Haryana Electricity Strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के चलते कई इलाकों में अंधेरा छा गया है. बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन से गुरुग्राम, झज्जर, चरखी दादरी और नूंह समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है. कर्मचारियों की गैरमौजूदगी और लाइनों में फॉल्ट के कारण ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई है. इस बीच, सरकार और बिजली मंत्री अनिल विज का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने हड़ताल को बेवजह बताते हुए अपना पक्ष रखा है.
ADVERTISEMENT
दादरी से गुरुग्राम तक ब्लैकआउट का असर
कर्मचारी और इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल का पहले ही दिन व्यापक असर देखने को मिला. चरखी दादरी में शहर का करीब आधा हिस्सा ठप हो गया. ग्रामीण क्षेत्रों में सांजरवास और घसोला पावर हाउस बंद रहने तथा 11 केवी लाइनों में फॉल्ट आने से दर्जनों गांवों की बिजली गुल रही. वहीं गुरुग्राम, झज्जर और नूंह जैसे इलाकों में भी रात से ही अंधेरा छाया रहा. फील्ड में कर्मचारियों के उपलब्ध न होने से फॉल्ट ठीक नहीं हो पा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी काफी बढ़ गई है.
निजीकरण के फैसले पर क्यों भड़के कर्मचारी?
हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनी 'इलेवन पावर' को 25 साल के समानांतर लाइसेंस पर सौंपने का फैसला किया है. कर्मचारियों का आरोप है कि ज्यादा राजस्व देने वाले इन क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को भारी नुकसान होगा. जॉइंट एक्शन कमेटी के सदस्य जगदीप फोगाट और संयुक्त मोर्चे के अनुसार, वर्षों की मेहनत और सरकारी पैसे से बना ढांचा निजी कंपनी को देना जन-विरोधी है. इससे करीब 40 हजार नियमित, अस्थायी और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों व इंजीनियरों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है.
बिजली मंत्री अनिल विज का बड़ा बयान
इस विवाद के बीच कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सरकार ने ब्लैकआउट से निपटने के पूरे इंतजाम किए हैं. उन्होंने हड़ताल को बेवजह बताते हुए कहा कि यह फैसला हरियाणा बिजली नियामक आयोग का है, जो एक ऑटोनॉमस बॉडी है, न कि सरकार का. विज ने स्पष्ट किया कि वह खुद निजीकरण के खिलाफ हैं और विभाग ने आयोग के सामने वकील खड़ा करके निजी कंपनी का डटकर विरोध किया था. फैसला खिलाफ आने पर सरकार 45 दिनों के भीतर 'एपिटल' में अपील दायर करने जा रही है. विज ने कर्मचारियों से अपील की कि वे हड़ताल छोड़कर केस की तैयारी में मदद करें और अपना वकील या सलाह दें, क्योंकि लड़ाई कोर्ट में ही लड़ी जाएगी.
22 से 24 अक्टूबर तक जारी रहेगा आंदोलन
कर्मचारी संगठनों ने पहले ही 21 अक्टूबर को आदेश की प्रतियां जलाई थीं और इसके बाद 22, 23 और 24 अक्टूबर तक पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है. संयुक्त मोर्चे का कहना है कि सरकार ने करीब दो महीने पहले 10 अगस्त को हुए समझौते के वादों को पूरा नहीं किया है. कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता और नूंह व गुरुग्राम में दिए गए पैरेलल लाइसेंस निरस्त नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और वे फॉल्ट ठीक करने फील्ड में नहीं जाएंगे.
इनपुट- प्रदीप कुमार
ADVERTISEMENT


