Gold Silver Outlook: सोने-चांदी में फिर आएगी बड़ी गिरावट? अगले हफ्ते और गिरेंगे दाम या बनेगा नया रिकॉर्ड?

तनीषा त्यागी

• 02:24 PM • 18 Oct 2026

सोने और चांदी की कीमतों में बीते सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अब सवाल है कि क्या अगले हफ्ते दोनों धातुएं और सस्ती होंगी? बाजार के एक अनुमान में सोना 1.43 लाख रुपये और चांदी 2 लाख रुपये से नीचे जाने की संभावना जताई गई है. वहीं, लंबी अवधि में सोने को लेकर उम्मीदें बरकरार हैं.

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Gold Silver Outlook: सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने खरीदारों और निवेशकों, दोनों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या आने वाले दिनों में इन कीमती धातुओं के दाम और नीचे जा सकते हैं, या मौजूदा गिरावट के बाद एक बार फिर तेजी लौटने की तैयारी है? बाजार के जानकारों के अनुमान और लंबी अवधि के संकेतों को समझना इसलिए जरूरी है, ताकि खरीदारी या निवेश का फैसला जल्दबाजी में न लिया जाए.

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सोने-चांदी की कीमतों में कितनी आई गिरावट?

बीते सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 9 अक्टूबर 2026 को सोने का भाव 1,49,430 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 16 अक्टूबर 2026 को घटकर 1,46,426 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया. यानी एक सप्ताह में सोना करीब 3,004 रुपये सस्ता हुआ. चांदी की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली. 9 अक्टूबर को चांदी का भाव 2,21,109 रुपये प्रति किलोग्राम था. 16 अक्टूबर तक यह गिरकर 2,10,918 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इस तरह एक सप्ताह में चांदी की कीमत में करीब 10,191 रुपये की गिरावट दर्ज की गई. कीमतों में इस गिरावट से उन लोगों की दिलचस्पी बढ़ सकती है, जो गहने खरीदने या सोने-चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं. हालांकि, केवल कीमतों में गिरावट देखकर खरीदारी का फैसला करना सही रणनीति नहीं हो सकती. आगे कीमतों का रुख किन परिस्थितियों से प्रभावित होगा, इस पर भी ध्यान देना जरूरी है.

अगले हफ्ते सोने-चांदी के भाव पर क्यों रह सकता है दबाव?

Intellisis Ventures के फाउंडर अमित सुरेश जैन के अनुमान के मुताबिक, अगले सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. इसके पीछे अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव जैसे कारकों को अहम माना जा रहा है. अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं. ऐसे घटनाक्रमों के बीच बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिसका असर निवेशकों के फैसलों पर पड़ सकता है. इसके अलावा, मिडिल ईस्ट की स्थिति भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है. अमित सुरेश जैन के अनुमान के अनुसार, सोने की कीमत घटकर 1.43 लाख रुपये तक आ सकती है. वहीं, चांदी का भाव 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे जाने की संभावना भी जताई गई है. हालांकि, ये बाजार के मौजूदा हालात के आधार पर लगाए गए अनुमान हैं, कीमतों की गारंटी नहीं. वास्तविक भाव कई कारकों के बदलने के साथ अलग दिशा में भी जा सकते हैं.

लंबी अवधि में सोने की कीमतों को लेकर क्यों है उम्मीद?

जहां निकट भविष्य में सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव की आशंका जताई जा रही है, वहीं लंबी अवधि को लेकर तस्वीर कुछ अलग हो सकती है. कुछ जानकारों का मानना है कि आने वाले 12 से 24 महीनों में सोना नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है. इस उम्मीद के पीछे कई वजहें हैं. दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ता सरकारी कर्ज, आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक सोने की मांग को समर्थन दे सकते हैं. इसके अलावा, दुनिया के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी भी इस कीमती धातु के लिए अहम मानी जा रही है.

