पश्चिम बंगाल के चुनावी दंगल ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. 2021 के चुनावों में जहां बंगाली अस्मिता ने हिंदुत्व के नैरेटिव को पछाड़ दिया था, वहीं 2024 के समीकरण काफी बदलते नजर आ रहे हैं. इसी बीच न्यूज तक के खास कार्यक्रम 'साप्ताहिक सभा' में तक चैनल्स के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और वरिष्ठ पत्रकार प्रीति चौधरी ने बंगाल चुनाव के समीकरणों पर विस्तृत चर्चा की.प्रीति चौधरी ने बंगाल के विभिन्न हिस्सों का दौरा करने के बाद जो अंदर की बात बताई है, वह राज्य के राजनीतिक भविष्य का संकेत दे रही है.
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साइलेंट नहीं, इस बार वोकल है बंगाल का वोटर
प्रीति चौधरी के अनुसार, 2021 के चुनावों में बंगाल का वोटर काफी हद तक साइलेंट था, लेकिन इस बार मतदाता अपनी राय रखने में काफी वोकल नजर आ रहा है. उन्होंने बताया कि इस बार बंगाल में रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग होने की संभावना है. लोगों में इस बात को लेकर एक तरह का डर और जागरूकता है कि अगर इस बार वोट नहीं दिया, तो आने वाले समय में मतदाता सूची से उनका नाम कट सकता है.
ममता बनाम लोकल लीडरशिप
ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के मुताबिक, 15 साल के शासन के बाद राज्य में सत्ता विरोधी लहर तो दिख रही है, लेकिन वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है. प्रीति चौधरी ने बताया कि ममता बनर्जी आज भी जनता के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं, जितनी पहले थीं. लोगों का गुस्सा स्थानीय नेताओं और उनके द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को लेकर है. ममता की 'लक्ष्मी भंडार' जैसी कल्याणकारी योजनाएं आज भी जमीन पर काफी प्रभावी हैं, जो उनके वोट बैंक को बचाए रखने में मदद कर रही हैं.
ध्रुवीकरण और 'हिंदुत्व' का नया नैरेटिव
2021 के मुकाबले इस बार बंगाल के चुनावों में धार्मिक ध्रुवीकरण स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. बीजेपी का 'जय श्री राम' का नारा और आक्रामक कैंपेनिंग का असर हिंदू मतदाताओं पर पड़ता दिख रहा है. दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी (TMC) ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया है. अब टीएमसी की रैलियों में 'जॉय बांग्ला' के साथ-साथ 'वंदे मातरम' के नारे भी गूंज रहे हैं. ममता बनर्जी ने खुद को 'प्रो-हिंदू' प्रोजेक्ट करने के लिए दीघा में जगन्नाथ मंदिर समेत कई मंदिरों का निर्माण कराया है.
महिला मतदाता: चुनाव की असली 'एक्स-फैक्टर'
विश्लेषण के अनुसार, इस चुनाव का अंतिम परिणाम महिला मतदाताओं के हाथ में है. हालांकि मुस्लिम मतदाता ममता बनर्जी के साथ लामबंद नजर आ रहे हैं, लेकिन महिला वोटों का बड़ा हिस्सा किसके पाले में जाएगा, यही तय करेगा कि ममता बनर्जी सत्ता में सुरक्षित वापसी करेंगी या नहीं. प्रीति चौधरी का मानना है कि फिलहाल महिला वोटों का एक बड़ा हिस्सा अब भी ममता बनर्जी के साथ टिका हुआ है.
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