Tamil Nadu Election Results 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आज 4 मई को आ रहे हैं. इस चुनाव में एक तरफ जहां दिग्गज राजनीतिक पार्टियों का बोलबाला है, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी के राजनीतिक सशक्तिकरण की तस्वीरें भी उभर रही हैं. चेन्नई की रॉयलपुरम विधानसभा सीट से अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कज़गम' (TVK) के उम्मीदवार केवी विजय दामू (Vijay Damu) इस वक्त पूरे राज्य में चर्चा का विषय बने हुए हैं.
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विजय दामू को एक ऑटो ड्राइवर है. उनका राजनीतिक सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. एक साधारण ऑटो चालक से लेकर रॉयलपुरम जैसी महत्वपूर्ण सीट से टीवीके के आधिकारिक उम्मीदवार बनने तक की उनकी यात्रा और अब इस सीट पर इनकी जीत ने युवाओं और आम आदमी में उम्मीद की किरण जगाई है.
कौन हैं विजय दाूमू?
पेशे से ऑटो ड्राइवर रहे केवी विजय दामू ने अपनी उम्मीदवारी के दौरान ये साफ किया था कि वे केवल एक प्रत्याशी नहीं, बल्कि उस आम जनता की आवाज हैं जो लंबे समय से बदलाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं. अपने चुनावी कैंपेन के दौरान वे लोगों के बीच सीधे जाकर मिलते रहे और उन्होंने अपनी सादगी से मतदाताओं का दिल जीता. टीवीके के सुप्रीमो विजय (Thalapathy Vijay) को अपना आदर्श मानने वाले दामू ने अपने प्रचार के दौरान 'थलापति विजय' को अपना ब्रांड बताते हुए कहा था कि वे पूरी ईमानदारी से जनता की सेवा करेंगे.
30 साल से जुड़े हैं विजय थलापति से
एक इंटरव्यू में विजय दामू ने बताया कि वो टीवीके चीफ विजय थलापति को पिछले 30 सालों से जुड़े हैं. उन्होंने भावुक होकर बताया कि जब उन्हें पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किया गया, तो उन्हें अपने नेता में एक पिता की छवि दिखाई दी. उन्होंने अपने नाम में भी 'विजय' को कानूनी रूप से जोड़ लिया है, जो उनके समर्पण का प्रमाण है.
ऐसे हुई मुलाकात
एक इंटरव्यू में विजय दामू ने बताया कि 30 पहले वे थलापति विजय के केवल फैन थे जो उनके फैन क्लब (Fan Club) से जुड़े. यह क्लब धीरे-धीरे कल्याणकारी संगठन में बदला, जहां उन्होंने समाज सेवा के काम शुरू किए. एक फैन के तौर पर वे अपने नेता के साथ विभिन्न कार्यक्रमों और कल्याणकारी कार्यों में शामिल होते रहे. यही वह प्रक्रिया है जिससे उनका जुड़ाव गहरा होता गया. वे एक ऐसे समर्पित कार्यकर्ता बने जिन्होंने 30 वर्षों तक थलापथी के नेतृत्व में काम किया.
42 साल पहले पिता का निधन...अब थलापति ही सबकुछ
विजय दामू ने बताया कि उनके पिता का निधन 42 साल पहले हो गया था. ऐसे में, जब उन्हें टीवीके में एक जिम्मेदारी मिली और बाद में विधायक का टिकट दिया गया, तो उन्हें विजय में एक 'पिता' की छवि दिखाई दी. उन्हें मार्गदर्शन की कमी महसूस होती थी और विजय ने उस कमी को एक संरक्षक के रूप में पूरा किया.
जब मंच पर घबराने लगे थे दामू
विजय दामू ने एक भावुक वाकया साझा किया कि 30 साल बाद भी जब वे अपने नेता से मिलते हैं, तो उन्हें आज भी पहली बार मिलने जैसी घबराहट और नर्वसनेस महसूस होती है. एक बार मंच पर नर्वसनेस के कारण जब उनका हाथ नहीं उठ रहा था तो खुद थलापथी विजय ने उनका हाथ पकड़कर ऊपर उठाया था ताकि वे भीड़ का अभिवादन कर सकें. यह पल उनके लिए एक यादगार सबक की तरह था.
आठवीं पास और आय शून्य
46 साल के दामू महज आठवीं तक पढ़े हैं. इनकी कुल संपत्ति महज 28.9 लाख की है. इनकी कोई देनदारी भी नहीं है. परिवार काफी छोटा है और कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है. इनके खिलाफ 4 आपराधिक मामले दर्ज हैं.
मुश्किलें और चुनाव अभियान
विजय दामू ने बताया कि उनका चुनाव अभियान भी काफी चुनौतियों से भरा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रैलियों के लिए परमिशन नहीं दी जा रही थी. पुलिस का उन पर दबाव था. इसके बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पैसे के बल पर नहीं, बल्कि लोगों के साथ सीधे जुड़ाव के कारण चुनाव लड़ रहे हैं.
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