भारत ने रेलवे के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन तकनीक से यात्री ट्रेनें चलाई जा रही हैं. इससे पहले फ्रांस, जर्मनी, चीन और स्वीडन ही ऐसे देश हैं, जहां हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं.
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जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी ट्रेन
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलेगी. इसी रूट पर इसका संचालन शुरू किया गया है. इस परियोजना के लिए जींद में हाइड्रोजन ईंधन भरने (रिफ्यूलिंग) की विशेष सुविधा भी तैयार की गई है.
जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी है, जिसे तय करने में ट्रेन को फिलहाल करीब 2 घंटे लगेंगे. इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 75 किमी/घंटा की रफ्तार से चलाया जाएगा.
किस समय चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?
रेल मंत्रालय के अनुसार, हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन ट्रेन संख्या 74010 और 74009 के रूप में संचालित होगी. ट्रेन संख्या 74010 सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होकर 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी. वहीं, ट्रेन संख्या 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से चलकर दोपहर 1:00 बजे जींद पहुंचेगी.
यह ट्रेन जींद सिटी, पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांपेगा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खांडराई, गोहाना, राबड़ा, लाठ, मोहाना और बरवासनी समेत कई स्टेशनों पर रुकेगी, जिससे इस रूट के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा.
टेक्नोलॉजी नई, किराया वहीं पुराना
नई तकनीक से लैस होने के बावजूद भारतीय रेलवे ने इस हाइड्रोजन ट्रेन का किराया पहले से चल रही दो पैसेंजर ट्रेनों वाला ही रखा है. रेल मंत्रालय के अनुसार, जींद से सोनीपत के बीच करीब 89 किलोमीटर लंबे रूट पर इस ट्रेन का न्यूनतम किराया 5 रुपये है, जबकि पूरे रूट का अधिकतम किराया 25 रुपये रखा गया है. यानी हाइड्रोजन जैसी अत्याधुनिक तकनीक होने के बावजूद यात्रियों को इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा. पहले जिस किराये में लोग DEMU या MEMU पैसेंजर ट्रेन से सफर करते थे, उसी किराये में अब हाइड्रोजन ट्रेन का सफर भी कर सकेंगे.
कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है. फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली बनती है, जिससे ट्रेन चलती है. इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती. केवल पानी की भाप (Water Vapour) निकलती है, इसलिए इसे प्रदूषण मुक्त परिवहन का बेहतर विकल्प माना जाता है.
ट्रेन की खूबियां देखिए
भारतीय रेलवे की इस नई ट्रेन में कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. इसमें कुल 10 कोच लगाए गए हैं, जिनमें करीब 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं. ट्रेन की डिजाइन स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि शुरुआती दौर में इसे लगभग 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा.
जींद में बनाया गया विशेष हाइड्रोजन प्लांट
इस ट्रेन के संचालन के लिए हरियाणा के जींद में विशेष हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया गया है. यहीं ट्रेन में हाइड्रोजन भरी जाएगी. इस सुविधा को सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया गया है.
सुरक्षा के विशेष इंतजाम
सुरक्षा के लिहाज से भी ट्रेन को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया गया है. इसमें हाइड्रोजन गैस का रिसाव पकड़ने के लिए विशेष सेंसर लगाए गए हैं. आग, धुआं और अधिक तापमान का पता लगाने वाले डिटेक्टर भी हर समय सक्रिय रहेंगे. पूरी ट्रेन की निगरानी रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए की जाएगी. यदि किसी तरह का खतरा महसूस होता है, तो ऑटोमैटिक शटडाउन सिस्टम तुरंत हाइड्रोजन की आपूर्ति बंद कर देगा, जिससे किसी भी दुर्घटना की आशंका काफी कम हो जाएगी.
'मेक इन इंडिया' तकनीक का इस्तेमाल
रेलवे के मुताबिक यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' अभियान का बड़ा उदाहरण है. ट्रेन के निर्माण और तकनीक के विकास में भारतीय रेलवे की विभिन्न इकाइयों और घरेलू कंपनियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
पर्यावरण को होगा बड़ा फायदा
हाइड्रोजन ट्रेन से डीजल की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों में कमी आएगी. सरकार का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल दूसरे रेल मार्गों पर भी किया जाएगा. इससे भारतीय रेलवे को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली विकसित करने में मदद मिलेगी.
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