हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की 63 वर्षीय सुशीला देवी ने यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. पांचवीं कक्षा के बाद उनकी पढ़ाई छूट गई थी, लेकिन करीब 58 साल बाद उन्होंने दोबारा किताबें उठाईं और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) की 10वीं परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर नई मिसाल कायम कर दी.
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पांचवीं के बाद छूट गई थी पढ़ाई
महेंद्रगढ़ जिले के देवनगर (चामधेड़ा) गांव में रहने वाली सुशीला देवी बचपन में पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन उस समय की सामाजिक परिस्थितियों के कारण उनकी शिक्षा पांचवीं कक्षा के बाद रुक गई. शादी के बाद भी उन्होंने सीखने की इच्छा नहीं छोड़ी. वह नियमित रूप से अखबार पढ़ती रहीं और नई जानकारी हासिल करती रहीं.
बेटे ने बढ़ाया हौसला, फिर भरा NIOS का फॉर्म
सुशीला देवी की पढ़ाई में रुचि देखकर उनके बेटे विष्णु ने उन्हें दोबारा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. उसने NIOS के माध्यम से 10वीं का फॉर्म भरवाया. शुरुआत में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषय चुनौतीपूर्ण लगे, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने हार नहीं मानी.
उन्होंने रोज करीब तीन से चार घंटे पढ़ाई की और पूरी मेहनत से परीक्षा की तैयारी की.
प्रथम श्रेणी से पास की 10वीं परीक्षा
अप्रैल 2026 में आयोजित NIOS की 10वीं परीक्षा का परिणाम आने पर सुशीला देवी ने 79.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. उन्होंने अंग्रेजी में 89, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 88, गणित में 78, पेंटिंग में 76 और हिंदी में 67 अंक हासिल किए. उनकी इस सफलता से परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
महिलाओं और युवाओं को दिया संदेश
अपनी सफलता पर सुशीला देवी ने कहा कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती. यदि मन में सीखने की इच्छा हो और परिवार का साथ मिले तो कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सकता है. उन्होंने सभी महिलाओं और युवाओं से शिक्षा जारी रखने की अपील की.
अब सरपंच बनने का है सपना
मूल रूप से रेवाड़ी जिले के भडंगी गांव की रहने वाली सुशीला देवी का कहना है कि उनका सफर यहीं खत्म नहीं होगा. वह आगे भी पढ़ाई जारी रखेंगी. साथ ही उनका सपना भविष्य में सरपंच बनकर समाज की सेवा करना है.
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