CBSE 12th Revaluation Verification 2026: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने क्लास 12वीं के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया आज यानी 29 मई से शुरू कर दी है. ऐसे में जिन छात्रों को लगता है कि उनकी आंसर शीट सही तरीके से चेक नहीं हुई है, नंबर जोड़ने में गलती हुई है या किसी सवाल के कम नंबर दिए गए हैं, वे अब इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आइए जानते हैं आवेदन करने का तरीका और कितनी देनी होगी फीस.
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पहले जानिए कितनी देनी होगी फीस
CBSE के नई फीस स्ट्रक्चर के मुताबिक अब आंसर शीट की स्कैन कॉपी के लिए हर स्टूडेट को हर सब्जेक्ट के लिए 100 रुपये की फीस देनी होगी. नबंरों के वेरिफिकेशन के लिए भी हर सब्जेक्ट के लिए 100 रुपये ही देने होंगे. वहीं री इवैल्यूएशन के लिए हर सवाल के हिसाब से 25 प्रति प्रश्न फीस ली जाएगी.
बता दें कि इससे पहले यह चार्ज बहुत महंगा था जिसमें स्कैन कॉपी के लिए 700 रुपये प्रति सब्जेक्ट और वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये प्रति सब्जेक्ट और री इवैल्यूएशन के लिए प्रति सवाल 100 रुपये प्रति प्रश्न तय किए थे. बोर्ड ने कहा कि अगर रिव्यू के बाद छात्रों के नंबर बढ़ते हैं तो उनकी री इवैल्यूएशन फीस वापस कर दी जाएगी.
इन आसान स्टेप्स से करें री इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई
जो छात्र इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं वे ऑफिशियल पोर्टल https://cbseit.in के जरिए कुछ आसान स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं.
स्टेप 1: स्कैन की हुई आंसर शीट हासिल करें: छात्रों को सबसे पहले अपनी जांची हुई आंसर बुक की स्कैन की हुई कॉपी हासिल करनी होगी
स्टेप 2: आंसर शीट को ध्यान से रिव्यू करें: छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे जांच लें कि क्या सभी सवालों के जवाब जांचे गए हैं, क्या कुल अंकों की गिनती सही तरीके से की गई है, क्या कोई पेज गायब है, और क्या कोई जवाब बिना जांचे रह गया है
स्टेप 3: अंकों के वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई करें: अगर कोई गड़बड़ी मिलती है, तो छात्र वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं
स्टेप 4: री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई करें: इसके बाद छात्र उन खास सवालों के लिए री-इवैल्यूएशन की रिक्वेस्ट कर सकते हैं, जहां उन्हें लगता है कि उनके अंक गलत तरीके से काटे गए हैं
लाखों छात्रों ने मांगी डिजिटल कॉपियां
बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक लाख छात्रों ने अपनी आंसर शीट देखने के लिए आवेदन किया है.CBSE के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार
- 4,04,319 छात्रों ने उत्तर-पुस्तिकाओं के लिए आवेदन किया
- 11,31,961 उत्तर-पुस्तिकाओं की मांग की गई
- 8,98,214 उत्तर-पुस्तिकाएं पहले ही डिजिटल रूप से उपलब्ध करा दी गई हैं
OMS सिस्टम पर खड़े हुए गंभीर सवाल
आपको बता दें क इस साल सीबीएसई ने क्लास 12वीं की परीक्षाओं के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OMS सिस्टम लागू किया था जिसके तहत करीब 98 लाख कॉपियां डिजिटल तरीके से जांची गईं और सिर्फ 13000 कॉपियां ही मैन्युअल तरीके से चेक हुईं. बोर्ड ने इसे तेज और पारदर्शी बताया था लेकिन रिजल्ट के बाद छात्रों के नंबर काफी कम हो गए. सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट पिछले साल के 88.39 प्रतिशत से घटकर इस बार 85.20 प्रतिशत पर आ गया है. इसके बाद सोशल मीडिया पर शिकायतें बढ़ गईं कि छात्रों को बहुत कम नंबर मिले हैं और पोर्टल भी बार बार क्रैश हो रहा था.
स्कैन कॉपियां सामने आते ही मचा बवाल
जब छात्रों के हाथ में उनकी स्कैन कॉपियां आईं तो OMS सिस्टम की पोल खुल गई. छात्रों और अभिभावकों ने स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया कि आंसर शीट अधूरी हैं और कुछ सवालों के जवाब जांचे ही नहीं गए हैं. कॉपियों के स्कैन बेहद धुंधले हैं और मार्क्स में भारी मिसमैच है. किसी छात्र ने आंसरशीट बदलने के आरोप लगाए तो किसी ने स्टेप वाइज मार्किंग न होने की बात कही. कई छात्रों का दावा है कि उनके एमसीक्यू में भी बिना वजह नंबर काट लिए गए हैं. वेदांत का मामला सामने आने के बाद री इवैल्यूएशन के आवेदनों में और बढ़ोतरी होने के आसार बन गए हैं.
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