देश के मेट्रोपॉलिटन शहरों में शुमार हरियाणा के फरीदाबाद से एक ऐसी हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी है. फरीदाबाद के सेक्टर-3 स्थित एक सरकारी अस्पताल (FRU - फर्स्ट रेफरल यूनिट) के परिसर में रात के अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में एक गर्भवती महिला की डिलीवरी करानी पड़ी. अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लगा होने और इमरजेंसी स्टाफ के न मिलने के कारण पीड़ित परिवार को अस्पताल की पार्किंग और फर्श पर ही डिलीवरी कराने के लिए मजबूर होना पड़ा.
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गेट पर जंजीरें और कुर्सियां, भटकता रहा परिवार
पीड़ित महिला के देवर चमन ने बताया कि यह पूरी घटना रात करीब 1:30 बजे की है. जब वह अपनी गर्भवती भाभी और मां को लेकर अस्पताल पहुंचे, तो भाभी को लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) बहुत ज्यादा था. उन्होंने अस्पताल का मुख्य ओपीडी गेट बजाया, लेकिन वह बंद था और उस पर जंजीरें व कुर्सियां लगी हुई थीं. चमन के मुताबिक, "मैंने करीब 5-7 मिनट गेट बजाया, लेकिन कोई बाहर नहीं आया. इसके बाद मैं पीछे की तरफ बनी इमरजेंसी में व्हीलचेयर ढूंढने गया. वहां कोई स्टाफ मौजूद नहीं था. मैं खुद व्हीलचेयर लेकर आया, लेकिन दर्द के कारण भाभी उस पर बैठ नहीं पाईं."
15 मिनट तक नहीं मिला स्टाफ, फर्श पर हुआ जन्म
परिजनों का आरोप है कि करीब 15 मिनट तक वे नीचे स्टाफ को ढूंढते रहे, लेकिन ग्राउंड फ्लोर पर कोई नहीं था. पूरा स्टाफ और नर्सें फर्स्ट फ्लोर पर थीं. जब तक चमन ऊपर जाकर दो नर्सों को नीचे लेकर आए, तब तक पीड़ित महिला की सास ने सूझबूझ दिखाते हुए नीचे जमीन पर ही डिलीवरी करवा दी थी. परिजनों का कहना है कि अगर बुजुर्ग मां साथ नहीं होती, तो जच्चा और बच्चा दोनों की जान को खतरा हो सकता था.
स्टाफ पर बदतमीजी और नाम छुपाने का आरोप
पीड़ित परिवार ने अस्पताल के ड्यूटी स्टाफ पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. बच्चे के पिता देवेंद्र चंद और देवर चमन ने कहा कि जब उन्होंने इस लापरवाही का विरोध किया और वीडियो बनाना शुरू किया, तो ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्सों ने उनके साथ बदतमीजी की. परिवार ने जब स्टाफ से उनके नाम पूछने चाहे, तो उन्होंने अपने नाम बताने से साफ इनकार कर दिया और उल्टा परिजनों पर ही बदतमीजी का आरोप मढ़ने लगे. घटना के बाद रात में ही पीड़ित परिवार ने 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस को भी इसकी सूचना दी.
प्रशासन की सफाई: जांच के लिए बनी कमेटी, एक नर्स का ट्रांसफर
इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रशासन की तरफ से वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने सफाई दी है. अधिकारी ने बताया, "मरीज रात करीब 1:30 बजे आया था. ओपीडी का दरवाजा रात को सुरक्षा कारणों से बंद रहता है, लेकिन डिलीवरी वार्ड और रैंप की तरफ जाने वाला रास्ता 24 घंटे खुला रहता है. मरीज के परिजनों को शायद इसकी जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्हें ढूंढने में 10 मिनट लग गए. जैसे ही वे ऊपर पहुंचे, स्टाफ तुरंत इंस्ट्रूमेंट्स लेकर नीचे आया और बच्चे को क्लीन कर मां को लेबर रूम में शिफ्ट किया गया."
अधिकारी ने आगे बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो 5 से 7 दिनों में अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेगी. शुरुआती कदम उठाते हुए मौके पर मौजूद एक नर्स का ट्रांसफर तुरंत कर दिया गया है. साथ ही, भविष्य में ऐसी असमंजस की स्थिति न बने, इसके लिए अस्पताल परिसर में रात को चमकने वाले 'ग्लो साइन बोर्ड' और इंडिकेटर एरो लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रसूति गृह का रास्ता साफ दिख सके.
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