Aryan Race Theory: क्या कोई इंसान सिर्फ अपने जींस (Genes) के दम पर दूसरों से सुपीरियर या बेहतर हो सकता है? सोशल मीडिया पर अक्सर 'आर्यन रेस थ्योरी' और 'जीन सुपीरियरिटी' को लेकर छिड़ने वाली बहस के बीच देश के जाने-माने डॉक्टर एस. के. सरीन (Dr SK Sarin) ने बड़ा खुलासा किया है. डॉ. सरीन का साफ कहना है कि कोई भी व्यक्ति सिर्फ अच्छे जींस लेकर पैदा होने से सुपीरियर नहीं हो जाता, बल्कि उसका खान-पान और माहौल (Environment) सबसे ज्यादा मायने रखता है. इसके साथ ही उन्होंने शादी और बच्चे पैदा करने को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली बात कही है कि अगर माता-पिता खुद अनहेल्दी हैं, तो उन्हें बच्चा पैदा करने का कोई हक नहीं है.
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जींस से बड़ा है माहौल का खेल: एपिजेनेटिक्स (Epigenetics)
डॉ. एस के सरीन ने बताया कि इंसानी शरीर में करीब 32,000 जींस होते हैं. सिर्फ जींस के भरोसे पूरी दुनिया या किसी इंसान की सेहत तय नहीं होती. जींस के ऊपर हमारे पर्यावरण और लाइफस्टाइल का जो असर पड़ता है, उसे मेडिकल साइंस में 'एपिजेनेटिक्स' कहा जाता है.
डॉक्टर सरीन ने उदाहरण देते हुए समझाया कि मुमकिन है कोई व्यक्ति दुबले-पतले शरीर के जींस के साथ पैदा हुआ हो, लेकिन खराब लाइफस्टाइल और ज्यादा खाने की वजह से वह मोटा या बीमार हो जाए. ठीक इसी तरह, अगर किसी के जींस खराब भी हैं, लेकिन वह लगातार दौड़ता है, एक्सरसाइज करता है और खुद को फिट रखता है, तो वह अपने उन खराब जींस के असर को पूरी तरह बेअसर (Neutralize) कर सकता है. इसलिए सिर्फ 'आर्यन रेस' या जेनेटिक थ्योरी को पूरी तरह सही मानना ठीक नहीं है.
"अगर खुद अनहेल्दी हैं, तो बच्चा पैदा करने का हक नहीं"
आजकल के युवाओं में 'डिंक' (DINK - Double Income No Kids) यानी शादी के बाद बच्चा न करने का ट्रेंड बढ़ रहा है. इस पर बात करते हुए डॉ. सरीन ने एक बेहद गंभीर और कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा, "अगर आप और आपके पार्टनर हेल्दी नहीं हैं, तो आपको इस दुनिया में बच्चा लाने का कोई अधिकार नहीं है."
उन्होंने कहा कि माता-पिता को इस बात के लिए जवाबदेह होना पड़ेगा कि उनकी खराब सेहत या बीमारियों का खामियाजा आने वाले बच्चे को भुगतना पड़ता. आज के दौर में लोग यह नहीं सोचते कि बच्चा 100 साल तक स्वस्थ जिए, बल्कि उनका ध्यान सिर्फ इस बात पर रहता है कि बच्चा देखने में कितना सुंदर, गोल-मटोल या गुलगुला है, ताकि उसकी तस्वीरें अच्छी आ सकें.
डॉ. सरीन के मुताबिक, आज के समाज में प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं, जबकि हमारी प्राथमिकता एक सुंदर बच्चे की बजाय एक पूरी तरह 'हेल्दी चाइल्ड' की होनी चाहिए.
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