Haryana News: हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी के जनता दरबार में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक महिला अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री के सामने फूट-फूटकर रोने लगी. महिला का आरोप था कि दबंगों और पुलिस की मिलीभगत के कारण उसके खेत का रास्ता बंद कर दिया गया है. महीनों से शिकायत करने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो लाचार होकर उसे सीएम के दरबार में आना पड़ा. महिला की दर्दभरी दास्तान सुनकर मुख्यमंत्री सैनी तुरंत एक्शन मोड में आ गए और मंच से ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दे दिए.
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क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित महिला हरियाणा के महरे गांव की रहने वाली है और उसकी जमीन बकाली में है, जिसे उनके ससुर ने खरीदा था. महिला का आरोप है कि कोर्ट की 1997 की डिग्री के अनुसार उनके पास खेत का वैध रास्ता है. इसके बावजूद विपक्षी पार्टी ने पुलिस और बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर उस रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया और वहां बिजली के पोल (खंभे) खड़े कर दिए.
महिला ने रोते हुए मुख्यमंत्री को बताया, "हम छोटे से किसान हैं, हमारे पास कृषि के अलावा गुजारे का कोई और साधन नहीं है. रास्ते के इस विवाद के कारण हमारे खेत खाली पड़े हैं और अब हमारे सामने जहर खाने की नौबत आ गई है. बच्चों की स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं हैं. हम इस मामले को लेकर एसपी के पास भी गए और बीते 5 मई को भी आपको लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई."
सीएम सैनी का ऑन द स्पॉट कड़ा एक्शन
महिला को इस तरह रोता देख और उसकी पूरी बात सुनने के बाद सीएम नायब सिंह सैनी बेहद सख्त नजर आए. उन्होंने मौके पर मौजूद एसडीओ और बिजली विभाग के अधिकारियों (XEN) को तुरंत तलब किया. जब अधिकारियों ने दलील दी कि यह मामला सिविल कोर्ट में पेंडिंग है तो मुख्यमंत्री ने दोटूक कहा कि कोर्ट का जो फैसला आएगा, हम उसका सम्मान करेंगे, लेकिन तब तक कोई भी किसी का रास्ता इस तरह बंद नहीं कर सकता.
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में आदेश देते हुए कहा, "जिसने भी रास्ते पर ये पोल लगाए हैं, वहां वो पोल दिखाई नहीं देने चाहिए. एसडीएम साहब, इस पूरे मामले की तुरंत जांच कीजिए. जिस भी अधिकारी या एसडीओ की इसमें मिलीभगत रही है, उसके नाम भेजो और तुरंत सख्त कार्रवाई करो."
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को सुरक्षा का भरोसा देते हुए कहा कि अगर कोई उन्हें मारने की धमकी देता है, तो तुरंत आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए. सीएम के इस त्वरित और सख्त फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है.
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