संसद में विवादित CAPF (Central Armed Police Forces) Bill पर चर्चा के दौरान राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया. हुड्डा ने अर्धसैनिक बलों (CRPF, BSF, ITBP, CISF) के जवानों और अधिकारियों की दुर्दशा का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जो जवान सरहद पर दुश्मन का मुकाबला करते हैं, आज उन्हें अपने ही हक के लिए अपनी सरकार से अदालतों में लड़ना पड़ रहा है.
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प्रमोशन नहीं, यह स्वाभिमान की लड़ाई है
दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा के रोहतक (मोखरा गांव) के रहने वाले असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का उदाहरण देते हुए सदन को भावुक कर दिया. उन्होंने बताया कि:
अजय मलिक ने 14 साल पहले UPSC पास कर CRPF जॉइन की थी. उन्होंने राष्ट्रपति गैलेंट्री मेडल और प्रधानमंत्री जीवन रक्षा मेडल जैसे बड़े सम्मान जीते, नक्सली मुठभेड़ में अपना पैर तक गंवा दिया. लेकिन विडंबना देखिए कि 14 साल की बेमिसाल सेवा के बाद भी उन्हें आज तक पहली प्रमोशन का इंतजार है.
हुड्डा ने कहा कि उनके साथ के सहपाठी जो फौज में गए वे कर्नल बन गए और जो पुलिस में गए वे DIG बन गए, लेकिन CAPF के अधिकारी वहीं के वहीं खड़े हैं. यह उनके स्वाभिमान पर चोट है.
आंकड़ों ने खोली पोल
हुड्डा ने सरकार के ही उत्तरों का हवाला देते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए. उन्होंने बताया कि हर साल इन फोर्सेस से 10,000 लोग वॉलंटरी रिटायरमेंट (VRS) ले रहे हैं. लगभग 2,000 जवान प्रतिवर्ष इस्तीफा दे रहे हैं. अर्धसैनिक बलों में हर साल करीब 150 जवान आत्महत्या (Suicide) कर रहे हैं, जो कि युद्ध या मुठभेड़ में शहीद होने वाले जवानों की संख्या से भी कहीं अधिक है.
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
सांसद ने सरकार को घेरते हुए कहा कि गृह मंत्री ने जवानों को साल में 100 दिन घर पर बिताने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में CISF जैसे बलों को मात्र 30 दिन की अर्न लीव (EL) मिल रही है. उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (OPS) का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जवानों के हक में फैसला दिया था, लेकिन सरकार उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई.
हुड्डा की प्रमुख मांगें
OGAS और NFFU: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अधिकारियों को 'ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस' (OGAS) का दर्जा और नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (NFFU) दिया जाए ताकि करियर प्रोग्रेशन बना रहे.
- पुरानी पेंशन (OPS): अर्धसैनिक बलों को भी सेना की तर्ज पर पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ मिले.
- सैनिक कल्याण बोर्ड: हर राज्य में पैरामिलिट्री सैनिक कल्याण बोर्ड का गठन हो.
- फ्लैग डे फंड: सेना की तरह पैरामिलिट्री फ्लैग डे फंड बनाया जाए ताकि शहीद और दिव्यांग जवानों के परिवारों की मदद हो सके.
- छुट्टियां: जवानों की छुट्टियों को बढ़ाया जाए और गृह मंत्री अपना 100 दिन का वादा पूरा करें.
हुड्डा ने अंत में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि 'अग्निवीर' लाकर आपने मिलिट्री को पहले ही 'कच्चा' कर दिया है, अब पैरामिलिट्री के भविष्य की जड़ें काटना बंद करें.
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