2021 के चुनावों में ममता बनर्जी की भविष्यवाणी हो गई थी. हवा का रुख देखकर कई बड़े नेता TMC छोड़कर जा रहे थे, तब ममता बनर्जी ने टॉलीवुड के यंग और स्टार फेसेस पर दांव लगाया. ममता बनर्जी ने सायंतिका बनर्जी की खोज उसी दौर में हुई. सायंतिका बनर्जी ने बांग्ला टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में तेजी से पापुलरिलिटी हासिल की थी. सायंतिका को ममता ने खुद पार्टी जॉइन कराई. माना गया कि सायंतिका की केवल पॉलिटिकल एंट्री नहीं हुई बल्कि ममता ने अपने किसी खास मिशन के लिए चुना है. पार्टी में लाते ही बांकुड़ा जैसी कठिन सीट से चुनाव में उतार दिया. तब इनकी हार हुई. 2024 में बरानगर सीट पर उपचुनाव हुए. तब ममता ने सायंतिका पर फिर भरोसा दिखाया और इस बार इन्होंने जीतकर भरोसो को कायम रखा. इस बार फिर ममता बनर्जी ने सायंतिका को बरानगर (Baranagar) सीट से मैदान में उतारा है.
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आज सायंतिका सिर्फ एक्ट्रेस नहीं, बल्कि ममता बनर्जी की राजनीतिक सिपहसालार के रोल में हैं. जितनी मजबूती से ममता दीदी को डिफेंड करती हैं उतनी अग्रेसिव होकर बीजेपी पर अटैक करती है. बीजेपी की मजबूरी हो जाती है कि बंगाल की एक यंग महिला और पापुलर फेस पर सीधे अटैक न करे. ममता से चार कदम आगे डेयरिंग सायंतिका बनर्जी रैलियों में कहती हैं कि बंगाल के लिए बीजेपी अशुभ है. नाम लेने से ही अशुभ हो जाएगा. ममता बनर्जी के उस भाषण का खूब जिक्र करती हैं कि अमित शाह एक्टिंग प्राइम मिनिस्टर हैं जो पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे हैं और पीएम मोदी को उनसे सतर्क रहना चाहिए.
वायरल सेंसेशन बन चुकी हैं सायंतिका बनर्जी
सायंतिका बनर्जी ममता बनर्जी की उसी रणनीति का जोरदार चेहरा हैं जिन्होंने बीजेपी पर ममता बनर्जी की एक और बंपर जीत के लिए अपनी ग्लैमरस दुनिया को साइड रखकर चुनाव में धूल फांकने वाली राजनीतिक कर रही हैं. बंगाल चुनाव में जितना बज ममता, अभिषेक बनर्जी, सयानी घोष ने क्रिएट किया उतना ही सायंतिका बनर्जी भी कर रही हैं. महिलाओं और यंगस्टर्स के बीच इतनी पॉपुलर की कि देखते ही सेल्फी की होड़ लग जाती है. वो टॉलीवुड की 'स्क्रीन क्वीन' है... वो बांकुड़ा की वो योद्धा है जो हारकर भी नहीं रुकी... और आज वो ममता बनर्जी का वो 'ब्रह्मास्त्र' है जिसने बीजेपी के गढ़ में खलबली मचा दी है! कौन है सायंतिका बनर्जी, जो 2026 के बंगाल चुनाव की सबसे बड़ी वायरल सेंसेशन बन चुकी है?"
बंगाल में डबल रोल में हैं सायंतिका बनर्जी
बंगाल चुनाव में सायंतिका बनर्जी डबल रोल में हैं. ममता बनर्जी ने उन्हें उत्तर 24 परगना जिले की बारानगर से टिकट दिया है.
उनका मुकाबला बीजेपी के सजल घोष से है. टिकट के साथ ममता दीदी ने यंग सायंतिका पर ये जिम्मेदारी भी डाली कि वो पार्टी के बाकी उम्मीदवारों की जीत भी पक्की करें. 2021 में पहली हार, 2024 में पहली जीत के बाद 2026 में फिर से चुनाव में उतरने का हौसला दिखाकर सायंतिका ने सबूत दिया कि वो केवल सीजनल सेलिब्रिटी नहीं पॉलिटिक्स को सिर्फ टेस्ट करने आई हैं. ममता ने उनके लिए रोड शो करके साफ इशारा कर दिया कि सायंतिका की जीत पर उनका क्या स्टेक पर लगा है.
