चरखी दादरी: घसोला मेडिकल कॉलेज के नामकरण पर छिड़ा रार, राव तुलाराम के नाम का क्यों हो रहा है विरोध?

Charkhi Dadri Medical College News: हरियाणा के चरखी दादरी के घसोला गांव में बनने वाले मेडिकल कॉलेज के नामकरण को लेकर विवाद गहरा गया है. राव तुलाराम के नाम पर कॉलेज का नाम रखने के फैसले का ग्रामीणों और खाप पंचायतों ने विरोध किया है. ग्रामीणों का कहना है कि 50 एकड़ जमीन दान देने वाले घसोला गांव के सम्मान में संस्थान का नाम 'घसोला मेडिकल कॉलेज' रखा जाना चाहिए.

Charkhi Dadri Medical College Controversy
Charkhi Dadri Medical College Controversy

न्यूज तक डेस्क

follow google news

हरियाणा सरकार द्वारा चरखी दादरी के घसोला गांव में बनने वाले राजकीय मेडिकल कॉलेज का नाम स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम के नाम पर रखे जाने के बाद से विवाद गहरा गया है. घसोला गांव के ग्रामीणों और स्थानीय खाप पंचायतों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इस मुद्दे को लेकर चरखी दादरी के घसोला गांव में अटगामा खाप की एक अहम पंचायत का आयोजन किया गया. इस पंचायत की अध्यक्षता अटगामा खाप के प्रधान और पूर्व डैको परमानंद भारत ने की. पंचायत में घसोला गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और सरकार के इस फैसले को घसोला गांव के साथ अन्याय बताया.

Read more!

दानदाताओं के सम्मान की परंपरा का दिया हवाला

महापंचायत में शामिल खाप प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि हमेशा से यह परंपरा रही है कि जो जमीन या संपत्ति दान करता है, नाम भी उसी के नाम पर रखा जाता है. ग्रामीणों ने चरखी दादरी के ही कई पुराने उदाहरण देते हुए कहा कि उद्धव सिंह जैन हॉस्पिटल, राशिवासिया धर्मशाला, प्रसा मेहतराम स्कूल, मुरारी लाल आयुर्वेदिक कॉलेज और गणपति राशिवासिया कॉलेज जैसी तमाम संस्थाएं दानदाताओं के नाम पर ही चल रही हैं. ऐसे में जब घसोला गांव ने अपनी करोड़ों-अरबों रुपये की बेशकीमती 50 एकड़ जमीन इस मेडिकल कॉलेज के लिए दान में दी है, तो इस कॉलेज का नाम घसोला राजकीय मेडिकल कॉलेज ही होना चाहिए.

राव तुलाराम से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं

ग्रामीणों ने साफ शब्दों में स्पष्ट किया है कि उन्हें राव तुलाराम के नाम से कोई व्यक्तिगत दिक्कत या द्वेष नहीं है. राव तुलाराम देश के बहुत बड़े नायक हैं और उनके नाम पर देश में अनेकों संस्थाएं चल रही हैं. लेकिन जिस गांव ने अपनी कीमती जमीन समाज की भलाई और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दान की है, उस गांव के नाम को पटल पर लाना सरकार का फर्ज बनता है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार ने कॉलेज का नाम 'राव तुलाराम राजकीय मेडिकल कॉलेज' रखकर घसोला गांव के लोगों को बेवकूफ बनाने का काम किया है.

प्रदेश की अन्य यूनिवर्सिटी और कॉलेजों का दिया तर्क

खाप नेताओं ने हरियाणा की अन्य यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेजों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब महेंद्रगढ़ के पाली गांव में यूनिवर्सिटी बनती है तो उसका नाम पाली यूनिवर्सिटी रखा जाता है. मीरपुर गांव के नाम पर मीरपुर यूनिवर्सिटी बनाई गई है. वहीं, कोरियावास में बन रहे एम्स का नाम च्यवन ऋषि के नाम पर वहां के लोगों के सुझाव पर रखा गया है और नारनौल के पटीगरा में बन रहा संस्थान पटीगरा या खेताना के नाम से जाना जाता है. खाप प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब हर जगह स्थानीय गांव या जनभावनाओं को प्राथमिकता दी गई है, तो सिर्फ घसोला गांव के साथ ही यह जुल्म क्यों किया जा रहा है?

आंदोलन को बड़ा रूप देने की रणनीति

अटगामा खाप की इस बैठक में भविष्य की रणनीतियों को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया. खाप प्रतिनिधियों ने बताया कि इससे पहले घसोला गांव की तरफ से हरियाणा के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया था. लेकिन अब इस आंदोलन को बड़ा रूप दिया जाएगा. आगामी रणनीति के तहत अब अटगामा खाप की तरफ से सरकार को ज्ञापन दिया जाएगा. इसके बाद फोगाट खाप, सांगवान खाप समेत चरखी दादरी और आसपास के जिलों की सभी खापों का सहयोग लिया जाएगा और उनकी तरफ से भी सरकार को ज्ञापन सौंपे जाएंगे. खाप की एक विशेष कमेटी बनाई गई है जो दूसरी अन्य खापों से संपर्क साधेगी और आने वाले दिनों में सभी खापें एक मंच पर आकर इस संघर्ष में शामिल होंगी.

स्वास्थ्य मंत्री की समझदारी पर उठाए सवाल, बजट की मांग

पंचायत में मौजूद प्रतिनिधियों ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की समझदारी पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि दादरी जिले की जनता से जुड़ा यह बेहद गंभीर विषय है और इसके नामकरण पर विवाद पैदा करना किसी भी तरह से समझदारी भरा कदम नहीं है. ग्रामीणों ने कहा कि दादरी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है. यदि यहां कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता है, तो उसे रोहतक, चंडीगढ़ या दिल्ली का रुख करना पड़ता है. 

लोगों को राहत देने के लिए पंचकूला में तो मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो गया, लेकिन दादरी में अभी तक बजट भी जारी नहीं हुआ है और सरकार ने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ही नाम का रोड़ा अटका दिया है. ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार तुरंत प्रभाव से मेडिकल कॉलेज के लिए बजट जारी करे और जन भावनाओं के अनुरूप इसका नामकरण घसोला गांव के नाम पर ही करें. ग्रामीणों और खापों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक कॉलेज का नाम 'घसोला मेडिकल कॉलेज' नहीं किया जाता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण और सर्वजातीय संघर्ष लगातार जारी रहेगा.

    follow google news