नाना पाटेकर की आखिरी रात की पूरी कहानी, घर से अस्पताल तक क्या-क्या हुआ? डॉक्टर ने बताई पूरी बात

न्यूज तक डेस्क

08 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 8 2026 3:59 PM)

नाना पाटेकर की रात में तबीयत बिगड़ी थी. उन्हें सीने में तेज दर्द, ज्यादा पसीना और सांस लेने में परेशानी हुई. डॉक्टर के मुताबिक, उन्हें गंभीर हार्ट अटैक के बाद कार्डियक अरेस्ट हुआ. अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी.

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बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया. गोवा स्थित उनके घर पर रात में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी. इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी.

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नाना पाटेकर का इलाज करने वाले गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने उनके आखिरी पलों से जुड़ी पूरी जानकारी दी है.

रात में ही बिगड़ने लगी थी तबीयत

डॉ. शेखर के मुताबिक, रात करीब 1:30 से 2:30 बजे के बीच नाना पाटेकर की तबीयत खराब होने लगी थी. उन्हें बहुत ज्यादा पसीना आ रहा था. सीने में तेज दर्द था. यह दर्द बाएं हाथ तक जा रहा था. उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी. डॉक्टर के मुताबिक, ये हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं. आशंका है कि नाना को घर पर ही हार्ट अटैक आया था. इसके बाद उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और उनकी मौत हो गई. हालांकि, मौत की सही वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी.

घर पहुंचने से पहले ही जा चुकी थी जान

डॉ. शेखर ने बताया कि मेडिकल टीम को नाना के घर से करीब 4:18 से 4:20 बजे के बीच सूचना मिली थी. जब टीम वहां पहुंची तो नाना जमीन पर बेहोश पड़े थे. उनके शरीर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल रही थी. इसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया. डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी. अनुमान है कि नाना की मौत करीब 3:30 बजे ही हो गई थी.

45 मिनट तक दिया गया CPR

अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की. करीब 45 मिनट तक CPR दिया गया. इसके बावजूद उनकी धड़कन वापस नहीं आ सकी.इसके बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. डॉ. शेखर ने बताया कि भले ही नाना की मौत पहले हो चुकी थी, लेकिन इमरजेंसी में आने वाले ऐसे मरीजों को मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत करीब 45 मिनट तक CPR दिया जाता है. इसका मकसद मरीज को बचाने की हर संभव कोशिश करना होता है.

समय पर मदद मिलती तो बच सकती थी जान?

डॉ. शेखर के मुताबिक, अगर कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद CPR शुरू हो जाए और मरीज को जल्द मेडिकल मदद मिल जाए, तो उसके बचने की संभावना बेहतर हो सकती है. नाना के मामले में जब उनकी तबीयत खराब हुई थी, तब उन्होंने अपने दोस्त को भी इसकी जानकारी दी थी. डॉक्टर का कहना है कि अगर उसी समय CPR मिल जाता या उन्हें जल्दी अस्पताल ले जाया जाता तो जान बचने की संभावना हो सकती थी. लेकिन अस्पताल पहुंचने में देरी हो गई.

हार्ट अटैक से कैसे होता है कार्डियक अरेस्ट?

डॉ. शेखर ने बताया कि हार्ट अटैक नसों में ब्लॉकेज के कारण होता है. कई बार गंभीर हार्ट अटैक के कारण दिल की धड़कन का इलेक्ट्रिकल रिदम बिगड़ जाता है. इससे कार्डियक अरेस्ट हो सकता है. हालांकि हर हार्ट अटैक में कार्डियक अरेस्ट हो, यह जरूरी नहीं है. कार्डियक अरेस्ट के दूसरे कारण भी हो सकते हैं. नाना पाटेकर के मामले में डॉक्टर ने गंभीर हार्ट अटैक के बाद कार्डियक अरेस्ट होने की आशंका बताई है.

फिट दिखना हार्ट अटैक से सुरक्षा नहीं देता

नाना पाटेकर को फिट और एक्टिव देखा जाता था. ऐसे में सवाल उठता है कि उन्हें हार्ट अटैक कैसे आया. डॉ. शेखर के मुताबिक, किसी व्यक्ति का बाहर से फिट दिखना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसका दिल पूरी तरह स्वस्थ है. नाना 75 साल के थे. उनकी स्मोकिंग की हिस्ट्री भी रही थी. उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई ऐसी बीमारियां हो सकती हैं, जिनका लंबे समय तक पता नहीं चलता. दिल की बीमारी भी कई बार बिना साफ लक्षणों के रह सकती है. इसलिए फिट दिखने वाला व्यक्ति भी हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो सकता है.

हार्ट अटैक में पहला घंटा बेहद अहम

डॉ. शेखर ने बताया कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है. अगर किसी व्यक्ति को अचानक तेज सीने में दर्द हो, सीने पर दबाव महसूस हो, सांस लेने में परेशानी हो, ठंडा पसीना आए या वह बेहोश हो जाए, तो इंतजार नहीं करना चाहिए. अगर व्यक्ति बेहोश है और सामान्य तरीके से सांस नहीं ले रहा है, तो तुरंत इमरजेंसी मदद बुलानी चाहिए और CPR शुरू करना चाहिए. डॉक्टर के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी कई बार जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन जाती है.

लोगों को CPR देना सीखना चाहिए

डॉ. शेखर ने कहा कि आम लोगों को CPR की जानकारी होना जरूरी है. किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट होने पर शुरुआती मदद काफी अहम हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि इमरजेंसी की स्थिति में परिवार के किसी सदस्य या दोस्त को तुरंत फोन करना चाहिए. इससे अपनी स्थिति की सही जानकारी दी जा सकती है.