जब आर्थिक हालात को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो कुछ निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार करते हैं. ऐसे में सोने की मांग को सहारा मिल सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कीमतें लगातार ऊपर ही जाएंगी. लंबी अवधि में तेजी की संभावना के बावजूद बीच-बीच में गिरावट भी देखने को मिल सकती है.

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी क्यों है अहम?

सोने की कीमतों को समझने के लिए केंद्रीय बैंकों की गतिविधियों पर भी नजर रखना जरूरी है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सितंबर में केंद्रीय बैंकों ने करीब 63 टन सोना खरीदा. चीन के केंद्रीय बैंक के पास लगभग 2,410 टन सोने का भंडार बताया गया है. केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी को बाजार में इसकी मांग के लिहाज से अहम माना जाता है. अगर केंद्रीय बैंकों की खरीदारी मजबूत बनी रहती है, तो यह लंबी अवधि में सोने की कीमतों को समर्थन देने वाला कारक हो सकता है. हालांकि, भविष्य में कीमतों की दिशा केवल खरीदारी के आंकड़ों से तय नहीं होगी. वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों के व्यवहार का भी असर पड़ेगा.

सोने की कीमत के लिए 4,000 डॉलर का स्तर कितना अहम?

सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के लिहाज से 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर भी चर्चा में है. इस स्तर को संभावित समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है. इसका मतलब है कि बाजार के कुछ अनुमानों में इस कीमत के आसपास सोने को सहारा मिलने की उम्मीद है. लेकिन किसी भी स्तर को पक्की सीमा नहीं माना जा सकता. अगर बाजार की परिस्थितियां बदलती हैं, तो कीमतें इसके नीचे भी जा सकती हैं. इसी तरह, मांग मजबूत होने और अनिश्चितता बढ़ने पर कीमतों में सुधार भी आ सकता है. इसलिए निवेशकों को केवल एक कीमत या स्तर के आधार पर फैसला लेने के बजाय बाजार की दिशा और उससे जुड़े कारकों को समझना चाहिए.

डॉलर और ब्याज दरें भी तय करेंगी सोने की चाल

सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों का असर भी पड़ता है. डॉलर में मजबूती आने पर सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बन सकता है. वहीं, ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है. इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ी अनिश्चितता भी सोने की मांग को प्रभावित कर सकती है. यही वजह है कि सोने की कीमतों का अनुमान लगाते समय किसी एक संकेत पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. चांदी के मामले में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना जरूरी है. हालिया गिरावट के बाद इसमें आगे कितनी कमजोरी या रिकवरी होगी, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए या इंतजार करना बेहतर है?

अगर आप शादी, त्योहार या किसी दूसरे मौके के लिए सोना-चांदी खरीदना चाहते हैं, तो पहले अपनी जरूरत और बजट को प्राथमिकता दें. कीमतों में गिरावट के बाद और सस्ता होने की उम्मीद में खरीदारी टालना एक विकल्प हो सकता है, लेकिन यह तय नहीं है कि बाजार आपकी उम्मीद के मुताबिक ही चलेगा. वहीं, निवेश के लिहाज से सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणों में निवेश करने की रणनीति पर विचार किया जा सकता है. इससे पूरी रकम एक ही कीमत पर लगाने का जोखिम कम हो सकता है. हालांकि, यह तरीका भी मुनाफे की गारंटी नहीं देता. सबसे जरूरी बात यह है कि अगले सप्ताह कीमतों में और गिरावट की संभावना और अगले 12 से 24 महीनों में तेजी की उम्मीद, दोनों अलग-अलग समयावधियों से जुड़े अनुमान हैं. इसलिए केवल लंबी अवधि में रिकॉर्ड बनने की संभावना देखकर मौजूदा जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कुल मिलाकर, सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए एक अहम मौका हो सकती है, लेकिन आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे में बाजार के संकेतों, अपनी जरूरत और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर फैसला लेना बेहतर होगा.

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