दूध की डेयरी से लेकर गुरुग्राम का टॉप गैंगस्टर बनने तक, Binder Gurjar की कहानी उसी की जुबानी !

गुरुग्राम के कुख्यात गैंगस्टर बिंदर गुर्जर ने जेल से रिहा होने के बाद अपनी पूरी कहानी साझा की है. उन्होंने संदीप गाडोली एनकाउंटर और दिव्या पाहुजा मामले में खुद को निर्दोष बताते हुए युवाओं को अपराध की राह छोड़ने की सलाह दी है.

हरियाणा न्यूज
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हिमांशु शर्मा

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हरियाणा के सबसे चर्चित और विवादित गैंगस्टरों में से एक बिंदर गुर्जर (Binder Gurjar) जेल से बाहर आ चुके हैं. मुंबई पुलिस और हरियाणा पुलिस की कड़ी निगरानी में करीब 6-7 साल बिताने के बाद बिंदर गुर्जर ने अपनी जिंदगी, अपराध की दुनिया और संदीप गाडोली एनकाउंटर केस (Sandeep Gadoli Encounter) पर खुलकर बात की है. हरियाणा तक के खास कार्यक्रम 'द गुरुग्राम रिपोर्ट' में बिंदर ने अपनी डेयरी चलाने वाले लड़के से लेकर गैंगस्टर बनने तक के सफर के अनसुने किस्से साझा किए.

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6 साल में बहुत कुछ खोया, अब अपराध से तौबा

जेल से बाहर आए बिंदर गुर्जर ने कहा कि अपराध की राह केवल बर्बादी की ओर ले जाती है. बिंदर ने भावुक होते हुए बताया कि जेल में रहने के दौरान उन्होंने अपने माता-पिता और बड़े भाई को खो दिया, लेकिन वे उन्हें कंधा देने तक नहीं जा सके. अपनी बड़ी बेटी की शादी में वे केवल 8 घंटे के लिए आ पाए और छोटी बेटी की शादी में शामिल ही नहीं हो सके. बिंदर का कहना है कि अब उनकी उम्र 50 साल हो गई है और वे अपनी युवा पीढ़ी को इस दलदल में नहीं देखना चाहते.

संदीप गाडोली एनकाउंटर और दिव्या पाहुजा पर बड़ा बयान

2016 के चर्चित संदीप गाडोली एनकाउंटर केस में हाल ही में बरी हुए बिंदर गुर्जर ने पुलिस को खरीदने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "मेरी इतनी औकात नहीं कि मैं पुलिस को खरीद सकूं. पुलिस ने अपनी ड्यूटी की थी." वहीं, हाल ही में हुई दिव्या पाहुजा की हत्या पर उन्होंने कहा कि वे दिव्या से कभी नहीं मिले थे और जेल में रहने के कारण उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने स्वीकार किया कि अभिजीत (दिव्या मर्डर का आरोपी) उनका दोस्त जरूर था, लेकिन घटना के वक्त वे मुंबई की जेल में थे.

डेयरी से गैंगस्टर बनने का सफर

बिंदर गुर्जर ने बताया कि 90 के दशक में वे गुरुग्राम में दूध की डेयरी चलाते थे. घर के हालात और दोस्तों की संगत ने उन्हें अपराध की ओर धकेला. शुरुआत में वे फौजी गैंग के गुर्गे थे और बाद में खुद की गैंग बना ली. उन्होंने स्वीकार किया कि उनके खिलाफ हत्या और अपहरण जैसे करीब 25-30 मुकदमे दर्ज थे, लेकिन उन्होंने दावा किया कि उनका कोई भी अपराध किसी शरीफ आदमी या व्यापारी के खिलाफ नहीं था, बल्कि वे आपसी रंजिश के मामले थे.

लॉरेंस बिश्नोई और कौशल चौधरी पर क्या बोले?

देश के बड़े सिंडिकेट्स के बारे में बात करते हुए बिंदर ने कहा कि फिलहाल वे किसी सिंडिकेट का हिस्सा नहीं हैं. उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि जो सोशल मीडिया पर गैंगस्टर को अपना आइडल मानते हैं, वे गलत रास्ते पर हैं. बिंदर ने कहा, "क्राइम फिल्मों में अच्छा लगता है, असल जिंदगी में यह केवल नरक है. शाम को मजदूरी करके अपने घर सोना सबसे बड़ी सुख है."


 

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