Charchit Chehra: घर के बाद विजय की जीत के नारों की गूंज है, तो घर के अंदर सीटियों के शोर के बाद भी एक अजीब सी खामोशी ओढ़े हैं. जिस विजय ने 234 सीटों के समीकरण चुटकियों में सुलझा लिए, वो अपने ही घर के दो कमरों की दूरी क्यों नहीं पाट पाए? एक तरफ तमिलनाडु की जनता का बेपनाह प्यार, दूसरी तरफ पत्नी का तलाक का नोटिस और बच्चों की खामोश बगावत. करोड़ों का ये 'थलपति' आज सिंहासन पर तो बैठा है, लेकिन क्या अपनों को पीछे छोड़ आया है? बड़ी चर्चा हो रही है विजय और उनकी पर्सनल फैमिली लाइफ की. आखिर ऐसा क्या हुआ कि तमिलनाडु का 'हीरो', घर के आंगन में 'जीरो' साबित हो रहा है? संगीता, जो दशकों तक विजय के करियर की सबसे बड़ी ताकत और 'साइलेंट ऑब्जर्वर' रहीं, आज एक अलग दुनिया में हैं जहां तक कोई रिपोर्टर नहीं कोई कैमरा नहीं पहुंच पाया. संगीता, जेसन दिव्या ही वो चर्चित चेहरे हैं जिनको सब ढूंढ रहे हैं.
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फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे ढेरो मिसालें हैं कि एक्टर या एक्ट्रेस ने हम प्रोफेशन से प्यार करके शादी की हो. ऐसी भी कहानियां हैं कि बेशुमार दौलत, शोहरत कमाने वाले एक्टर ने किसी और दुनिया में जाकर दिल दिया हो. विजय की कहानी फैन सबसे बड़ा है. फैन क्लब ने विजय को इतना बड़ा स्टार बनाया. फैन क्लब ने पार्टी बनाई. फैन क्लब ने वोटर बनकर जीत दिलाई और एक कहानी उस फैन की जिसने 27 साल तक विजय के लिए पिलर का काम किया. हीरो और एक फैन के प्यार की कहानी है विजय की लव स्टोरी.
खुशियों से झूमता दिखा परिवार
4 मई को जब टीवी पर तमिलनाडु चुनाव के रिजल्ट आ रहे थे तब विजय के घर के अंदर बहुत सारे कैमरे रिकॉर्डिंग मोड में ऑन थे. सब एक-दूसरे के इमोशंस को कैप्चर कर रहे थे. सारे वीडियो में थलापति विजय तो नहीं दिखे लेकिन दिखा एक खुशियों से झूमता हंसता-खिलखिलाता परिवार. पिता एस ए चंद्रशेखर, मां शोभा और परिवार के कई लोग जो सीटी बजाकर घर में ही विजय की जीत का जश्न मना रहे थे.
तमिलनाडु की सियासत में विजय अपनी मेहनत, सोच-समझकर सूरज बनकर उभरे हैं. कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं, कोई गॉडफादर नहीं, कोई अलायंस नहीं. विजय की एक सीटी पर जनता ने मसीहा मानकर विजय को सत्ता सौंप दी. पूरा तमिलनाडु विजय के लिए खुश है लेकिन खुद विजय के घर में सूनापन है. ये एक ऐसी विडंबना है जिसे शब्दों में पिरोना मुश्किल है. विजय से पत्नी संगीता, संगीता से विजय, विजय से जेसन-दिव्या और जेसन-दिव्या से यही कहते या सोचते होंगे कि तुझसे नाराज नहीं... बस हैरान हूं मैं. नाराजगी विजय की संगीता से, संगीता की विजय की हो सकती है लेकिन झुलस पूरा परिवार गया.
नहीं नजर आईं पत्नी संगीता सोर्नालिंगम
परिवार में खुशियों की घड़ी तो आई लेकिन बस वो नहीं आए विजय के वो अपने जो संगीता से शादी करने के बाद जिंदगी का हिस्सा बनते गए. नहीं नजर आईं पत्नी संगीता सोर्नालिंगम, बेटे जेसन संजय और बेटी दिव्या साशा. पत्नी नहीं दिखी तो मान सकते हैं कि तलाक का केस चल रहा है लेकिन जेसन और दिव्या साशा भी नहीं दिखे तो समझ आया कि सब कुछ पाने के बाद भी विजय की लाइफ में क्या मिसिंग है. कहा जाता है कि विजय और संगीता के विवाद में बच्चों ने मां की साइड ली है. मां के साथ ही रहते हैं.
