पश्चिम बंगाल चुनाव में 92% की 'ऐतिहासिक' वोटिंग से किसे फायदा? वरिष्ठ पत्रकार सतीश सिंह ने कर दी बड़ी भविष्यवाणी!

Satish Kumar Singh analysis on WB Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 92% की ऐतिहासिक वोटिंग ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं. वरिष्ठ पत्रकार सतीश कुमार सिंह के विश्लेषण में जानिए क्या यह रिकॉर्ड मतदान सत्ता परिवर्तन का संकेत है, महिला वोटरों में बदलाव का असर, बीजेपी और ममता बनर्जी की रणनीति और किसके पक्ष में जा सकता है चुनाव परिणाम.

West Bengal election 2026
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न्यूज तक डेस्क

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर हुई बंपर वोटिंग ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है. 92% मतदान को ऐतिहासिक माना जा रहा है, हालांकि इसमें वोट डिलीशन का भी एक बड़ा हाथ बताया जा रहा है. इसी बीच न्यूज तक के खास कार्यक्रम 'साप्ताहिक सभा' में तक चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और वरिष्ठ पत्रकार सतीश कुमार सिंह ने बंगाल चुनाव के नतीजों को लेकर कई चौंकाने वाले विश्लेषण साझा किए हैं. आइए जानते है पूरी बात.

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क्या 92% वोटिंग सत्ता परिवर्तन का संकेत है?

सतीश कुमार सिंह का मानना है कि इस बार बंगाल में मतदान का प्रतिशत बढ़ना सीधे तौर पर अस्तित्व की लड़ाई से जुड़ा है. उन्होंने कहा कि एसआईआर के डर की वजह से लोगों को लगा कि अगर वोट नहीं डाला तो जमीन-जायदाद और नागरिकता सब खतरे में पड़ सकती है. इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से बंगाली वोटर भारी भाड़ा खर्च कर वोट डालने पहुंचे. आंकड़ों के मुताबिक, पिछली बार की तुलना में करीब 20 लाख वोट अधिक पड़े हैं.

ममता के अभेद्य दुर्ग 'महिला वोटर' में सेंध?

सतीश जी के विश्लेषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा महिला वोटरों को लेकर है. उन्होंने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी की जीत का बड़ा आधार महिला वोटर रही हैं, लेकिन इस बार उनके बीच एंटी-इनकंबेंसी दिखी है. शहरी महिलाओं में सुरक्षा और युवाओं के लिए बेरोजगारी को लेकर चिंताएं नजर आईं. अगर ममता के इस मजबूत पिलर में थोड़ी भी सेंध लगती है, तो बीजेपी को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है.

'खेला होवे' वाला माहौल गायब, क्या है ममता की रणनीति?

2021 के चुनाव की तुलना करते हुए सतीश सिंह ने कहा कि इस बार ममता कैंप में वो 'खेला होवे' जैसी उत्तेजना और बवाल नहीं दिख रहा है. I-PAC जैसे मैनेजर्स की अनुपस्थिति और रणनीति में बदलाव ने इस बार के चुनाव को अलग बना दिया है. हालांकि, उन्हें लगता है कि ममता को एसआईआर का फायदा मिल सकता है, लेकिन बीजेपी का चुनाव प्रचार और संसाधनों का मैनेजमेंट मुकाबला बेहद कड़ा बना रहा है.

अमित शाह का 'स्वतंत्र' चुनाव और मोदी फैक्टर

सतीश जी ने इसे अमित शाह का पहला इंडिपेंडेंट चुनाव करार दिया, जिसमें पीएम मोदी एक मुकुट की तरह हैं, लेकिन जमीन पर पूरी बिसात अमित शाह ने बिछाई है. उन्होंने कहा कि बीजेपी अब केवल शहरी पार्टी नहीं रही, बल्कि ग्रामीण बंगाल में भी मुकाबला दे रही है. रूरल बंगाल में ममता का काम उनकी जीत की गारंटी माना जाता है, लेकिन बीजेपी ने इस बार उनके गढ़ में भी सेंध लगाने की पूरी कोशिश की है.

मुकाबला बहुत टफ है

सतीश सिंह ने स्पष्ट किया कि, 'ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव आसान नहीं है.' उनके मुताबिक, मुकाबला जोरदार है और नतीजों के बारे में फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है और उनके सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा होना तय माना जा रहा है.

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पश्चिम बंगाल चुनाव: 'खुल कर बोल रहा है वोटर, पर किसका पलड़ा भारी?', वरिष्ठ पत्रकार प्रीति चौधरी ने बताया ग्राउंड रियलिटी

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