हरियाणा के मशहूर समाजसेवी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्ष छिकारा ने अपनी जिंदगी के दर्दनाक और अनसुने पन्नों को साझा किया है. 'हरियाणा तक' को दिए एक भावुक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे बेहद गरीबी, बचपन में ही मां के साये के उठ जाने और शुरुआती संघर्षों ने उन्हें समाज सेवा के रास्ते पर ला खड़ा किया.
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750 ग्राम था वजन, 7 साल की उम्र में मां को खोया
हर्ष छिकारा ने अपने जन्म से जुड़े संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि वह 'अठमासा' (8 महीने में) पैदा हुए थे और जन्म के वक्त उनका वजन केवल 750 ग्राम था. उन्हें कई दिनों तक शीशे (इन्क्यूबेटर) में रखना पड़ा था. जब वह महज 7 साल के थे (साल 1997), तब एक हादसे में उनकी मां की रीढ़ की हड्डी टूट गई. पैसों की तंगी और सफदरजंग अस्पताल के बाहर सही इलाज व बेड न मिलने के कारण उनकी मां का निधन हो गया.
75 रुपये की दिहाड़ी से लेकर क्रिकेट के मैदान तक
मां के जाने के बाद हर्ष छिकारा ने 8 साल की उम्र से खुद खाना बनाना शुरू किया. 13-14 साल की उम्र में अपने पिता के साथ रोड़ी-डस्ट के ट्रक खाली करने की मजदूरी की, जहां उन्हें दिन के केवल 75 रुपये मिलते थे. सुबह 3 बजे उठकर काम करने के बाद वह स्कूल जाते थे. क्रिकेट में अच्छे होने के कारण उनका चयन सोनीपत और हरियाणा की टीम में भी हुआ था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह खेल को आगे नहीं बढ़ा सके.
मां की याद में शुरू की समाज सेवा
मां के इलाज के अभाव में दम तोड़ने के दर्द ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था. 2012 से उन्होंने गरीबों और असहायों की मदद करना शुरू किया. हर्ष का कहना है कि उन्होंने 14 साल समाज को दिए, लेकिन आज के दौर में लोग सोशल मीडिया के जरिए उन पर सवाल उठाते हैं और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं.
सोशल मीडिया से नहीं कमाया एक भी रुपया
हर्ष छिकारा ने खुलासा किया कि उनके नाम से सैकड़ों फर्जी और फैन पेज चल रहे हैं जो पैसे कमाते हैं, लेकिन उन्होंने अपने आधिकारिक पेज या यूट्यूब से आज तक ₹1 भी नहीं कमाया. उनका मानना है कि अगर वह स्ट्राइक भेजेंगे तो उन लोगों का घर चलना बंद हो जाएगा.
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