हरियाणा के हांसी जिले का चानौत गांव पिछले 40 दिनों से पीने के पानी की समस्या को लेकर पेयजल पाइपलाइन आंदोलन की आग में सुलग रहा है. आंदोलन के 40वें दिन जहां एक तरफ गांव की 11 सदस्यीय धरना कमेटी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात करने चंडीगढ़ पहुंची, वहीं दूसरी तरफ इस आंदोलन के बीच अचानक एंट्री मारने वाले एक रहस्यमयी किरदार 'सोमेश शर्मा' को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है. सोमेश शर्मा वही शख्स है जिसने आंदोलनकारी ग्रामीणों के बीच जाकर दावा किया था कि सरकार ने उनकी मांग मान ली है और वह खुद 'टी' (T) कनेक्शन लगवाने आया है. हालांकि, रातों-रात प्रशासन द्वारा उस 'टी' को उखाड़े जाने के बाद अब सरकार ने सोमेश शर्मा को 'फ्रॉड' करार देते हुए उससे पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है. आइए समझते हैं क्या है यह पूरा विवाद और कौन है सोमेश शर्मा.
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ग्रामीणों का आरोप
चानौत गांव के पूर्व सरपंच सत्यवान दुहन ने अपने मोबाइल में तस्वीरें दिखाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ग्रामीणों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में सोमेश शर्मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, हरियाणा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा और कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा के साथ बेहद करीब बैठा दिखाई दे रहा है. पूर्व सरपंच सत्यवान ने कहा, "सोमेश शर्मा ने हमें बड़े-बड़े भाजपा नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें दिखाईं. हम 40 दिन से भूखे बैठे थे, हमारे बुजुर्ग आमरण अनशन पर थे. जब हमारे सामने अचानक पानी की समस्या का हल (टी कनेक्शन) आया, तो हमने खुशी में थालियां बजाईं और भाजपा व अमित शाह के जयकारे लगाए. हमें विश्वास था कि वह सरकार का ही आदमी है, लेकिन प्रशासन ने रातों-रात उस टी को उखाड़ दिया. हमारे साथ धोखा हुआ है."
सरकार का पक्ष
इस पूरे मामले पर पेयजल पाइपलाइन विभाग के कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा और विधायक विनोद भ्याणा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार का पक्ष रखा. मंत्री रणबीर गंगवा ने सोमेश शर्मा से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उसका भारतीय जनता पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. रणबीर गंगवा ने कहा, "वह कोई फ्रॉड व्यक्ति हो सकता है जो ग्रामीणों को बहका रहा है. वह उन लोगों द्वारा प्रायोजित (Sponsored) व्यक्ति है जो माहौल खराब करना चाहते हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी." जब पत्रकारों ने भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ सोमेश की तस्वीरों पर सवाल उठाया, तो मंत्री ने सफाई देते हुए कहा, "हम राजनीतिक लोग हैं, हमारे साथ आकर कोई भी फोटो खिंचवा सकता है, इसका मतलब यह नहीं कि वह हमारी पार्टी का है."
कौन है सोमेश शर्मा?
जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमेश शर्मा चरखी दादरी के घिकाड़ा गांव का पूर्व सरपंच रह चुका है और सरपंच एसोसिएशन का प्रधान भी रहा है. उसे एक 'लॉबिस्ट' या 'लाइनर' के तौर पर जाना जाता है, जिसकी राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक दफ्तरों में अच्छी पहुंच है. हालांकि, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, सोमेश का दावा है कि वह भाजपा से ही जुड़ा हुआ है और जल्द ही इस 'टी' विवाद का बड़ा खुलासा करेगा.
क्या है चानौत गांव के ग्रामीणों की असल मांग?
ग्रामीणों की मांग है कि राजली हेड (बरवाला) से हांसी शहर के लिए जो भाखड़ा नहर के पानी की मुख्य पाइपलाइन जा रही है, उसी लाइन से चानौत गांव को भी 'टी' (T) कनेक्शन देकर पानी दिया जाए. ग्रामीणों का तर्क है कि शहर की पाइपलाइन में पानी आने की गारंटी हमेशा रहती है, इसलिए उन्हें वही कनेक्शन चाहिए.
सरकार क्यों कर रही है इनकार?
मंत्री रणबीर गंगवा ने स्पष्ट किया कि हांसी शहर की पाइपलाइन 'अमृत योजना' (Amrut Yojana) के तहत बनाई जा रही है, जिसमें 60% पैसा केंद्र और 40% राज्य सरकार देती है. यह योजना केवल शहरी क्षेत्रों के लिए है. यदि ग्रामीण क्षेत्र में इससे कनेक्शन दिया गया, तो यह नीति (Policy) के खिलाफ होगा और केंद्र से मिलने वाला फंड रुक जाएगा. सरकार ने आश्वासन दिया है कि ग्रामीणों के लिए 'जल जीवन मिशन' के तहत अलग से आरसीसी टैंक और भाखड़ा से सीधी पाइपलाइन जोड़ी जाएगी, जिससे गांव में हांसी शहर से भी पहले पानी पहुंचेगा.
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