बीके हरिप्रसाद की विदाई से हरियाणा कांग्रेस में खलबली, 11 साल बाद संगठन बनवाकर क्यों छोड़ना पड़ा साथ?

हरियाणा कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद को कर्नाटक कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब हरियाणा से उनकी विदाई हो रही है. उन्होंने 11 साल बाद हरियाणा में कांग्रेस संगठन का गठन कराया था. जाते-जाते उन्होंने नेताओं पर अनुशासन कसने के लिए बिना मंजूरी के रैली या प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पर रोक लगा दी थी.

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न्यूज तक डेस्क

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हरियाणा कांग्रेस में एक बार फिर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है. इस नई जिम्मेदारी के साथ ही अब हरियाणा कांग्रेस से उनकी विदाई तय हो गई है, जिससे राज्य में जल्द ही नया प्रभारी मिलने की संभावना बढ़ गई है.

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संगठन बनते ही बदला समीकरण

बीके हरिप्रसाद की विदाई ऐसे समय में हुई है जब हरियाणा कांग्रेस को मजबूत करने के लिए बूथ स्तर तक एक्टिव करने की तैयारियां चल रही थीं. हरिप्रसाद ने अपने कार्यकाल के दौरान एक बड़ा माइलस्टोन छूते हुए करीब 11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां कराईं और संगठन को नया रूप दिया. नेताओं को अनुशासन में बांधने के लिए उन्होंने कई कड़े फैसले भी लिए थे.

नेताओं पर लगाम कसने के लिए जारी किया था फरमान

विदाई से ठीक पहले, बीती 1 जून को बीके हरिप्रसाद ने एक बेहद सख्त आदेश जारी किया था. इसके तहत हरियाणा कांग्रेस के छोटे से लेकर वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और सांसदों तक के लिए कड़े नियम तय किए गए थे:

किसी भी धरना-प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस या राजनीतिक कार्यक्रम से पहले प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (HPCC) को जानकारी देना और वहां से मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया.

कोई भी कार्यक्रम आयोजित करते समय जिला और प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ तालमेल बिठाना जरूरी किया गया.

उन्होंने राव नरेंद्र को फुल एक्शन की पावर देते हुए बेलगाम और अनुशासनहीन नेताओं को सस्पेंड या निष्कासित करने तक के निर्देश दिए थे.

बृजेंद्र सिंह की 'सद्भाव यात्रा' भी रही वजह?

सियासी गलियारों में चर्चा है कि हरिप्रसाद का यह सख्त आदेश पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की 'सद्भाव यात्रा' को लेकर उभरे मतभेदों का नतीजा था. अक्टूबर 2025 में जब यह यात्रा शुरू हुई थी, तब तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान ने इसे कांग्रेस का ऑफिशियल कार्यक्रम मानने से इनकार कर दिया था. हालांकि, राहुल गांधी ने पिछले महीने गुरुग्राम में इस यात्रा की खुलकर तारीफ की थी और वे खुद भी इसमें शामिल हुए थे. इसके बावजूद पार्टी के कई नेता इसे व्यक्तिगत यात्रा बताते रहे, जिससे पैदा हुए विवाद को संभालने के लिए हरिप्रसाद को कड़ा कदम उठाना पड़ा था.

अब देखना यह होगा कि बीके हरिप्रसाद के जाने के बाद उनके द्वारा बनाए गए कड़े नियमों का क्या होता है और आलाकमान हरियाणा कांग्रेस की कमान किस नए प्रभारी को सौंपता है.

 

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