने छात्रों को आश्वस्त किया कि स्टाइपेंड के बजट के लिए फाइल को फाइनेंस मिनिस्ट्री (वित्त मंत्रालय) भेज दिया गया है.

स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों को भरोसा दिया है कि जुलाई के पहले हफ्ते (2 से 5 तारीख के बीच) सभी डॉक्टरों को दिल्ली सरकार के हॉस्पिटलों में सीटें अलॉट कर दी जाएंगी. सरकार दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (140 सीटें), इंदिरा गांधी अस्पताल (100 सीटें) और अंबेडकर अस्पताल (80 सीटें) समेत अन्य सरकारी अस्पतालों में इन छात्रों को समायोजित (Accommodate) करने की योजना बना रही है ताकि इनका भविष्य सुरक्षित हो सके.

डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें इस बार स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन पर पूरा भरोसा है, लेकिन यदि अगले हफ्ते तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा मंत्री आवास का रुख करेंगे.

 

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