सायंतिका बनर्जी का जन्म 12 अगस्त 1986 को कोलकाता के एक संभ्रांत बंगाली परिवार में हुआ. उनके पिता गुरुप्रसाद बनर्जी हैं, और उनके परिवार का फिल्मी दुनिया से पहले कोई सीधा नाता नहीं रहा. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता के सेंट जॉन्स डायोसेसन गर्ल्स हाई स्कूल से की. फिर सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से ग्रेजुएशन की डिग्री ली. पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि डांस और फिटनेस की ओर बढ़ी, जिसने उनके लिए ग्लैमर जगत के दरवाजे खोल दिए.
सायंतिका बनर्जी का ममता बनर्जी की नजर में आना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि टॉलीवुड के सितारों को बंगाल की पॉलिटिक्स का फेस बनाने की ममता की कैलकुलेटेड स्ट्रैटजी का हिस्सा था.
शुरूआत छोटे पर्दे पर नाच धूम मचा ले से हुई
सायंतिका बनर्जी का ग्लैमर की दुनिया में सफर किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है. उनकी शुरुआत बड़े पर्दे से नहीं, बल्कि छोटे पर्दे के एक रियलिटी शो 'नाच धूम मचा ले' (Naach Doom Macha Ley) से हुई थी. अपनी बेहतरीन डांसिंग स्किल्स और स्क्रीन प्रेजेंस के कारण वे रातों-रात बांग्ला ऑडियंस की फेवरेट बन गईं. शो ने उनके लिए टॉलीवुड के दरवाजे खोल दिए.
2009 में फिल्म 'घोर संसर' से उन्होंने फिल्मों में डेब्यू किया. असली पहचान 2012 में मिली, जब वो बांग्ला फिल्मों के सुपरस्टार जीत के अपोजिट ब्लॉकबस्टर फिल्म आवारा में नजर आईं. फिल्म की सुपरहिट सक्सेस ने उन्हें बंगाल की 'ए-लिस्ट एक्ट्रेस में शामिल कर दिया. आगे टारगेट', 'बिंदास', 'अभिमान' और 'पाखी' जैसी कई हिट फिल्में देती रहीं. फिल्मों में उनकी फिटनेस और स्टाइल स्टेटमेंट ने बांग्ला यूथ पर खूब असर डाला. आगे चलकर वही उनकी पॉलिटिक्स का USP बना.
पार्टी जॉइन करते समय बोलीं- मैं 10 सालों से दीदी के साथ थी
सायंतिका ने 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस जॉइन की थी. कहा था कि वो तो 10 साल से दीदी के साथ थीं, लेकिन पार्टी के चुनावी संघर्ष को और मज़बूत करने के लिए पार्टी जॉइन की. भारी नेम-फेम और तृणमूल-ममता की लहर के बाद भी सायंतिका के लिए पॉलिटिकल डेब्यू डिजास्टर साबित हुआ. 2021 में बांकुड़ा से पहला विधानसभा चुनाव हार गईं लेकिन हार ने कलेजा और मजबूत किया कि पॉलिटिक्स में टिके रहना है.
फाइटिंग स्पिरिट देख दीदी ने राज्य महासचिव बना दिया
2021 के विधानसभा चुनाव में बांकुड़ा सीट से हारने के बावजूद वे वहां सक्रिय रहीं. उन्होंने हार को अपने करियर का अंत नहीं माना, बल्कि बांकुड़ा के लोगों के बीच रहकर काम किया. उनकी इसी 'फाइटिंग स्पिरिट' और वफादारी के कारण ममता बनर्जी ने अपनी कोर टीम में लेकर पार्टी में राज्य महासचिव का बड़ा पद दे दिया.
शपथ से पहले राज्यपाल से ही ठन गई
राजनीति में आने के बाद सायंतिका को जैसे ही विधानसभा के अंदर बैठने का टिकट मिला उन्होंने सीधे राज्यपाल से टकराव मोल लिया. विधानसभा सत्र नहीं चल रहा था. उपचुनाव जीतने के बाद विधायक की शपथ लेनी थी राज्यपाल से. राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने शपथ के लिए राजभवन बुलाया, लेकिन सायंतिका अड़ गईं कि नवनिर्वाचित विधायक होने के नाते वो जनता के सदन यानी विधानसभा में ही शपथ लेंगी. ममता से लड़ाई के बीच राज्यपाल ने भी ईगो पर ले लिया कि ममता की पार्टी की नई-नई लड़की ललकार रही है. वो जिद पर अड़े तो सायंतिका ने विधानसभा के बाहर जंग छेड़ दी.
