'बेटा, मैं बच नहीं पाऊंगी, तुम निकल जाओ...' जब मालवीय नगर के जलते होटल में देवदूत बनकर कूदे दिल्ली पुलिस के दिनेश यादव

दिल्ली के मालवीय नगर होटल में लगी भीषण आग के दौरान दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल दिनेश यादव ने अदम्य साहस का परिचय दिया. वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के, चप्पल में ही जलती इमारत के अंदर वेंटिलेशन के रास्ते कूद गए.

dinesh yadav
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न्यूज तक डेस्क

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दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक होटल में सुबह-सुबह लगी भीषण आग ने कोहराम मचा दिया. चारों तरफ धुआं, आग की ऊंची लपटें और लोगों की चीख-पुकार मची हुई थी. इसी बीच मालवीय नगर थाने में तैनात हेड कांस्टेबल दिनेश सिंह यादव ने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक ऐसी बहादुरी की मिसाल पेश की, जिसने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक हर किसी का दिल जीत लिया है. दिनेश यादव ने बिना सुरक्षा उपकरणों के जलती हुई इमारत के अंदर घुसकर 5 लोगों की जान बचाई.

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सिविल कपड़ों और चप्पल में ही दौड़ पड़े दिनेश

हेड कांस्टेबल दिनेश यादव ने बताया कि सुबह जब थाने में आग लगने की सूचना मिली, तब वह सिविल कपड़ों और चप्पल में थे. कॉल आते ही उन्होंने बिना वक्त गंवाए अपनी बाइक उठाई और मौके की तरफ दौड़ पड़े. रास्ते में उन्हें उनके साथी कांस्टेबल रामपाल मिले, जिन्हें साथ लेकर वह घटना स्थल की तरफ बढ़े. मेट्रो स्टेशन के पास भारी जाम होने के कारण दिनेश ने जल्दबाजी में चाबी बाइक में ही छोड़ दी और करीब 300 मीटर पैदल दौड़कर होटल पहुंचे.

शीशा तोड़ने में लहूलुहान हुए हाथ, फिर भी अंदर कूद गए

जब वे मौके पर पहुंचे, तो होटल का अगला हिस्सा पूरी तरह आग की चपेट में था. लोग खिड़कियों और बालकनी से हाथ निकालकर 'बचाओ-बचाओ' चिल्ला रहे थे. दिनेश ने स्थानीय नागरिक की लकड़ी की सीढ़ी ली और उसके सहारे होटल की दूसरी मंजिल के बाथरूम की खिड़की तक पहुंचे. खिड़की का मजबूत शीशा तोड़ने के लिए दिनेश ने उस पर कई मुक्के मारे, जिससे उनके हाथ पूरी तरह कट गए और लहूलुहान हो गए. इसके बावजूद वह वेंटिलेशन के संकरे रास्ते से जलते हुए होटल के अंदर कूद गए.

'बेटा, मैं नहीं बचूंगी...' जब विदेशी महिला ने खो दी थी उम्मीद

बाथरूम के अंदर धुएं और गैस का गुबार भरा हुआ था और बगल के कमरों से आग की लपटें आ रही थीं. वहां दो महिलाएं फंसी हुई थीं, जिनमें से एक काफी बुजुर्ग और लगभग 100 किलो वजन की बीमार विदेशी महिला थी. जब काफी कोशिशों के बाद भी वह भारी वजन के कारण बाहर नहीं निकल पा रही थीं, तो उन्होंने निराश होकर हिंदी में दिनेश से कहा, "बेटा, मैं बच नहीं पाऊंगी, तुम मेरी अटेंडेंट को निकाल दो और खुद भी यहां से भाग जाओ".

कंधे पर उठाकर बचाई 5 जिंदगियां

दिनेश यादव ने हार नहीं मानी. उन्होंने बाथरूम में रखी एक बाल्टी को उल्टा किया, महिला को अपने कंधे पर उठाया और बाहर खड़े लोगों की मदद से खिड़की से बाहर धकेला. इसके बाद उन्होंने दूसरी महिला को भी इसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला. इसके तुरंत बाद ही पूरी बिल्डिंग में बिजली के तारों के टूटने और भयंकर ब्लास्ट का सिलसिला शुरू हो गया.

नीचे आने के बाद दिनेश ने चौथी मंजिल पर लटके नाइजीरियन कपल और अन्य लोगों को नीचे गद्दे बिछाकर सुरक्षित कूदने में मदद की. इस तरह उन्होंने कुल 5 लोगों की जान बचाई, जो अब पूरी तरह सुरक्षित हैं. इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दिनेश यादव के हाथ और कोहनी बुरी तरह जल गए और वह खुद भी घायल हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. उनके खून से सने और जले हुए कपड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि खाकी ने एक बार फिर इंसानियत का फर्ज सबसे ऊपर रखा है.

 

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