रामपाल महाराज के दरबार में हाथ जोड़े खड़े रहे BJP विधायक, नाम दीक्षा मांगी तो मिला ऐसा जवाब कि उड़ गए होश!

हरियाणा की नलवा सीट से बीजेपी विधायक रणधीर परिनिहार सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल महाराज से मिलने पहुंचे. विधायक ने रामपाल महाराज की जमकर तारीफ की और नाम दीक्षा (मंत्र) व आशीर्वाद मांगा. इस पर रामपाल महाराज ने साफ इनकार करते हुए कहा कि पहले हमारे स्कूल की शर्तें और ज्ञान समझो, दाखिला बाद में होगा.

randhir panihar
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राहुल यादव

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हरियाणा की राजनीति और धार्मिक डेरों का नाता काफी पुराना है. चुनाव हो या कोई संकट, राजनेता अक्सर संतों के दरबार में हाजिरी लगाते दिख जाते हैं. ऐसा ही एक ताजा और दिलचस्प मामला हरियाणा की नलवा विधानसभा सीट से सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक रणधीर पनिहार, सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल महाराज के दरबार में पहुंचे. लेकिन यहां विधायक जी के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसकी उन्होंने उम्मीद भी नहीं की होगी.

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विधायक ने बांधे तारीफों के पुल

सोमवार की शाम को बीजेपी विधायक रणधीर परिनिहार सतलोक आश्रम पहुंचे थे. रामपाल महाराज से मुलाकात के दौरान विधायक जी भावुक होकर उनकी तारीफों के पुल बांधने लगे. उन्होंने कहा कि वह मानसिक रूप से हमेशा बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते रहते हैं और जब भी उन्होंने मन से प्रार्थना की, बाबा ने उनकी बात सुनी.

बाढ़ के समय की याद दिलाई

विधायक पनिहार ने पिछले साल मानसून के दौरान उनके इलाके में आए बाढ़ के संकट का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि जब उनका पूरा नलवा हल्का पानी में डूबा हुआ था, तब प्रशासन भले ही नाकाम रहा हो, लेकिन रामपाल महाराज के अनुयायियों और सेवादारों ने गांवों में मोटर और पाइप भेजकर पानी निकाला और लोगों की मदद की. विधायक ने इसके लिए बाबा का साक्षात धन्यवाद किया.

'दो दिन के लाड साहब हैं, परसों कुत्ते बनेंगे तो कौन पूछेगा'

विधायक जब लगातार तारीफ किए जा रहे थे, तो रामपाल महाराज ने उन्हें बीच में टोक दिया. बाबा ने कहा, "यह सब तो पिछले जन्म के संस्कार हैं जो तुम्हारी पुकार सुन ली गई. लेकिन अगला जीवन भक्ति से सुधरेगा. हम सब दो दिन के लाड साहब हैं, कल मर जाएंगे, परसों कुत्ते बनेंगे तो कौन पूछेगा? असली काम (भक्ति) शुरू करो."

नाम दीक्षा देने से किया साफ इनकार

इसके बाद जब बीजेपी विधायक रणधीर पनिहार ने रामपाल महाराज से अपने और अपने साथियों के लिए आशीर्वाद और नाम दीक्षा (मंत्र) की मांग की, तो बाबा ने उन्हें दो टूक मना कर दिया.

विधायक ने कहा, "मेरा नाम तो आज से ही लिख लीजिए." इस पर रामपाल ने स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा, "ऐसे नहीं होता है. स्कूल में दाखिले के लिए पहले नाम लिखवाना पड़ता है. पहले हमारा ज्ञान समझो, हमारे स्कूल की सारी टर्म्स एंड कंडीशंस (शर्तें) समझो, उसके बाद ही यहां एडमिशन होगा. ये काम मैं खुद नहीं करता, इसके लिए हमारे हेल्पर हैं, वो सब समझा देंगे." रामपाल महाराज की यह बात सुनकर विधायक के चेहरे पर निराशा साफ देखी जा सकती थी.

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