बिश्नोई समाज के पहले MLA चौधरी सहीराम बिश्नोई पंचतत्व में विलीन, पुराने किस्से हैं बड़े अनोखे, CM सैनी ने की बड़ी घोषणा

बिश्नोई समाज के पहले विधायक और 104 वर्षीय पूर्व नेता चौधरी सहीराम धारणिया बिश्नोई का निधन हो गया है. विभाजन के समय पाकिस्तान से 15 हजार लोगों को भारत लाने वाले सहीराम को मरणोपरांत 'बिश्नोई रत्न' से सम्मानित किया गया.

chaudhary sahiram bishnoi
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सोनिया सत्यानीता

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हरियाणा के सबसे बुजुर्ग पूर्व विधायक चौधरी सहीराम धारणिया बिश्नोई का 104 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके पैतृक गांव डबवाली के सक्ताखेड़ा में आयोजित शोक सभा में उन्हें अंतिम विदाई दी गई. इस दुखद घड़ी में सूबे के मुखिया नायब सिंह सैनी ने उन्हें बिश्नोई समाज की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा की ओर से मरणोपरांत 'बिश्नोई रत्न' सम्मान से सम्मानित किया. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सक्ताखेड़ा गांव में बनने वाले सरकारी अस्पताल का नाम अब स्वर्गीय चौधरी सहीराम बिश्नोई के नाम पर रखा जाएगा.

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विभाजन के समय पाकिस्तान से लाए थे 15 हजार लोगों का जत्था

चौधरी सहीराम बिश्नोई का जन्म 12 जनवरी 1922 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बहावलपुर रियासत के प्रसिद्ध गांव... तालिया में हुआ था. देश के बंटवारे के समय उन्होंने अपनी हजारों एकड़ जमीन और आलीशान हवेली को छोड़कर भारत आने का साहसिक फैसला किया. वे अकेले नहीं आए, बल्कि पाकिस्तान से करीब 14 से 15 हजार लोगों का जत्था सुरक्षित लेकर भारत पहुंचे थे.

उन्होंने भारत आकर इन रिफ्यूजियों के पुनर्वास के लिए 'गहने बेचो हथियार खरीदो' नामक अभियान भी चलाया. उन्होंने दूसरों को जमीन और क्लेम पहले दिलवाया और खुद का क्लेम करीब 20 साल बाद डाला था.

ताऊ देवीलाल और प्रकाश सिंह बादल के साथ पहुंचे थे विधानसभा

सहीराम बिश्नोई राजनीतिक जगत के बेहद सम्मानित चेहरे थे. साल 1957 में वे जनसंघ की टिकट पर अबोहर से चुनाव जीतकर पंजाब विधानसभा पहुंचे थे. उस समय उन्होंने पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल के साथ सदन साझा किया था.

वे बिश्नोई समाज से विधायक बनने वाले पहले व्यक्ति थे. इसके अलावा उन्होंने लगातार 40 साल तक अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष के रूप में समाज की सेवा की. शोक सभा में पहुंचे इनेलो नेता अभय चौटाला ने भी उनके साथ अपने पुराने पारिवारिक रिश्तों को याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

104 साल की उम्र में भी बिना चश्मे के पढ़ते थे अखबार

चौधरी सहीराम बिश्नोई का जीवन अनुशासन और सादगी की मिसाल था. 104 साल की उम्र में भी वे बिना चश्मा लगाए अखबार पढ़ लेते थे. उनकी इस लंबी और सेहतमंद जिंदगी का राज उनका सादा जीवन, चिंता मुक्त रहना और खुद खेतों में जाकर काम करना था. इसी साल 12 जनवरी को उन्होंने अपना आखिरी जन्मदिन मनाया था. पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सुधारों के लिए किए गए उनके कार्यों को हमेशा याद रखा जाएगा.

 

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