हरियाणा के प्रतिष्ठित संस्थान एनआईटी (NIT) कुरुक्षेत्र में इन दिनों मातम और आक्रोश का माहौल है. गुरुवार की रात एक छात्रा की आत्महत्या की खबर ने कैंपस में चिंगारी का काम किया, जिसके बाद हजारों छात्र न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए. छात्रों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि पिछले महज चार महीनों में इस कैंपस के चार होनहार छात्र अपनी जान दे चुके हैं.
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ताजा घटना: बिहार की छात्रा ने दी जान
ताजा मामला गुरुवार रात का है, जब बीटेक (AI और डेटा साइंस) सेकंड ईयर की छात्रा दीक्षा दुबे ने हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. दीक्षा बिहार की रहने वाली थी. सुसाइड नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा, "मम्मी-पापा, मैं कुछ करके नहीं दिखा पाई, मैंने आपके पैसे बर्बाद कर दिए."
4 महीने, 4 मौतें: अलार्मिंग सिचुएशन
कैंपस में छात्रों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है:
- 16 फरवरी: तेलंगाना के अंगोद शिवा (19 वर्ष) ने जान दी.
- 31 मार्च: नूह के पवन कुमार (22 वर्ष) ने आत्महत्या की.
- 9 अप्रैल: सिरसा के प्रियांशु वर्मा (22 वर्ष) का शव हॉस्टल में मिला.
- 15 अप्रैल: दीक्षा दुबे ने आत्महत्या की.
ये सभी छात्र बीटेक के थे और पढ़ाई में काफी होनहार माने जाते थे. छात्रों का सवाल है कि एनआईटी जैसे संस्थान में ऐसी क्या परिस्थितियां बन रही हैं कि बच्चे ये कदम उठाने को मजबूर हैं.
छात्रों के मैनेजमेंट पर 3 बड़े और गंभीर आरोप
देर रात हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने मीडिया के सामने प्रशासन की पोल खोलते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए:
- संवेदनहीन हेल्थ टीम: छात्रों का आरोप है कि जब दीक्षा की बॉडी देखी गई, तो यूनिवर्सिटी की हेल्थ टीम ने कमरे का गेट खोलने या छात्रा की जांच करने की जहमत नहीं उठाई. खिड़की से केवल छात्रा की पीठ देखकर ही उसे मृत घोषित कर दिया गया. छात्रों को खुद अपने हाथों से बॉडी उतारनी पड़ी.
- मेंटर्स का शर्मनाक बयान: छात्रों ने दावा किया कि मौतों के बाद प्रशासन ने जो मेंटर्स नियुक्त किए थे, उनका रवैया बेहद खराब है. एक छात्र ने आरोप लगाया कि एक मेंटर ने यहाँ तक कह दिया, "अगर मरना ही है तो एनआईटी के अंदर क्यों मरते हो, बाहर ब्रह्मसरोवर जाकर मरो."
- अकादमिक दबाव और भ्रष्टाचार: छात्रों ने बताया कि 75% अटेंडेंस का कड़ा नियम और सेमेस्टर का भारी बोझ बच्चों को तनाव में डाल रहा है. उन्होंने मिड-सेम परीक्षाओं की संख्या घटाने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग की है.
प्रशासन का आश्वासन और प्रदर्शन खत्म
करीब 6 घंटे तक चले भारी हंगामे के बाद एनआईटी के डायरेक्टर प्रोफेसर ब्रह्मजीत छात्रों के बीच पहुँचे. उन्होंने छात्रों की मांगों पर विचार करने और स्पोर्ट्स इंचार्ज सहित अन्य जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया. इसके बाद छात्रों ने फिलहाल अपना धरना खत्म कर दिया है, लेकिन वे अब इन सभी मौतों की CBI जांच की मांग कर रहे हैं.
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