Gurugram Double Murder: शनिवार देर रात करीब 11:00 बजे जब अशोक विहार के इस तीन मंजिला मकान से ताबड़तोड़ गोलियां चलने की आवाजें आईं, तो पड़ोसी सहम गए. जब हिम्मत जुटाकर लोग अनिल के घर की तीसरी मंजिल पर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था. कमरे में अनिल की पत्नी आशा और बेटा प्रशांत खून से लथपथ पड़े थे और दम तोड़ चुके थे. हैरान करने वाली बात यह थी कि मर्डर करने के बाद आरोपी अनिल भागा नहीं, बल्कि खून से सनी दोनों लाशों के पास ही चुपचाप बैठा रहा. सूचना मिलते ही सेक्टर-5 थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार किया.
ADVERTISEMENT
यह घटना साइबर सिटी गुरुग्राम के अशोक विहार इलाके की है. यहां शनिवार देर रात अनिल कुमार ने अपनी 45 वर्षीय पत्नी आशा और 25 साल के इकलौते बेटे प्रशांत की अपनी ही लाइसेंसी बंदूक से 14 गोलियां मारकर बेरहमी से हत्या कर दी. यहां एक पढ़े-लिखे और संपन्न परिवार के मुखिया अनिल ने गुस्से में आकर अपनी ही हंसती-खेलती दुनिया को उजाड़ दिया. अनिल एक निजी कंपनी में बतौर सिक्योरिटी ऑफिसर के पोस्ट पर तैनात है.
बेटी ने बयां किया आंखों देखा खौफनाक सच
इस डबल मर्डर की इनसाइड स्टोरी का खुलासा आरोपी अनिल की शादीशुदा बेटी ने किया है, जो बच्चों की छुट्टियां होने के कारण 5 जून को ही अपने मायके आई हुई थी. बेटी ने पुलिस को बताया, "मम्मी और पापा के बीच अक्सर अनबन रहती थी. भाई प्रशांत और मम्मी अक्सर पापा की कुछ बातें नहीं मानते थे, जिससे घर में विवाद होता था. 6 जून की रात करीब 11 बजे तीसरी मंजिल पर मम्मी-पापा के बीच फिर झगड़ा शुरू हुआ. पापा मम्मी को थप्पड़ मार रहे थे. आवाज सुनकर पहली मंजिल से भाई प्रशांत और भाभी बीच-बचाव करने ऊपर पहुंचे."
"हट जाओ वरना दोनों को मार दूंगा" और फिर चलीं 14 गोलियां
बेटी के मुताबिक, भाई प्रशांत ने अपनी मां को बचाने की कोशिश की और बीच में आ गया. इस पर अनिल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उसने प्रशांत को चेतावनी दी, "बीच से हट जाओ वरना दोनों को मार दूंगा." लेकिन प्रशांत अपनी मां की ढाल बनकर खड़ा रहा. तभी अनिल ने अपनी लाइसेंसी बंदूक उठाई और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.
अनिल ने अपनी पत्नी और बेटे के सिर, गर्दन, छाती और प्राइवेट पार्ट पर एक के बाद एक कुल 14 गोलियां दाग दीं. दोनों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई. इसके बाद अनिल अपनी बेटी और बहू को भी मारने दौड़ा, लेकिन दोनों ने भागकर दूसरी मंजिल पर रह रहे किराएदार के कमरे में छिपकर अपनी जान बचाई.
संपन्न था परिवार, भिवानी से आकर बसा था गुरुग्राम
मूल रूप से भिवानी के तिगड़ाना गांव का रहने वाला यह परिवार करीब 15 साल पहले गुरुग्राम शिफ्ट हुआ था. आरोपी अनिल पहले स्कूल में पीटीआई (Physical Training Instructor) था और बाद में सिक्योरिटी ऑफिसर बन गया. वहीं उसकी पत्नी आशा कार्टरपुरी में 'लॉर्ड शिवा स्कूल' की प्रिंसिपल थीं और खुद का स्कूल भी चलाती थीं. पूरा परिवार आर्थिक रूप से बेहद संपन्न था, लेकिन आपसी कलह ने इस हंसते-खेलते परिवार का खूनी अंत कर दिया. फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि झगड़े की असली और मुख्य वजह क्या थी.
यह भी पढ़ें: मनीषा हत्याकांड: 10 महीने बाद भी CBI खाली हाथ, न्याय के लिए आज हरियाणा में महापंचायत; क्या फिर शुरू होगा बड़ा आंदोलन?
ADVERTISEMENT


