सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी CBSE, देश का वो सबसे भरोसेमंद एक्जामिनेशन बोर्ड, जिसके अभेद्य सिस्टम पर पहले कभी उंगली नहीं उठी. जिस CBSE के परीक्षा पैटर्न को देश का सबसे फुलप्रूफ सिस्टम माना जाता था, आज उसी सिस्टम के परखच्चे उड़ चुके हैं. CBSE जो स्कूलों में 10th और 12th के एग्जाम कराने की सरकारी बॉडी है वो आज महाघोटाले के आरोपों से घिरी है. महा-घोटाले को किसी ईडी, सीबीआई या एनआईए ने नहीं, कुछ लड़कों ने बेनकाब कर दिया. 17-17 साल के इन टीनएजर स्टूडेंट जासूसों ने वो सच खोज निकाला जिसने सरकार को लहूलुहान किया हुआ है. विपक्ष खुश है कि सरकार पर हमला करने के लिए अब केवल भाषण ही नहीं, सबूत भी हाथ आ चुके हैं.
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ये सब तब जबकि कहीं कोई आंदोलन नहीं हो रहा, कोई धरना-प्रदर्शन नहीं हो रहा, कहीं कोई लाठीचार्ज नहीं हो रहा. देश के इस साइलेंट रिवॉल्यूशन के चर्चित चेहरा बने हैं यंग स्टूडेंट सुपर कॉप्स वेदांत श्रीवास्तव, सार्थक सिद्धांत, निसर्ग अधिकारी. इन जेन जी ने सरकार के खिलाफ कोई नारेबाजी नहीं की, कहीं धरने पर नहीं बैठे, कोई ऑनलाइन कैंपेन नहीं चलाया. विपक्ष के पास अब तक सरकार को घेरने के लिए केवल आरोपों का सहारा था. लड़कों ने खुद इन्वेस्टगेटर बनकर फटे हुए सिस्टम का कफन उधेड़ दिया. चर्चित चेहरा के इस एपिसोड में आज जानेंगे इन्हीं लड़कों की कहानी.
लड़कों को दिए गए नए टैग!
ये ऐसे लड़के हैं जिनके पास वोट डालने का अधिकार भी नहीं. सीबीएसई का खेल उजागर करते ही छात्रों को सच सामने लाने की कीमत चरित्र-हनन झेलकर चुकानी पड़ रही है. 17 साल के वेदांत श्रीवास्तव को पाकिस्तानी, टूलकिट एजेंट, जॉर्ज सोरोस का मोहरा, एंटी-नेशनल और डीप स्टेट का एजेंट तक पुकारा गया.
19 साल के निसर्ग अधिकारी को सीबीएसई ने क्रिमिनल हैकर कहकर पुकारा. सार्थक सिद्धांत को सरकार की साइड वालों ने विपक्ष का पाला हुआ राजनीतिक मोहरा घोषित कर दिया. वो मानने को तैयार नहीं कि 17 साल का लड़का ऐसी कोई इन्वेस्टिगेशन कर सकता है. ये सब कुछ अरसे से चले आ रहे उसी ट्रेंड की लाइन पर है कि सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है.
राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा!
जिन लड़कों ने सरकार को उसी के फटे हुए सिस्टम का उधेड़ा हुआ सच दिखाया, वो जल्दी ही राहुल गांधी के साथ टेलीवाइज्ड इंटरव्यू में दिखे. राहुल गांधी जब छात्र वेदांत श्रीवास्तव और उसके दोस्तों से मिले तो उन्होंने भी मुस्कुरा-मुस्कुराकर सरकार, मीडिया प्रायोजित ट्रोलिंग की धज्जियां उड़ाई. वेदांत से कहा-जरा देश के सामने इन 17 साल के आतंकवादियों और डीप स्टेट एजेंट्स के चेहरे तो दिखाओ. आगे राहुल ने मुलाकात का पूरा वीडियो कुछ इस तरह के कैप्शन के साथ रिलीज कर दिया.
वेदांत, सार्थक ने लड़ाई अपने लिए लड़ी. अस्लहा उनके लिए तैयार हो गया जिनका पेशा है संसद से सड़क तक सरकार से लड़ना-भिड़ना. अरसे से राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष NEET-NET के पेपर लीक, सरकार को दबोच रहा था लेकिन उनके पास केवल राजनीतिक बयानबाजी थी, कोई पुख्ता सबूत नहीं थे. CBSE के इस कथित महा-घोटाले में जो काम बड़े-बड़े नेता सालों में नहीं कर पाए, उसे 12वीं क्लास के कुछ स्कूली लड़कों ने अपनी बुद्धि, विवेक से महज 6 दिनों में कर दिखाया.
कौन हैं वेदांत श्रीवास्तव?
17 साल के वेदांत श्रीवास्तव दिल्ली के रहने वाले हैं. CBSE के ऑन-स्क्रीनिंग मार्किंग(OSM) घोटाले के सबसे प्रमुख चेहरे और ब्हिलब्लोअर बनकर उभरे. वेदांत ने भी CBSE बोर्ड के 12वीं की परीक्षा दी थी. वेदांत की आपबीती ये है कि उनको फिजिक्स में बेहद कम नंबर मिले. रीवैल्यूशन के लिए उन्होंने डिजिटल आंसर शीट निकलवाई तब देश का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला सामने आया.
