Haryana Woman Judge Honey Trapped: दिल्ली की एक अदालत ने ₹52.81 लाख की साइबर ठगी और हनी ट्रैप के आरोपी दीपक वत्स की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. इस मामले में एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा हुआ है. कोर्ट ने पाया कि ठगी की असली शिकार कोई साधारण महिला नहीं, बल्कि हरियाणा की एक महिला न्यायिक अधिकारी (Judicial Officer) हैं. लोक-लाज और बदनामी के डर से उन्होंने पुलिस में खुद के बजाय अपनी नौकरानी के नाम से केस दर्ज करवाया था.
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नौकरानी के नाम पर दर्ज हुई थी FIR
यह पूरा मामला तब सामने आया जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फरवरी में दीपक वत्स नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया. पुलिस में FIR दीक्षा देवी नाम की एक घरेलू सहायिका (नौकरानी) के नाम पर दर्ज कराई गई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक ऑनलाइन डेटिंग ऐप (Tinder) के जरिए उनके साथ ₹52,81,999 की धोखाधड़ी की गई है.
कोर्ट में ऐसे खुला राज
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (New Delhi District) सौरभ प्रताप सिंह लालर ने मामले की जांच के बाद पाया कि इस पूरी ठगी में नौकरानी दीक्षा देवी के बैंक खाते से एक भी डिजिटल पेमेंट नहीं हुआ था. सारे पैसे सीधे हरियाणा की एक महिला जज के बैंक खाते से ट्रांसफर किए गए थे. दीक्षा देवी दरअसल उसी महिला जज के घर पर काम करती हैं.
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, "जो मामला एक सीधे डिजिटल मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन) के साथ बिल्कुल साफ था, उसे आरोपी, पीड़िता और जांच अधिकारी (IO) तीनों के व्यवहार ने उलझा दिया है. कानून और सच की रक्षा करने वाली एक न्यायिक अधिकारी ने खुद सामने आने के बजाय अपनी नौकरानी का सहारा लिया."
Tinder से शुरू हुई थी लव स्टोरी
आरोपी दीपक वत्स ने कोर्ट को बताया कि महिला जज और उसकी मुलाकात डेटिंग ऐप 'टिंडर' पर हुई थी. महिला जज ने 'Altruistic Joy' नाम से एक फर्जी प्रोफाइल बनाई थी. इसके बाद दोनों के बीच वाट्सएप पर बातचीत शुरू हुई और वे एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए. आरोपी का दावा है कि महिला जज ने अपनी मर्जी से ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी (Betting) के खातों में पैसे ट्रांसफर किए थे.
हालांकि, कोर्ट ने आरोपी के दावों को पूरी तरह सच नहीं माना. कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने जो वाट्सएप चैट पेश की है, वह केवल एकतरफा है. उसमें सिर्फ महिला जज के मैसेज दिख रहे हैं, आरोपी ने क्या भेजा वह गायब है.
सोची-समझी साजिश (Honey Trap) का शिकार
अदालत ने बैंक रिकॉर्ड और वाट्सएप चैट का मिलान करने के बाद कहा कि यह मामला पूरी तरह से 'हनी ट्रैप' का है. ठगों का तरीका बड़ा पुराना है , पहले डेटिंग ऐप पर दोस्ती करो, फिर प्यार का नाटक करके नजदीकियां बढ़ाओ और उसके बाद निवेश या किसी अन्य बहाने से पैसे ऐंठना शुरू कर दो. इस केस में भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ.
यही नहीं, मामले में ₹5 लाख का एक कैश डिपॉजिट भी मिला, जिसे महिला जज के ही कोर्ट चपरासी (Court Peon) ने जमा कराया था. कोर्ट ने कहा कि यह पैसा भी नौकरानी का नहीं बल्कि जज का ही था.
जांच पर भी उठे सवाल, जमानत खारिज
अदालत ने दिल्ली पुलिस की जांच पर भी नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने पीड़िता के फोन से वाट्सएप डेटा, टिंडर डेटा या कॉल रिकॉर्ड जैसे जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाने की कोशिश ही नहीं की.
अदालत ने आरोपी दीपक वत्स को राहत देने से साफ मना कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने ₹52 लाख से ज्यादा की रकम ठगी है और वह अपने फोन का पासवर्ड न देकर जांच में बाधा डाल रहा है. इन्हीं सब कारणों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया.
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