सफेद सूती साड़ी और हवाई चप्पल में BJP के लिए इतनी घातक क्यों बन गई ममता बनर्जी

एक गरीब परिवार से निकलकर ममता ने बंगाल से 34 साल का वामपंथी शासन उखाड़ फेंका और अब भाजपा के खिलाफ विपक्ष का सबसे प्रमुख चेहरा बनी हुई हैं.

ममता बनर्जी
ममता बनर्जी

अनुराधा तंवर

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भारतीय राजनीति में ममता बनर्जी एक ऐसा नाम हैं जिन्हें समझने के लिए उनके कड़े संघर्ष को समझना जरूरी है. सादगी को अपना हथियार बनाने वाली ममता आज विपक्ष का सबसे घातक चेहरा मानी जाती हैं. नीले बॉर्डर वाली सफेद सूती साड़ी और हवाई चप्पल, यही उनकी पहचान है और यही उनकी 'पॉलिटिकल यूनिफॉर्म' भी. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत से रोकने में उनकी अहम भूमिका रही और अब उनकी नजरें भविष्य की बड़ी राजनीतिक बिसात पर हैं.

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संघर्षों से तपकर निकलीं 'दीदी'

ममता बनर्जी को राजनीति में कुछ भी विरासत में नहीं मिला. एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मीं ममता ने महज 17 साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था. परिवार चलाने के लिए उन्होंने मिल्क बूथ पर काम किया और स्टेनोग्राफर की नौकरी भी की. अभावों ने उन्हें एक 'स्ट्रीट फाइटर' बना दिया.

वो घटनाएं जिन्होंने ममता को बनाया 'फायरब्रांड' नेता

जेपी की कार के बोनट पर चढ़ना: 1975 में जब जयप्रकाश नारायण इंदिरा गांधी के खिलाफ रैली करने कोलकाता आए, तो युवा ममता विरोध जताने के लिए उनकी चलती कार के बोनट पर चढ़ गई थीं. इस घटना ने उन्हें रातों-रात नेशनल हेडलाइन बना दिया. 

सिर पर लोहे की रॉड से हमला: 1990 में सीपीएम कार्यकर्ताओं ने उन पर जानलेवा हमला किया. सिर पर बंधी सफेद पट्टी उनके संघर्ष का प्रतीक बन गई. 

राइटर्स बिल्डिंग की कसम: 1993 में जब उन्हें पुलिस ने सचिवालय (राइटर्स बिल्डिंग) से घसीटकर बाहर निकाला, तो उन्होंने कसम खाई थी कि वह अब मुख्यमंत्री बनकर ही यहाँ लौटेंगी. 

मां, माटी, मानुष और सत्ता का परिवर्तन

ममता ने 1998 में कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी 'तृणमूल कांग्रेस' (TMC) बनाई. सिंगूर और नंदीग्राम के किसान आंदोलनों ने उनकी राजनीति को 'मां, माटी, मानुष' के नारे से जोड़ दिया. 2011 में उन्होंने लेफ्ट की 34 साल पुरानी सत्ता को उखाड़ फेंका. दिलचस्प बात यह है कि 15 साल से मुख्यमंत्री होने के बावजूद वह आज भी अपने पुश्तैनी घर में रहती हैं और देश की सबसे गरीब सीएम मानी जाती हैं. 

राहुल गांधी और ममता के रिश्ते: कभी नरम, कभी गरम

वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के रिश्ते हमेशा मधुर रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी के साथ उनके रिश्तों में अक्सर टकराव देखा गया है. 2024 के चुनाव में भी दोनों के बीच जुबानी जंग देखने को मिली. हालांकि, इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन उनका असली लक्ष्य बीजेपी को सत्ता से बाहर रखना है. 

 

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