Shesh Bharat: पार्टी से बगावत, फिर वापसी... कौन हैं फातिमा ताहिलिया, जो केरल में मुस्लिम लीग से बनीं पहली महिला विधायक

Fatima Tahilia Biography: केरल की राजनीति में 75 साल बाद बड़ा बदलाव आया है. मुस्लिम लीग की फातिमा ताहिलिया ने सीपीएम के गढ़ पेराम्बरा में जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है. छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर अब विधानसभा तक पहुंच गया है जिसने पार्टी की रूढ़ियों को भी तोड़ दिया है.

मुस्लिम लीग पहली महिला विधायक बनीं फातिमा ताहिलिया
मुस्लिम लीग पहली महिला विधायक बनीं फातिमा ताहिलिया

राजू झा

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Kerala Election Results 2026: केरल की सियासत में चेहरे तो अक्सर बदलते हैं लेकिन इस बार एक चेहरे ने पूरा इतिहास ही बदल दिया है. 75 साल पुराने मुस्लिम लीग के इतिहास में पहली बार कोई महिला विधायक बनकर विधानसभा पहुंची है. नाम है फातिमा ताहिलिया. फातिमा ने न सिर्फ लेफ्ट के उस किले को ढहाया जिसे अभेद माना जाता था बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर महिलाओं के हक की मशाल भी जलाई. मुस्लिम लीग ने ऐतिहासिक रूप से हमेशा महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारने में संकोच किया है लेकिन फातिमा की यह जीत राज्य की राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव लेकर आई है.

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कौन हैं फातिमा ताहिलिया?

34 साल की फातिमा ताहिलिया पेशे से वकील हैं और उन्होंने कालीकट विश्वविद्यालय से एलएलएम की डिग्री हासिल की है. फातिमा का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था. वह मुस्लिम लीग के छात्र विंग एमएसएफ की महिला इकाई हरिता की संस्थापक अध्यक्ष रहीं और एमएसएफ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर भी रहीं. उनके लिए राजनीति सिर्फ कुर्सी हासिल करना नहीं बल्कि महिलाओं की आवाज बुलंद करने का एक मंच रही है.

पार्टी के भीतर विद्रोह और न्याय की लंबी लड़ाई

फातिमा का सफर सिर्फ विरोधियों से लड़ने का नहीं बल्कि अपनी ही पार्टी की रूढ़ियों के खिलाफ भी रहा है. साल 2021 में जब हरिता की महिला नेताओं ने पुरुष नेताओं पर यौन उत्पीड़न और अभद्र भाषा के आरोप लगाए थे तब फातिमा उनके साथ मजबूती से खड़ी हुई थीं. उन्होंने तब पार्टी नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा था कि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला. इसके बाद उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया था. हालांकि 2024 में उनकी वापसी हुई और उन्हें मुस्लिम यूथ लीग की राज्य समिति में शामिल किया गया जो इस बात का सबूत था कि पार्टी ने उनकी नेतृत्व क्षमता को स्वीकार कर लिया है.

पेराम्बरा सीट पर सीपीएम के अभेद किले को कैसे ढहाया

2026 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम लीग ने फातिमा पर भरोसा जताया और उन्हें कोजीकोट की पेराम्बरा सीट से उम्मीदवार बनाया. यह सीट 1980 से सीपीएम का गढ़ मानी जाती थी. फातिमा ने यहां सबको चौंकाते हुए 81,000 से ज्यादा वोट हासिल किए और सीपीएम के मौजूदा विधायक टीपी रामकृष्णन को 587 वोटों के अंतर से हरा दिया. यह जीत सिर्फ चुनावी जीत नहीं है बल्कि मुस्लिम लीग जैसी पारंपरिक पार्टी में महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत है.

राहुल गांधी का समर्थन और समर्थकों का क्रांतिकारी जोश

खास बात यह रही कि फातिमा कांग्रेस की उम्मीदवार नहीं थीं फिर भी राहुल गांधी ने खुद उनके लिए पेराम्बरा जाकर प्रचार किया था. जब पेराम्बरा की सड़कों पर फातिमा का काफिला निकला तो समर्थकों का जोश देखने लायक था. उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया से लेकर बूथ स्तर तक विरोधियों के हमलों का जवाब दिया और अपनी नेता के लिए ढाल बनकर खड़े रहे. आज यह जीत उन तमाम आवाजों की जीत मानी जा रही है जिन्हें दबाने की कोशिश की गई थी.

मुस्लिम लीग का ऐतिहासिक प्रदर्शन और किंग मेकर की भूमिका

फातिमा के साथ-साथ उनकी पार्टी आईयूएमएल ने भी इस चुनाव में कमाल कर दिखाया है. यूडीएफ गठबंधन में रहते हुए पार्टी ने किंग मेकर की भूमिका निभाई. कांग्रेस के साथ मजबूत तालमेल की बदौलत मुस्लिम लीग ने अपनी 27 में से 22 सीटों पर जीत दर्ज की. पार्टी के इस शानदार प्रदर्शन ने यूडीएफ को 140 सीटों वाली विधानसभा में 102 सीटों के आंकड़े तक पहुंचा दिया जिससे यूडीएफ सरकार बनाने में सफल रही. पार्टी का वोट शेयर भी 2021 के 8 प्रतिशत से बढ़कर इस बार 11 प्रतिशत के पार चला गया.

सादिक अली थंगल का क्रांतिकारी फैसला और बदलती छवि

पार्टी के इस बदलाव और ऐतिहासिक जीत के पीछे केरल प्रदेश अध्यक्ष सैयद सादिक अली शहाब थंगल की बड़ी भूमिका रही है. उन्होंने 75 साल के इतिहास में पहली बार फातिमा ताहिलिया और जयंती राजन के रूप में दो महिलाओं को मैदान में उतारा. सादिक अली थंगल ने पार्टी की पारंपरिक छवि को बदलकर उसमें नई ऊर्जा भरी है. उन्होंने फातिमा जैसी उस महिला पर दांव लगाया जिसने कभी पार्टी के भीतर बगावत की थी और जो हिजाब पहनकर चुनाव जीतने पर अड़ी थी.

राहुल गांधी का आईयूएमएल को सेकुलर बताना और गठबंधन का भरोसा

चुनाव के दौरान बीजेपी ने मुस्लिम लीग के खिलाफ यह कहकर कैंपेन चलाया था कि इसी पार्टी ने भारत का विभाजन कराया था जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का जिन्ना वाली लीग से कोई लेना-देना नहीं है. इस विवाद के बीच राहुल गांधी ने अमेरिका में एक इंटरव्यू के दौरान आईयूएमएल को पूरी तरह सेकुलर पार्टी बताया था. राहुल गांधी के इस बयान ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के गठबंधन को और मजबूत बना दिया. अब सादिक अली थंगल और राहुल गांधी की यह दोस्ती भरोसे के साथ आगे बढ़ रही है और केरल में यूडीएफ की सरकार बनने जा रही है.

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