आंसर शीट पर उनकी हैडराइटिंग थी ही नहीं. वेदांत ने निडर होकर सोशल मीडिया पर CBSE का फर्जीवाड़ा उजागर किया. बदले में खूब गालियां पड़ीं लेकिन CBSE को झुकना था और वो झुका भी. गलती भी मानी और असली कॉपी ढूंढकर नंबर 65 से बढ़ाकर 74 किए. वेदांत की साहस की कहानी देश के सामने आई तो सामने से राहुल गांधी का फोन आया मिलने के लिए.
सिद्धांत बन गए जासूस!
रांची के सार्थक सिद्धांत भी 17 साल के 12वीं के छात्र हैं. रिजल्ट देखने के बाद सार्थक ने वेदांत से एक कदम आगे जाकर काम किया. शिकायत करने की बजाय खुद एक खोजी जासूस बन गए. सीबीएसई के 500 से अधिक कॉन्फिडेंशियल टेंडर डॉक्यूमेंट एक्सेस करके डाउनलोड कर लिए.
6 दिनों तक रिसर्च करने के बाद डिटेल ब्लॉग लिखकर साबित किया कि कैसे सीबीएसई ने जानबूझकर टेंडर के रूल बदले. TCS को टेंडर रेस से बाहर करके कोएम्प्ट एडुटेक जैसी दागी कंपनी को एक्जाम के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करोड़ों का ठेका दिया. OSM सिस्मट में 17 लाख छात्रों की कॉपीज स्कैन करके ऑनलाइन जांची जानी थी. वही एक काम कोएम्प्ट एडुटेक ने ठीक से नहीं किया जिसका खामियाजा लाखों छात्रों ने कम मार्क्स हासिल करके भुगता.
निर्सग ने खोला सबसे बड़ा पोल!
निसर्ग अधिकारी 12वीं पास कर चुके हैं. अब साइबर-सिक्योरिटी रिसर्चर हैं. अगला बड़ा काम निसर्ग ने कर दिखाया. निसर्ग अधिकारी ने डिजिटल सिस्टम का एक और कफन फाड़ा. सीबीएसई के मार्किंग पोर्टल की कोडिंग में से वो 'मास्टर पासवर्ड' ढूंढ निकाला जो बिना किसी सुरक्षा के खुला पड़ा था.
निसर्ग ने सीबीएसई के मार्किंग पोर्टल (OnMark) के बैक-एंड कोड में एक बिना एन्क्रिप्शन (प्लेन टेक्स्ट) वाला 'हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड' ढूंढ निकाला, जो बिना किसी ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन के सीधे सर्वर में घुसने का रास्ता दे रहा था. मतलब कोई भी हैकर देश के किसी भी एग्जामिनर का अकाउंट खोलकर जांच के लिए आई आंसर शीट को देख सकता था, मार्क्स में फेर-बदल कर सकता था. यहां तक कि निरक्षक के बैंक अकाउंट की जानकारी, पासवर्ड भी बदल सकता था.
इस एथिकल हैकिंग के बाद निसर्ग ने पूरी जिम्मेदारी दिखाते हुए गंभीर खतरे की रिपोर्ट फरवरी 2026 में ही राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In और सीबीएसई को भेज दी थी. लेकिन सब सोए रहे. महीनों तक कोई एक्शन नहीं हुआ तो अब जाकर उन्होंने स्क्रीन रिकॉर्डिंग और सबूतों के साथ पब्लिक कर दिया. इससे भड़के CBSE ने पहले क्रिमिनल हैकिंग का नाम दिया लेकिन मामला और माहौल गर्म देखकर चूक भी मानी और निसर्ग को थैंक्यू भी कहा.
कैसे शुरू हुआ विवाद और मौजूदा स्थिति!
CBSE वाली थ्रिलर कहानी की शुरुआत तब हुई जब 12वीं का रिजल्ट आते ही देश के कोने-कोने से होनहार छात्र रोते हुए सड़कों पर आ गए. फिजिक्स और मैथ जैसे विषयों में टॉपर बच्चों को फेल कर दिया गया था. शुरुआती झटका जब गुस्से में बदला, तो छात्रों ने खुद सबूत जुटाने शुरू किए. जब सबूत जुटे तो साफ हुआ कि सीबीएसई का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पूरी तरह फेल था. देखते ही देखते 17 लाख में से करीब 4 लाख छात्रों ने री-इवैल्युएशन के लिए अप्लाई कर दिया, जिसने सिस्टम की रीढ़ तोड़ दी.
17-18 साल के जासूसों ने ये भी साबित कर दिया कि जब देश की सरकार और विपक्ष दोनों सो रहा हो तब भी घुन लगे सिस्टम को घुटनों पर लाया जा सकता है. अकाट्य डिजिटल और दस्तावेजी जांच के सामने सरकार और शिक्षा मंत्रालय के पास छिपने की कोई जगह नहीं बची. कल तक जो अधिकारी इस डिजिटल चेकिंग को 'भविष्य की तकनीक' बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे थे, उनके चेहरे पर अब हवाइयां उड़ रही थीं.
सरकार को आनन-फानन में सफाई देने के लिए आधी रात को उतरना पड़ा और जांच के लिए आईआईटी मद्रास की शरण लेनी पड़ी. देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आज हो जाएगा या कल, कोई नहीं जानता. सरकार इतने भयंकर दबाव में है कि री-नीट के लिए इंडियन एयरफोर्स की सर्विसेज लेने की सोच रही है ताकि बस बच्चों का पेपर बिना लीक हुए सही सलामत हो जाए.
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