West Bengal Election: 142 सीटें और 29 अप्रैल का इम्तिहान...दूसरे चरण में टीएमसी का पलड़ा भारी या बीजेपी करेगी खेला? जानें पूरा एनालिसिस

West Bengal Election 2026 Analysis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होना है, जिसे बंगाल की सत्ता की दिशा तय करने वाला सबसे अहम चरण माना जा रहा है. क्या ममता बनर्जी की टीएमसी अपने मजबूत गढ़ को बचा पाएगी या शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी बड़ा उलटफेर करेगी? जानिए दूसरे चरण को लेकर पूरी एनालिसिस.

West Bengal Election 2026
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न्यूज तक डेस्क

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. पहले चरण के मतदान के बाद अब सबकी नजरें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण पर टिकी हैं. इसी बीच न्यूज़ तक के खास कार्यक्रम में चुनावी विश्लेषक संजय कुमार ने आंकड़ों के जरिए बताया है कि दूसरे चरण की 142 सीटें किस तरह बंगाल की सत्ता का भविष्य तय करेंगी. विस्तार से जानिए पूरी कहानी.

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बीजेपी की ताकत बनाम ममता का गढ़

संजय कुमार के विश्लेषण के अनुसार, पहले चरण की 152 सीटों पर बीजेपी की पकड़ अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत रही है. पिछले चुनाव में बीजेपी को इन इलाकों में करीब 39.5% वोट मिले थे और उसकी 77 में से 59 सीटें यहीं से आई थीं. वहीं, दूसरे चरण की 142 सीटें पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का गढ़ मानी जाती हैं. प्रेसिडेंसी एरिया और कोलकाता के आसपास के इन इलाकों में पिछली बार टीएमसी ने 90-95 सीटों पर एकतरफा जीत हासिल की थी.

महिला वोटर्स का रुख

चुनाव में महिला वोट बैंक को लेकर संजय कुमार ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत 'डिलीवरी बनाम प्रॉमिस' साझा किया. उन्होंने बताया कि सत्ताधारी पार्टी जो लाभ दे रही है (जैसे लक्ष्मी भंडार योजना), वह 'डिलीवरी' है जो सीधे जेब में आ रही है, वहीं विपक्षी पार्टी (बीजेपी) जो 3000 रुपये देने का वादा कर रही है, वह 'प्रॉमिस' है. चुनावी इतिहास गवाह है कि महिलाएं अक्सर 'डिलीवरी' पर ज्यादा भरोसा करती हैं. इस लिहाज से ममता बनर्जी को महिला वोटर्स में अभी भी बढ़त मिलने की संभावना है.

बीजेपी के लिए क्या है सत्ता की राह?

संजय कुमार का मानना है कि बीजेपी के लिए सरकार बनाने की उम्मीदें पहले चरण के प्रदर्शन पर टिकी हैं. अगर पहले चरण में बीजेपी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया होगा, तभी वह दूसरे चरण (जो टीएमसी का गढ़ है) में कड़ी टक्कर देकर जादुई आंकड़े तक पहुंच पाएगी. यदि पहले चरण में बीजेपी पिछड़ती है, तो उसके लिए सत्ता की राह बेहद कठिन हो जाएगी.

आधी आबादी का निर्णायक फैसला

बंगाल में महिला वोटर किंगमेकर की भूमिका में हैं. संजय कुमार के मुताबिक, अगर महिला वोटर्स का केवल 3-4% झुकाव भी किसी एक पार्टी की तरफ होता है, तो वह चुनाव के नतीजों में बड़ा फेरबदल कर सकता है. पिछले कुछ चुनावों से बंगाल की महिलाएं ममता बनर्जी के पक्ष में मतदान करती रही हैं, और वेलफेयर स्कीम्स के चलते इस बार भी यह रुझान बरकरार रह सकता है.

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