70% साइलेंट वोटर और हिंसा का खौफ! प्रदीप गुप्ता ने क्यों नहीं खोला बंगाल की जीत-हार का पिटारा?

प्रदीप गुप्ता ने बंगाल में 70% मतदाताओं के 'मौन' रहने और हिंसा के डर का हवाला देते हुए एग्जिट पोल जारी करने से इनकार कर दिया है. आंकड़ों के बादशाह की इस खामोशी ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसे 2024 की विफलता के बाद उनके सतर्क रुख के तौर पर भी देखा जा रहा है.

प्रदीप गुप्ता
प्रदीप गुप्ता

निधि तनेजा

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भारतीय राजनीति में चुनावी नतीजों से पहले एग्जिट पोल का अपना एक अलग रोमांच होता है. सटीक भविष्यवाणियों के लिए मशहूर 'एक्सिस माय इंडिया' (Axis My India) के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप गुप्ता इस बार एक अलग कारण से चर्चा में हैं. जहां हर सर्वे एजेंसी पश्चिम बंगाल की जीत-हार के आंकड़े पेश कर रही है, वहीं प्रदीप गुप्ता ने बंगाल का एग्जिट पोल जारी न करके सबको चौंका दिया है. आखिर इस 'मौन' के पीछे की वजह क्या है?

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बंगाल में 'सन्नाटे' की क्या है वजह?

प्रदीप गुप्ता ने खुद इस खामोशी पर से पर्दा उठाया है. उनके मुताबिक, बंगाल में सर्वे के दौरान लगभग 70% वोटर्स अपनी राय देने को तैयार नहीं थे. उन्होंने बताया कि:

  • डेटा सांख्यिकीय रूप से अविश्वसनीय (Statistically Unreliable) हो गया था.
  • बंगाल में डर का माहौल है, जहां लोग कैमरों के सामने बोलने से कतरा रहे हैं.
  • उनके कुछ सर्वेक्षकों को सर्वे के दौरान हिंसा और जेल तक का सामना करना पड़ा.
  • प्रदीप गुप्ता का कहना है कि गलत आंकड़े देकर जनता को गुमराह करने से बेहतर उन्होंने चुप रहना ही सही समझा.

हावर्ड की केस स्टडी से 'आंसुओं' तक का सफर

जबलपुर से ताल्लुक रखने वाले प्रदीप गुप्ता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. एक समय प्रिंटिंग प्रेस चलाने वाले गुप्ता ने डेटा की ताकत को समझा और 'एक्सिस माय इंडिया' की शुरुआत की. उनकी सटीकता का आलम यह था कि हावर्ड बिजनेस स्कूल ने उनके सर्वे मॉडल को अपने सिलेबस का हिस्सा बना लिया.

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका '400 पार' का अनुमान गलत साबित हुआ, जिसके बाद उन्हें भारी आलोचना झेलनी पड़ी. लाइव शो के दौरान उनके आंसू भी खूब वायरल हुए थे.

तमिलनाडु में कर दिया धमाका

बंगाल पर चुप रहने वाले प्रदीप गुप्ता ने तमिलनाडु को लेकर बड़ा दावा किया है. उनके सर्वे के मुताबिक, विजय की 'टीवीके' पार्टी न केवल सबसे बड़ी पार्टी बनेगी, बल्कि सरकार बनाने की स्थिति में भी हो सकती है.

क्या डेटा मॉडल में है कोई चूक?

सवाल अब भी बरकरार है कि क्या वाकई बंगाल का वोटर इतना 'साइलेंट' है या फिर पिछली विफलता के बाद प्रदीप गुप्ता अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहते? 4 मई के नतीजे तय करेंगे कि आंकड़ों के इस बादशाह की खामोशी सही थी या उनके मॉडल में कोई बड़ी चूक.


 

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