kerala election result 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना आज 4 मई को पूरे राज्य में जारी है. इस बीच कन्नूर जिले की हाई-प्रोफाइल सीट 'कुथुपरम्बा' से बेहद चौंकाने वाले रुझान सामने आ रहे हैं. केरल विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एकमात्र उम्मीदवार पीके प्रवीन इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए लगातार बढ़त बनाए हुए हैं, जिसने राज्य की परंपरागत राजनीतिक पार्टियों के खेमों में हलचल मचा दी है. दोपहर 1 बजे तक की काउंटिंग में पीके प्रवीन 9000 के बड़े अंतर से आगे चल रहे है जिससे इस सीट की चर्चा तेज हो गई है.
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कुथुपरम्बा सीट, जो लंबे समय से केरल के राजनीतिक समीकरणों में एक अहम केंद्र रही है, इस बार एक नए बदलाव की गवाह बनती दिख रही है. 2021 के पिछले विधानसभा चुनावों में, यह सीट लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) के के.पी. मोहनन के कब्जे में थी, जिन्होंने यहां एकतरफा जीत दर्ज की थी. हालांकि, 2026 के इस चुनाव में आरजेडी के पीके प्रवीन का मजबूती से उभरना यह साबित करता है कि केरल के मतदाताओं का मिजाज इस बार कुछ अलग है.
कौन हैं पीके प्रवीन?
56 वर्षीय पीके प्रवीन का राजनीतिक कद इस चुनाव में चर्चा का विषय बना हुआ है. कन्नूर के रहने वाले पीके प्रवीन एक उच्च शिक्षित राजनेता हैं. अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपना मुख्य पेशा 'पेंशनभोगी' और 'व्यवसाय' दर्ज किया है. प्रवीन की आर्थिक स्थिति की बात करें तो उन्होंने अपनी कुल संपत्ति लगभग ₹3.3 करोड़ घोषित की है, जबकि उन पर ₹15.8 लाख की देनदारियां हैं. उनकी वार्षिक आय ₹15.9 लाख बताई गई है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन पर कोई भी लंबित आपराधिक मामला नहीं है, जो उनकी 'क्लीन इमेज' को मतदाताओं के बीच पेश करता है.
मुकाबला और राजनीतिक समीकरण
कुथुपरम्बा में लगभग 1.84 लाख मतदाता हैं. यहां मुख्य रूप से वामपंथी दलों और यूडीएफ गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है, लेकिन इस बार आरजेडी के उम्मीदवार ने इस द्विपक्षीय मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. पीके प्रवीन का मुकाबला मुख्य रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की जयंथी राजन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार एडवोकेट शिजिलाल जैसे दिग्गजों से है.
अभी तक की मतगणना के रुझान बता रहे हैं कि आरजेडी का जमीनी नेटवर्क और पीके प्रवीन की जनसंपर्क रणनीति रंग ला रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह बढ़त कायम रहती है, तो यह केरल की राजनीति में गठबंधन के गणित को पूरी तरह से बदल सकती है. फिलहाल, पूरे राज्य की नजरें कुथुपरम्बा के अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो स्पष्ट करेंगे कि क्या वाकई में केरल में एक नया राजनीतिक अध्याय लिखा जा रहा है. मतगणना के अंतिम चरण तक स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी.
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