Manisha Death Case: भिवानी में अपनी बेटी मनीषा के लिए न्याय मांग रही रोती बिलखती महिलाओं का सब्र अब टूट चुका है. मनीषा की मौत को पूरे 10 महीने हो चुके हैं लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई अभी तक इस मामले का खुलासा नहीं कर पाई है कि आखिर मनीषा की मौत कैसे हुई थी. इंसाफ में हो रही इस देरी के खिलाफ सोमवार को सुबह मनीषा के पिता संजय अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से भिवानी डीसी ऑफिस के बाहर आमरण अनशन पर बैठने के लिए रवाना हुए थे.
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मनीषा के पिता संजय जब अनशन के लिए निकले तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें कुंडल गांव के पास ही रोक लिया. पुलिस अधिकारियों का तर्क था कि उन्हें इस अनशन को करने की अनुमति नहीं मिली है. पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद संजय के साथ आए ढाणी लक्ष्मण गांव के लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने वहीं पर हंगामा शुरू कर दिया.
सड़क पर रोने लगीं महिलाएं
पिता को रोकने के बाद मनीषा की मां, काकी, ताई और उनके साथ आई अन्य महिलाएं बीच सड़क पर ही बैठकर रोने लगीं. इस भारी विरोध और हंगामे की स्थिति को देखते हुए कुंडल गांव में तुरंत भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई. इसके साथ ही भिवानी के लघु सचिवालय पहुंचे अन्य प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने जबरन वहां से हटा दिया.
सरकार पर उठे गंभीर सवाल
पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज धरना देने आए लोगों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. लोगों का कहना है कि अगर वे शांतिपूर्ण तरीके से डीसी कार्यालय के बाहर बैठ रहे थे तो प्रशासन को इसमें क्या दिक्कत थी. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस पूरे रवैये को देखकर ऐसा लगता है जैसे सरकार किसी को बचाने की कोशिश कर रही है.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पिछले साल का है. दरअसल, 11 अगस्त 2025 को मनीषा अपने गांव ढाणी लक्ष्मण से प्ले स्कूल में ड्यूटी के लिए निकली थी. ड्यूटी के बाद उसने नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन के लिए जाने की बात कही थी लेकिन वह उसके बाद कभी घर वापस नहीं लौटी. दो दिन बाद यानी 13 अगस्त 2025 को मनीषा का शव सिंघानी गांव के खेतों में पड़ा हुआ मिला था.
पुलिस थ्योरी और लोगों का गुस्सा
शव मिलने के बाद मनीषा के परिवार ने उसकी हत्या का आरोप लगाया था जिसके बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया था. मनीषा को न्याय दिलाने के लिए साल 2025 में भी लोगों ने भारी धरना प्रदर्शन किया था. हालांकि 18 अगस्त 2025 को पुलिस ने इस मामले को खुद की जान लेने का मामला बताया था जिसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया.
10 महीने बाद भी हाथ खाली
लगातार बढ़ते आंदोलन और विरोध को देखते हुए मनीषा के शव का तीसरी बार दिल्ली के एम्स अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया था. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 अगस्त 2025 को इस पूरे केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.आज बीच सड़क पर बैठी ये महिलाएं चीख-चीख कर अपनी बेटी के लिए न्याय की भीख मांग रही हैं. इन महिलाओं का सीधा सवाल है कि जब 26 अगस्त 2025 को ही केस सीबीआई के पास चला गया था तो साल 2026 के जून महीने के आखिरी समय तक भी सीबीआई के हाथ खाली क्यों हैं और जांच में कोई नतीजा क्यों नहीं निकला है.
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