Riteish Deshmukh and Genelia Dsouza love story: किसी से प्यार करना आसान है, लेकिन प्यार जताना मुश्किल. इश्क, प्यार, मोहब्बत-बड़ा ही प्राइवेट और पर्सनल मामला होता है जिसे सबके सामने स्वीकार करने के लिए कलेजा चाहिए होता है. ऐसा कलेजा तब आता है जब प्यार के दोनों पंछी एक-दूसरे के लिए समर्पित हों और यकीन की अटूट डोर से बंधे हों. राजा शिवाजी की शपथ लेकर रितेश ने जब अपनी दास्तां सुनाई तो जेनेलिया भी रो पड़ीं. यह कहानी सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल है, जिसने रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा की 20 साल पुरानी लव स्टोरी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.
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रितेश और जेनेलिया केवल मनोरंजन जगत के बड़े सितारे नहीं हैं, बल्कि रितेश का एक गहरा राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव भी है. उनकी चर्चा तब भी होती है जब छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान की बात आती है या जब उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के खिलाफ कोई टिप्पणी की जाती है. रितेश अक्सर अपने पिता और पत्नी के लिए अपने इमोशंस को सार्वजनिक मंचों पर साझा करने से पीछे नहीं हटते.
10 साल का सपना और जेनेलिया का साथ
छत्रपति शिवाजी महाराज के भक्त रितेश का करीब 10 साल से एक सपना अधूरा था कि महाराज के जीवन पर एक भव्य फिल्म बनाना. जेनेलिया ने बतौर प्रोड्यूसर रितेश के विजन को पंख दिए और अब यह सपना पूरा हुआ है. राजा शिवाजी फिल्म 1 मई को रिलीज के लिए तैयार है. एक प्रमोशनल इवेंट में रितेश भावुक हो गए और कहा कि जब दुनिया को उन पर शक था तब जेनेलिया उनके साथ खड़ी थीं. उनके लिए यह फिल्म सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, एक बड़ी जिम्मेदारी और सम्मान की बात है.
ईगो से शुरू हुई प्रेम कहानी
एक दिग्गज कांग्रेस नेता के बेटे और एक ईसाई परिवार की चुलबुली लड़की की ये कहानी ईगो से शुरू हुई थी. साल 2002 में हैदराबाद एयरपोर्ट पर अपनी पहली फिल्म तुझे मेरी कसम के टेस्ट के दौरान दोनों मिले थे. शुरुआत में जेनेलिया को लगा कि रितेश मुख्यमंत्री के बेटे हैं तो घमंडी होंगे, इसलिए उन्होंने उन्हें नजरअंदाज किया. लेकिन रितेश की सादगी ने धीरे-धीरे उनका दिल जीत लिया. शूटिंग खत्म होते-होते दोनों को एहसास हो गया कि वे एक-दूसरे के लिए ही बने हैं.
मराठी परिवार, कैथोलिक धर्म और 10 साल का इंतजार
रितेश एक प्रभावशाली राजनीतिक मराठी हिंदू परिवार से थे. वहीं जेनेलिया मैंगलोरियन कैथोलिक ईसाई परिवार से हैं. शुरुआत में विलासराव देशमुख इस शादी के पक्ष में नहीं थे. इसी कारण इस जोड़े ने करीब 10 साल तक अपने रिश्ते को दुनिया से छुपाए रखा. बिना किसी विवाद या गॉसिप के दोनों ने धैर्य के साथ अपने करियर पर ध्यान दिया. इसके बाइ 2012 में पिता की सहमति मिलने के बाद उन्होंने चर्च और महाराष्ट्रीयन रीति-रिवाजों से दो बार शादी की.
राजनीति दूरी लेकिन कई मुद्दों पर बेबाक राय
विलासराव देशमुख के निधन के बाद रितेश के पास राजनीति में आने का मौका था, लेकिन उन्होंने यह राह अपने भाइयों अमित और धीरज देशमुख के लिए छोड़ दी. हालांकि, वे लातूर में कांग्रेस के लिए प्रचार जरूर करते हैं. रितेश राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखते हैं. जब अगस्त 2024 में शिवाजी महाराज की मूर्ति गिरी तो उन्होंने 'राजे माफ करा' कहकर अपना दुख व्यक्त किया. उन्होंने बीजेपी की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा था कि जो लोग धर्म की बात करते हैं असल में उनकी पार्टी खतरे में होती है.
एडल्ट कॉमेडी से ऐतिहासिक नायक तक का सफर
रितेश के करियर का एक बड़ा हिस्सा मस्ती, क्या कूल हैं हम और ग्रैंड मस्ती जैसी एडल्ट कॉमेडी फिल्मों से जुड़ा रहा. इन फिल्मों ने उन्हें कॉमेडी किंग का टैग दिलाया. लेकिन उन्होंने अपनी इस इमेज को तोड़ने का साहस दिखाया. एक विलेन में साइको विलेन की भूमिका और फिर वेड जैसी सफल फिल्म का निर्देशन उनके ट्रांसफॉर्मेशन की मिसाल है. आज वही एडल्ट कॉमेडी का स्टार अपने आराध्य छत्रपति शिवाजी महाराज का किरदार पर्दे पर निभाने जा रहा है.
स्थिरता और सहयोग की मिसाल है जोड़ी
रितेश और जेनेलिया की कहानी सिखाती है कि प्यार में चमक-धमक से ज्यादा स्थिरता और सहयोग जरूरी है. वे सिर्फ पति-पत्नी नहीं, बल्कि बेहतरीन दोस्त और पार्टनर हैं. यही वजह है कि आज भी उनकी जोड़ी को देखकर लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.
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