तृषा का था 43वां जन्मदिन
4 मई 2026 की दोपहर तमिलनाडु की सियासत और थलपति विजय के प्राइवेट लाइफ में नई सनसनी लाया. जब एक्ट्रेस तृषा की कार विजय के घर के आगे रूकी. जब टीवीके (TVK) प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता की ओर बढ़ रही थी तब तृषा कृष्णन के पहुंचने की चर्चा हो गई. हो सकता है ये कि इत्तेफाक हो भी, नहीं हो. उसी दिन तृषा का 43वां जन्मदिन भी था. तिरुपति में माथा टेकने के बाद तृषा सीधे विजय के चेन्नई वाले घर पहुंची. उन्होंने न केवल विजय को ऐतिहासिक जीत की बधाई दी, बल्कि इस दोहरी खुशी का जश्न भी मनाया.
घर से निकलते वक्त तृषा के चेहरे की मुस्कान और उनका 'विक्ट्री साइन' मीडिया के कैमरों में कैद हो गया, जिसने उन अटकलों को और हवा दे दी जो लंबे समय से दोनों के रिश्तों को लेकर लगाई जा रही थीं. ऐसे समय में जब विजय का अपना परिवार इस जश्न की तस्वीरों से नदारद था, तृषा की इस 'स्पेशल एंट्री' ने राजनीतिक गलियारों में यह संदेश दे दिया कि विजय के नए सफर में अब समीकरण सिर्फ सत्ता के ही नहीं, बल्कि रिश्तों के भी बदल चुके हैं.
विजय सुपरस्टार थे और संगीता उनकी बड़ी फैन. फैन के लाइफ पार्टनर बनने की कहानी शुरु हुई थी 1996 में हुई, जब विजय की फिल्म 'पूवे उनक्कागा' (Poove Unakkaga) ब्लॉकबस्टर रही थी. ब्रिटेन में रहने वाली श्रीलंकाई तमिल मूल की संगीता सोर्नालिंगम, जो विजय की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं, केवल उनसे मिलने के लिए लंदन से चेन्नई आईं. उनकी पहली मुलाकात फिल्म 'कालमेल्लम काथिरुप्पेन' के सेट पर हुई, जहां संगीता ने विजय को फिल्म की सक्सेस पर पर्सनली विश किया.
आसपास था ग्लैमर का अंबार
विजय के आसपास ग्लैमर का अंबार था लेकिन संगीता की सादगी दिल को छू गई. उन्होंने संगीता को अपने घर इनवाइट किया मां शोभा और पिता एस.ए. चंद्रशेखर से मिलवाया. विजय के पिता को संगीता इतनी पसंद आईं कि उन्होंने खुद विजय से उनके हाथ की मांग की. सब राजी हुए तो राजी खुशी से 25 अगस्त 1999 को चेन्नई में दोनों की शादी भी हो गई. परिवार ने एक और इंटर रिलीजन मैरिज पर मुहर लगाई. ईसाई चंद्रशेखर ने भी हिंदू शोभा से शादी की थी. विजय ने भी ईसाई होते हुए हिंदू संगीता से शादी की. शादी भी हुई तो दोनों धर्मों के रिवाज से.
विजय की जीत की इस महागाथा में उनकी पत्नी संगीता सोरलिंगम वो 'साइलेंट पिलर' हैं, जिन्होंने विजय को हर तूफान में थामे रखा. एक फैन से जीवनसाथी बनने तक का संगीता का सफर किसी फिल्म से कम नहीं है, लेकिन लाइमलाइट से दूर रहकर उन्होंने न केवल घर संभाला, बल्कि विजय को एक परिपक्व राजनेता बनने का मानसिक संबल भी दिया. उनके बेटे संजय और बेटी दिव्या को भी उन्होंने उसी सादगी में पाला है, जो विजय की पहचान है. आज जब विजय तमिलनाडु की कमान संभालने जा रहे हैं, तो यह सिर्फ एक राजनेता का उदय नहीं है, बल्कि एक ऐसे परिवार की जीत है जिसने पिछले तीन दशकों से हर उतार-चढ़ाव को एक साथ झेला है.
विजय ने खुद अपने पुराने इंटरव्यूज़ में माना है कि संगीता उनकी सबसे बड़ी और सबसे बड़ी क्रिटिक रहीं. फिल्मों की समझ इतनी कि संगीता फिल्म रिलीज होने से पहले विजय को बता देती थीं कि कौन सी फिल्म चलेगी और कौन सी नहीं. कहानियां ऐसी भी कि कई फिल्मों में विजय के ऑन-स्क्रीन लुक और स्टाइलिंग के पीछे संगीता का ही हाथ रहा है, जिससे उन्हें एक 'स्टाइल आइकन' बनने में मदद मिली.
