पश्चिम बंगाल की सियासत में 4 मई की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है. 'मेदिनीपुर के लाडले' कहे जाने वाले शुभेंदु अधिकारी ने वह कर दिखाया, जिसे अब तक नामुमकिन माना जा रहा था. शुभेंदु ने न केवल अपनी सियासी जमीन बचाई बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके सबसे मजबूत किले 'भवानीपुर' में करारी शिकस्त देकर पूरे देश को हैरत में डाल दिया. इस जीत के साथ ही अब राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या शुभेंदु अधिकारी ही पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री होंगे?
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पढ़ाई में भी रहे हैं अव्वल
अगर शुभेंदु अधिकारी की बात करें, तो उनका राजनीतिक सफर जितना मजबूत है, उतना ही उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड भी प्रभावशाली रहा है. उनका बचपन पूर्व मेदिनीपुर में बीता, जहां उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई स्थानीय स्कूलों से पूरी की. उन्होंने साल 1987 में कांथी मॉडल स्कूल से अपनी 12वीं की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज का रुख किया.
ग्रेजुएशन के लिए शुभेंदु अधिकारी ने विद्यासागर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कांथी पी.के. कॉलेज में दाखिला लिया और स्नातक की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के प्रति उनका लगाव यहीं कम नहीं हुआ. उन्होंने इसके बाद कोलकाता की प्रतिष्ठित रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी से M.A की डिग्री हासिल की.
भवानीपुर में कैसे ढहा 'दीदी' का किला?
चुनाव परिणामों की बात करें तो शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया. भवानीपुर को ममता बनर्जी का सबसे अभेद्य दुर्ग माना जाता था, लेकिन 'दादा' की रणनीति के आगे टीएमसी की मजबूती काम न आ सकी. इस ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी खेमे में जश्न का माहौल है और शुभेंदु को मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि पार्टी जल्द ही उनके नाम पर मुहर लगा सकती है.
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