बंगाल चुनाव में UP के 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' IPS की एंट्री, कौन हैं अजय पाल सिंह जिनकी तैनाती पर अखिलेश ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल चुनाव में यूपी के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस अजय पाल शर्मा की तैनाती ने राजनीतिक गलियारों में भारी खलबली मचा दी है. अभिषेक बनर्जी के गढ़ में उनकी सक्रियता और अखिलेश यादव द्वारा भाजपा पर लगाए गए आरोपों ने इस मामले को चुनाव का सबसे चर्चित मुद्दा बना दिया है.

IPS अजय पाल शर्मा
IPS अजय पाल शर्मा

न्यूज तक डेस्क

follow google news

पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में इस बार एक ऐसे चेहरे की चर्चा है जो खुद तो चुनाव मैदान में नहीं उतरा है, लेकिन उसके नाम से ही सियासी गलियारों में हलचल मच गई है. उत्तर प्रदेश कैडर के साल 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी और 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के नाम से मशहूर अजय पाल शर्मा को चुनाव आयोग ने बंगाल में पुलिस ऑब्जर्वर बनाकर भेजा है. उनकी तैनाती दक्षिण 24 परगना जिले में हुई है जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का अभेद्य किला माना जाता है.

Read more!

मैदान में उतरते ही एक्शन मोड में दिखे 

29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले अजय पाल शर्मा पूरी तरह एक्टिव नजर आ रहे हैं. उनकी काम करने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपनी तैनाती के तुरंत बाद उन्होंने संवेदनशील इलाकों का दौरा शुरू कर दिया. सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है, जिसमें वे सुरक्षा बलों के साथ मौके पर तैनात हैं.

मामला तृणमूल कांग्रेस के नेता और उम्मीदवार जहांगीर खान से जुड़ा है. समर्थकों द्वारा मतदाताओं को धमकाए जाने की शिकायत मिलते ही अजय पाल शर्मा ने मोर्चा संभाला और सख्त लहजे में चेतावनी दी. उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई भी गड़बड़ी हुई तो अच्छे से खबर ली जाएगी.

जहांगीर खान के ठिकानों पर छापेमारी 

अजय पाल शर्मा की अगुवाई में SSB और क्यूआरटी (QRT) की टीम ने जहांगीर खान के ठिकानों पर छापेमारी की. क्योंकि जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता है, इसलिए इस कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में तूफान ला दिया है. टीएमसी ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर एक 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' की इमेज वाले अधिकारी को ही इस क्षेत्र के लिए क्यों चुना गया?

अखिलेश यादव का तीखा हमला

इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इस विवाद में कूद पड़े. अखिलेश ने अजय पाल शर्मा को बीजेपी का एजेंट करार देते हुए एक वीडियो साझा किया. उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि रामपुर और संभल में टेस्ट किए गए एजेंटों को बंगाल भेजा जा रहा है.

अखिलेश ने चेतावनी देते हुए कहा कि हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे. सही समय आने पर इनकी करतूतों की जांच होगी. लोकतंत्र के अपराधियों को खोजकर और खोदकर लाया जाएगा और कानूनी सजा दी जाएगी." हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन सब कोशिशों के बावजूद बंगाल में दीदी ही रहेंगी.

क्यों अहम है 29 अप्रैल का दिन?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं. अब बारी है 29 अप्रैल की जब कोलकाता समेत 142 सीटों पर मतदान होना है. दक्षिण 24 परगना का इलाका टीएमसी का सबसे मजबूत आधार रहा है. चुनाव आयोग की रणनीति साफ है और वो है किसी भी तरह के दबाव या गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त करना.

अब देखना ये होगा कि यूपी के इस धाकड़ अफसर की मौजूदगी दूसरे चरण के मतदान के माहौल को कितना बदलती है और निष्पक्ष चुनाव की चुनौती को आयोग कैसे पूरा करता है.

 

    follow google news