राज्यपाल सीवी आनंद बोस को झुकाने के लिए सायंतिका बनर्जी और एक और नवनिर्वाचित विधायक रेयात हुसैन सरकार ने विधानसभा की सीढ़ियों पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर की मूर्ति के सामने 7 दिनों तक धरना दिया. 7 दिन का सत्याग्रह सफल हुआ. राज्यपाल तब भी झुकने को तैयार नहीं हुए. कहा डिप्टी स्पीकर शपथ दिलाएं. डिप्टी स्पीकर ने साफ मना कर दिया कि स्पीकर के रहते ऐसा नहीं करेंगे. विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी ने शपथ दिलाकर विधायक बनाया. सीवी आनंद बोस कहते रह गए कि संवैधानिक उल्लंघन, लेकिन सायंतिका विधानसभा में आकर डट गईं.
बंगाल की क्रश आज तक सिंगल हैं
सायंतिका बनर्जी की उम्र करीब 39 साल है. बंगाल की क्रश हैं, लेकिन आजतक सिंगल है. टॉलीवुड में लिंक-अप्स की खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं. सायंतिका का एक्टर जॉय मुखर्जी के साथ लगभग 9 साल लंबा रिश्ता था, जिसका अंत काफी विवादित और दर्दनाक रहा. 2018 में उन्होंने जॉय पर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. कहा जाता है कि उस रिलेशनशिप ने उन्हें इमोशनली तोड़ने का काम किया. किसी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि हर रिश्ता सम्मान का हकदार होता है, लेकिन कुछ अनुभवों ने जीवन के प्रति मेरा नजरिया बदल दिया. हालांकि वो कह चुकी हैं कि शादी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब भी उनके जीवन में ऐसा कोई मौका आएगा, वे खुद सबको खुशी-खुशी जानकारी देंगी.
शादी पर सायंतिका के तर्क
सायंतिका बनर्जी ने अपनी शादी न करने की वजहों पर कई बार खुलकर बात की, लेकिन हमेशा अलग-अलग कारण बताए. कभी कहा उनके लिए Independence तो कभी कहा करियर प्रायोरिटी है. मार्च 2024 में शादी की अफवाहों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा था कि कोलकाता और बांकुड़ा के बीच इतनी बिजी रही कि उनके पास 'लड़का ढूंढने का समय' ही नहीं मिला. सायंतिका फिटनेस फ्रीक मानी जाती हैं. उनके जिम वर्कआउट के वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं जो यंग जेनरेशन को अट्रैक्ट करते हैं.
एक्ट्रेसेस का दांव ममता बनर्जी के लिए 2011 से काम कर रहा है, लेकिन इस बार उन्होंने सबको चौंकाते हुए ग्लैमर से तौबा करते हुए ग्लैमर से ज्यादा ग्राउंड वर्क पर फोकस किया. ममता बनर्जी ने करीब 74 विधायकों के टिकट काटे दिए जिसमें कई सेलिब्रिटी चेहरे शामिल हैं. 52 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया जिनमें राजनीति और ग्लैमर दोनों साइड की महिलाएं शामिल हैं, लेकिन मुख्य जोर 'जिताऊ यानी Winnability पर रखा, लेकिन स्टार पावर को छोड़ा भी नहीं. ममता के चुनाव में स्टार पावर चप्पे-चप्पे पर कैंपेन संभाले हुए है. कोयल मलिक को टिकट नहीं मिला लेकिन उन्होंने पार्टी को जिताने में पूरी ताकत झोंक दी है.
लोग मानते हैं ममता बनर्जी अक्सर उन सीटों पर एक्ट्रेसेस को उतार देती हैं जहां पार्टी का मामला कमजोर दिखता है. नए और पॉपुलर फेस जनता की नाराजगी को कम करने में टॉनिक का काम करते हैं. दूसरी लंबी दूरी की कौड़ी ये है कि बाहुबली के मुकाबले नए, यंग सेलिब्रिटीज फेसेस ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी के लिए गुटबाजी दूर से वफादार और काबू में होते हैं.ममता बनर्जी ने सायंतिका बनर्जी, मिमी चक्रवर्ती और नुसरत जहां जैसी अभिनेत्रियों को मैदान में उतारकर राजनीति की ट्रेडिशनल पॉलिटिक्स बदल दी. स्टार प्रजेंस सेचुनावी रैलियों में भारी भीड़ आसानी से जुट जाती है. ट्रे़डिशनल पॉलिटिक्स में उतनी भीड़ और चर्चा जुटा पाना असंभव सा लगता है.
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