'पहले गायब किया फिर माइंडवाश कर बदलवा दिया जेंडर', अशोक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों पर लगे गंभीर आरोप, जानें पूरा मामला

Ashoka University Controversy: अशोका यूनिवर्सिटी से जुड़ा बड़ा विवाद सामने आया है, जहां एक छात्रा के गायब होने और उसे ट्रांसजेंडर बनाने के आरोपों ने सनसनी मचा दी है. अब महिला आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए मामले की CBI या NIA जांच की चेतावनी दी है. जानें पूरा मामला, आरोप और जांच की स्थिति.

Ashoka University Controversy
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न्यूज तक डेस्क

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हरियाणा के सोनीपत स्थित प्रतिष्ठित अशोका यूनिवर्सिटी एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाले मामले को लेकर विवादों के घेरे में आ गई है. एक पीड़ित प्रोफेसर दंपति ने यूनिवर्सिटी के ही तीन प्रोफेसरों पर अपनी बेटी को गायब करने और उसका 'माइंड वाश' कर उसे ट्रांसजेंडर बनाने का सनसनीखेज आरोप लगाया है. इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब हरियाणा राज्य महिला आयोग ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मामले की जांच एनआईए (NIA) या सीबीआई (CBI) से कराने की सिफारिश करने की बात कही. विस्तार से जानिए पूरे मामले की कहानी.

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अक्टूबर 2023 से लापता है छात्रा, माइंड वाश का आरोप

पीड़ित माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी, जो अशोका यूनिवर्सिटी में बीए की छात्रा थी, अक्टूबर 2023 से लापता है. पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की आखिरी लोकेशन यूनिवर्सिटी कैंपस में ही मिली थी, लेकिन प्रबंधन ने पुलिस जांच में सहयोग नहीं किया. उनका दावा है कि यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिट्टू कावेरी और उनके साथियों ने छात्रा का ब्रेनवॉश किया और उसका नाम बदलकर 'सोजा' रख दिया. 

माता-पिता को अंदेशा है कि उनकी बेटी का न केवल नाम, बल्कि जेंडर भी बदलवा दिया गया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मैगसेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे की बेटी आनंदी पांडे भी इस मामले में संलिप्त है और वह यूनिवर्सिटी में इस तरह के ऑपरेशंस के लिए फंड इकट्ठा करने का काम करती है.

महिला आयोग की सख्त तेवर और रजिस्ट्रार की चुप्पी

इस गंभीर मामले की सुनवाई सोमवार को पंचकूला में महिला आयोग के समक्ष हुई, जहां अशोका यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार पेश हुए. सुनवाई के दौरान माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब रजिस्ट्रार आयोग के किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने रजिस्ट्रार की चुप्पी पर सख्त नाराजगी जाहिर की और कहा कि एक छात्रा तीन साल से गायब है और यूनिवर्सिटी प्रशासन को उसकी कोई जानकारी नहीं है, यह सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. आयोग ने रजिस्ट्रार को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि यूनिवर्सिटी का रवैया यही रहा, तो वे केंद्र सरकार से इसकी उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश करेंगे.

वकील की पेशी और एनआईए जांच की सिफारिश

सुनवाई में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब आयोग के सामने छात्रा की ओर से एक वकील पेश हुई, जबकि आयोग ने उसे समन भी नहीं भेजा था. वकील ने दावा किया कि छात्रा अपनी मर्जी से रह रही है और वह अपने माता-पिता से नहीं मिलना चाहती. इस पर रेनू भाटिया ने सवाल उठाया कि जो छात्रा ढाई साल से गायब है, उसके पास हाई कोर्ट के वकील को फीस देने के लिए पैसे कहां से आ रहे हैं. आयोग ने छात्रा को मंगलवार शाम 5:00 बजे तक व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है. आयोग का मानना है कि यूनिवर्सिटी में इस तरह के कई और केस हो सकते हैं, जिसकी गहराई से जांच जरूरी है.

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