हरियाणा में बीजेपी के अंदर सरकारी नौकरियों और कार्यकर्ताओं की अनदेखी को लेकर नई बहस छिड़ गई है. बीजेपी विधायक रामकुमार गौतम ने अपनी ही पार्टी की सरकार को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों की उम्मीदों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सरकार को भी एंटी-इनकम्बेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ सकता है.
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रामकुमार गौतम ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी पहले से नहीं थी, बल्कि धीरे-धीरे पैदा हुई. उनके मुताबिक, खट्टर सरकार ने समय रहते लोगों की नाराजगी को नहीं समझा. यही वजह रही कि सरकार के खिलाफ विरोध बढ़ता गया. उन्होंने कहा कि नायब सैनी सरकार को पिछली सरकार के अनुभव से सबक लेना चाहिए.
'खट्टर सरकार ने सिर्फ मेरिट के आधार पर दी नौकरियां'
रामकुमार गौतम ने मनोहर लाल खट्टर की सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि खट्टर सरकार की सबसे बड़ी गलती यह थी कि उसने सिर्फ मेरिट के आधार पर नौकरियां दीं. गौतम के मुताबिक, सरकार ने उन लोगों और परिवारों की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया, जिन्होंने बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाने के लिए मेहनत की थी.
उन्होंने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी का साथ दिया और जिन मतदाताओं ने बीजेपी पर भरोसा जताया, उनके परिवारों के युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिलने चाहिए. अगर इन परिवारों के बच्चे बेरोजगार रह जाते हैं, तो उनके मन में नाराजगी पैदा होना स्वाभाविक है.
गौतम ने ऐसे परिवारों का भी जिक्र किया, जिनके पास न खेती की जमीन है और न ही कोई कारोबार. उनके मुताबिक, समाज का यह वर्ग पहले से ही आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. खट्टर सरकार के दौरान इसी वर्ग में सबसे ज्यादा सत्ता विरोधी माहौल बना था.
नायब सैनी सरकार को दी एंटी-इनकम्बेंसी की चेतावनी
बीजेपी विधायक ने कहा कि वह नहीं चाहते कि नायब सिंह सैनी की सरकार के खिलाफ भी सत्ता विरोधी लहर पैदा हो. इसके लिए सरकार को उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों की समस्याओं पर ध्यान देना होगा, जिन्होंने पार्टी के लिए मेहनत की है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के कई कार्यकर्ताओं ने खुद पार्टी को वोट दिया और दूसरों को भी समर्थन देने के लिए प्रेरित किया. ऐसे में सरकार को उनकी उम्मीदों का ख्याल रखना चाहिए. अगर उनके परिवारों के युवा बेरोजगार रह जाते हैं, तो नाराजगी बढ़ सकती है.
रामकुमार गौतम ने चेतावनी दी कि खट्टर सरकार के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी अपने आप पैदा हुई थी. अगर नायब सैनी ने समय रहते इसे संभालने की कोशिश नहीं की, तो उनकी सरकार को भी इसका सामना करना पड़ सकता है.
कांग्रेस के कार्यकाल में नौकरियों का भी उठाया मुद्दा
बातचीत के दौरान कांग्रेस सरकार के समय नौकरियों में रिश्वत और सिफारिश के आरोपों का भी जिक्र हुआ. इस पर रामकुमार गौतम से सवाल किया गया कि अगर किसी सरकार में नौकरियां रिश्वत और सिफारिश के आधार पर दी जाती हैं, तो क्या उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना नहीं करना पड़ता?
इस सवाल पर गौतम ने कहा कि हर मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को उनका हक दिलाए. उन्होंने इस मुद्दे पर आगे भी कुछ बातें कहने के संकेत दिए, लेकिन कहा कि वह अभी सब कुछ सार्वजनिक नहीं करना चाहते.
विधायक ने बताया अपने ड्राइवर के परिवार का उदाहरण
रामकुमार गौतम ने बेरोजगारी की समस्या समझाने के लिए अपने ड्राइवर के परिवार का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि उनके ड्राइवर के चार भाई हैं और चारों नौकरी की निर्धारित उम्र सीमा पार कर चुके हैं.
गौतम के मुताबिक, ये चारों मेरिट के कारण नौकरी पाने की दौड़ में पीछे रह गए. अब उनके पास सरकारी नौकरी पाने का मौका भी नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी का असर युवाओं की शादी और परिवार बसाने पर भी पड़ रहा है.
उन्होंने चिंता जताई कि अगर युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा, तो इसका असर आने वाली पीढ़ी पर भी पड़ेगा. इसी उदाहरण के जरिए उन्होंने सरकार से ऐसे परिवारों की स्थिति समझने की अपील की.
अपनी ही सरकार को रामकुमार गौतम की नसीहत
रामकुमार गौतम का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार के सामने कार्यकर्ताओं की उम्मीदों और बेरोजगारी का मुद्दा उठाया है. उन्होंने साफ कहा कि सरकार को सिर्फ चुनाव जीतने के बाद शासन चलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन लोगों की समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए जिन्होंने पार्टी पर भरोसा जताया है.
उनकी पूरी बात का संदेश यही है कि अगर सरकार ने समय रहते कार्यकर्ताओं, समर्थकों और बेरोजगार युवाओं की नाराजगी दूर नहीं की, तो आने वाले समय में उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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