तमिलनाडु की राजनीति में अब 'दो युवाओं' की केमिस्ट्री चर्चा का केंद्र बन गई है. एक ओर फिल्मी पर्दे से राजनीति में कदम रखने वाले सुपरस्टार थलापति विजय हैं और दूसरी ओर दिल्ली से कन्याकुमारी तक पदयात्रा करने वाले राहुल गांधी. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणामों में विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का जादुई आंकड़ा (118) अभी भी 10 सीटों की दूरी पर है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विजय और राहुल गांधी मिलकर राज्य में एक नए युग की शुरुआत करेंगे?
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राहुल का 'स्पेशल' फोन कॉल
परिणामों के बाद जहां हर तरफ अटकलें हैं, वहीं राहुल गांधी ने थलापति विजय को सीधे फोन कर बधाई दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने विजय से बात की और टीवीके के शानदार प्रदर्शन पर उन्हें बधाई दी. दिलचस्प यह है कि राहुल गांधी ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके को बधाई देने के बजाय सीधे विजय से संवाद किया. राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के 'डीएमके की छाया' से बाहर निकलने और एक नई दिशा तलाशने के संकेत के रूप में देख रहे हैं.
सत्ता का गणित: क्या कांग्रेस बनेगी 'किंगमेकर'?
विजय की पार्टी टीवीके को सरकार बनाने के लिए 10 और सीटों की जरूरत है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक गठबंधन का समीकरण कुछ इस तरह हो सकता है-
- कांग्रेस: 5 सीटें
- पीएमके (PMK): 4 सीटें
- सीपीआई (CPI) और सीपीएम (CPM): 2-2 सीटें
अगर विजय इन सभी दलों के साथ गठबंधन करते हैं, तो आंकड़ा 121 तक पहुंच सकता है, जो बहुमत के 118 के आंकड़े से अधिक है. विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने भी कांग्रेस को गठबंधन का खुला निमंत्रण दिया है. उनका कहना है कि कांग्रेस ने अन्य दलों को समर्थन देकर अपनी ताकत कम कर ली है, और अब टीवीके के साथ जुड़कर वे अपनी खोई हुई राजनीतिक विरासत और गौरव वापस पा सकते हैं.
क्यों कांग्रेस और विजय 'नेचुरल अलायंस' हैं?
विजय के करियर और राहुल गांधी के साथ उनके रिश्तों की शुरुआत काफी पुरानी है. 2009 के दौरान जब राहुल गांधी तमिलनाडु में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे थे, तब विजय को युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की भी चर्चा थी. हालांकि, तब बात आगे नहीं बढ़ सकी थी, लेकिन दोनों के बीच एक पुराना 'कंफर्ट लेवल' है.
इसके अलावा, विजय अपनी रैलियों में लगातार डीएमके और एआईएडीएमके पर निशाना साधते रहे हैं. ऐसे में इन दो बड़ी द्रविड़ पार्टियों के साथ गठबंधन करना उनके कार्यकर्ताओं के लिए मुश्किल हो सकता है. इसीलिए, राहुल और विजय की यह जुगलबंदी एक 'नेचुरल अलायंस' की तरह देखी जा रही है. विजय और राहुल गांधी की यह केमिस्ट्री क्या तमिलनाडु की सत्ता का नया मास्टर प्लान साबित होगी? यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि तमिलनाडु की राजनीति में अब बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं.
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