Bihar Board Topper Sabreen: टायर दुकानदार की बेटी ने रचा इतिहास, 10वीं बोर्ड में बिहार टॉपर शाबरीन की कहानी जान दंग रह जाएंगे आप!

Sabreen Parveen topper story: बिहार बोर्ड 10वीं परीक्षा में शाबरीन परवीन ने 492 अंक लाकर टॉप किया और इतिहास रच दिया. वैशाली के छोटे से गांव की इस बेटी की सफलता के पीछे संघर्ष, मेहनत और पिता की टायर दुकान की कहानी जुड़ी है. जानिए कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद शाबरीन बनीं बिहार टॉपर और लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा.

Sabreen Parveen topper story
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विकाश कुमार

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कहते हैं कि सफलता किसी महल की मोहताज नहीं होती, उसे बस मेहनत का पसीना और अटूट हौसला चाहिए. बिहार के वैशाली जिले के एक गुमनाम से गांव 'छौराही' की संकरी गलियों में आज खुशियों का जो सैलाब उमड़ा है, उसकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. एक पिता जो मीलों दूर दूसरे राज्य में टायरों की घिसाई कर अपनी उंगलियां घिसता रहा ताकि घर में रोशनी बनी रहे, आज उसकी बेटी शाबरीन परवीन ने बिहार बोर्ड की परीक्षा में 492 अंक लाकर पूरे सूबे में इतिहास रच दिया है. शाबरीन ने बिहार बोर्ड 10वीं की परीक्षा में टॉप किया है, जिसके बाद इलाके का माहौल ही बदल गया है. आइए विस्तार से जानते हैं शाबरीन परवीन के सक्सेस के पीछे की पूरी कहानी.

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खुशियों से झूम उठा छौराही गांव

वैशाली जिले के छौराही गांव में आज का सूरज एक नई उम्मीद और गर्व लेकर आया है. गांव की बेटी शाबरीन परवीन ने बिहार बोर्ड की परीक्षा में 492 अंक हासिल कर राज्य भर में टॉप किया है. जैसे ही टॉपर्स की लिस्ट में शाबरीन का नाम आया, पूरा गांव खुशी से झूम उठा. आलम यह है कि गाँव में दिवाली जैसा माहौल है और ग्रामीण एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहे हैं.

टायर की दुकान और बेटी के बड़े सपने

शाबरीन की इस सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी है. उनके पिता, मोहम्मद सज्जाद, पश्चिम बंगाल के रामपुर हाट में एक छोटी सी टायर रिसॉलिंग (Tyre Resoling) की दुकान चलाते हैं. सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करने वाले सज्जाद ने अपनी तंगहाली को कभी बच्चों की पढ़ाई के बीच नहीं आने दिया. शाबरीन तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और बचपन से ही होनहार रही हैं.

सीमित संसाधन, असीमित हौसला

शाबरीन की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने बिना किसी बड़े शहर या महंगे कोचिंग के, गांव में रहकर ही अपनी पढ़ाई पूरी की. घर की आर्थिक चुनौतियां और संसाधनों की कमी भी उनके अनुशासन और मजबूत इरादों को नहीं डगमगा सकी. शाबरीन की मां एक गृहिणी हैं, जिन्होंने हर कदम पर अपनी बेटी का हौसला बढ़ाया. आज शाबरीन न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे बिहार की उन लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं जो अभावों के बीच बड़े सपने देखती हैं.

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