विजय साल के 365 दिन शूटिंग और मीटिंग्स में व्यस्त रहते थे, ऐसे में संगीता ने ही बच्चों की परवरिश और घर की पूरी जिम्मेदारी संभाली. बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए उन्होंने लंदन और चेन्नई के बीच तालमेल बिठाया, ताकि बदले दौर के लिए खुद को तैयार कर सकें. संगीता ने जानबूझकर खुद को और बच्चों को लाइमलाइट से दूर रखा ताकि विजय का करियर किसी भी पारिवारिक विवाद या मीडिया ट्रायल की भेंट न चढ़े.
27 साल बाद शादी के रिश्ते में दरार की खबरें
27 साल के इस लंबे साथ के बाद कुछ वक्त पहले फेयरीटेल रिश्ते में दरार की खबरें फैलने लगी. विजय तृषा के साथ दिखने लगे थे. माना जाता है कि यही कारण बना शादी में दरार आने का. विजय जब चुनावी तैयारियों को लेकर पीक पर थे, तब फरवरी में संगीता ने चंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी, जिसमें उन्होंने विजय पर 'बेवफाई' और 'मानसिक उपेक्षा' के गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विजय एक को एक्टर के साथ एक्ट्रा मैरिटल अफेयर में हैं. इशारा तृषा की ओर लेकिन नाम नहीं लिया. तलाक का मामला अभी भी पेंडिंग है. हो सकता है 15 जून को कोई फैसला हो जाए.
प्यार कभी कम नहीं होता. संगीता ने तलाक तो मांगा लेकिन कभी उनको डैमेज करने की कोशिश नहीं की. कभी दुनिया को नहीं बताया कि उनकी लाइफ में क्या चल रहा है. कोई मीडिया इंटरव्यू नहीं, कोई न्यूज लीक नहीं. दुनिया को खबर तब मिली जब उन्होंने तलाकनामा फाइल किया. कोई कितना भी चुप रहे, खामोशी की चादर ओढे रहे. बड़े लोगों की प्राइवेट लाइफ किसी न किसी बहाने बाहर आ ही जाती है. विजय की राजनीतिक कार्यक्रमों से लेकर जीत के जश्न तक पत्नी ही नहीं, बच्चों के नहीं दिखने पर बातें बननी लगीं कि दरार केवल पति-पत्नी के बीच नहीं, पिता और बच्चों के बीच भी है.
बाप-बेटे के रिश्तों में तनाव
दावा किया गया कि जेसन संजय ने सोशल मीडिया पर अपने पिता को अनफॉलो कर दिया है. अपने नाम से पिता वाला V हटाकर S जोड़कर जेसन संजय एस कर लिया है. जेसन भी पिता की तरह फिल्म लाइन में हैं लेकिन डायरेक्टर के तौर पर सिग्मा फिल्म के साथ डेब्यू करने वाले हैं. विजय की छोटी बेटी दिव्या साशा 20 साल की हैं. लाइमलाइट से पूरी तरह दूर रही हैं. दिव्या यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया से Psychology की पढ़ाई कर रही हैं. मां, भाई की तरह उन्हें भी अरसे से विजय के साथ नहीं देखा गया.
विजय के मुख्यमंत्री बनने के इस मोड़ पर, राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र केवल उनके प्रशासन पर ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन के इन पहलुओं पर भी है. एक सार्वजनिक नेता के तौर पर उनकी छवि मजबूत हुई है, लेकिन एक पिता के तौर पर इन दूरियों को कम करना उनके लिए एक इमोशनल चैलेंज बना है. आने वाले वक्त से पता चलेगा कि सीएम के तौर के पर उनकी नई पारी उनके बिखरे परिवार को समेट पाएगी या नहीं.
आज जब विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, तो गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस ऐतिहासिक पल में उनके बच्चे उनके साथ खड़े होंगे? क्या सत्ता का यह आलीशान गलियारा घर की उस दूरी को कम कर पाएगा जो पिछले कुछ सालों में बढ़ती चली गई? एक राजनेता के लिए जनता का प्यार कमाना शायद आसान है, लेकिन टूटे हुए रिश्तों को फिर से जोड़ना सबसे बड़ी चुनौती. विजय के लिए असली जीत तब होगी जब तमिलनाडु के सचिवालय 'कोट्टई कुर्सी पर बैठने के बाद, उनके घर के दरवाजे भी अपनों की खुशियों के लिए फिर से खुलेंगे.
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