अक्सर बुजुर्गों की अनदेखी की खबरें सामने आती हैं, वहीं हरियाणा से सेवा और भक्ति की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है. हरियाणा के होडल क्षेत्र के हताना गांव की रहने वाली और हरियाणवी लोक गायिका काजल चौधरी अपनी 85 साल की बुजुर्ग सास चंद्रो देवी को प्लास्टिक के टब में बैठाकर अपने सिर पर उठाकर ब्रज 84 कोस की परिक्रमा करा रही हैं.
ADVERTISEMENT
धार्मिक आस्था के आगे उम्र भी हारी
काजल चौधरी की सास चंद्रो देवी वृद्धावस्था के कारण खुद चलने और परिक्रमा करने में पूरी तरह असमर्थ हैं. लेकिन उनकी इस उम्र में भी ब्रज परिक्रमा करने की गहरी इच्छा थी. सास की इस धार्मिक आस्था और इच्छा का मान रखते हुए बहू काजल ने बिना वक्त गंवाए फैसला लिया. काजल ने बताया कि उन्हें सोचने और परिवार से चर्चा करने का बहुत समय नहीं मिला, बस वीडियो देखने के बाद उन्होंने ठान लिया और रविवार को सास को लेकर परिक्रमा के लिए निकल पड़ीं.
मेवात में उमड़ा जनसैलाब, बही भाईचारे की बयार
काजल चौधरी ने अपनी यह कठिन यात्रा पलवल के बंजारी गांव से बीते 31 मई को शुरू की थी. जब वह शुक्रवार को परिक्रमा करते हुए मेवात की बृजभूमि के बिछोर गांव में पहुंचीं, तो वहां एक अद्भुत नजारा देखने को मिला. मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद यहां हिंदू-मुस्लिम सहित 36 बिरादरी के लोगों ने डीजे, फूल-मालाओं और जयघोष के साथ काजल का बेहद भव्य स्वागत किया. जैसे ही लोगों ने बहू को अपनी बुजुर्ग सास को सिर पर उठाकर लाते देखा, वहां मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं.
'चारों धाम तो माता-पिता के चरणों में हैं'
इस भावुक पल पर संदेश देते हुए काजल चौधरी ने कहा, "हमारी सासू मां और ससुर हमारे माता-पिता के समान हैं. जनने वाली और पालने वाली मां में कोई फर्क नहीं होता. हम चारों धाम और मंदिरों में क्यों भटके, जब भगवान हमारे घर में ही बैठे हैं. मैं अपनी सभी माता-बहनों से यही अनुरोध करूंगी कि माता-पिता की सच्चे दिल से सेवा करें, क्योंकि असली उद्धार उन्हीं के चरणों में है."
प्रशासन-स्थानीय लोगों ने की सराहना
यात्रा की देखरेख कर रहे स्थानीय लोगों और प्रशासन ने भी काजल की इस भक्ति की सराहना करते हुए उन्हें 'कलयुग का श्रवण कुमार' बताया है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि मेवात की धरती पर सदियों से चला आ रहा हिंदू-मुस्लिम भाईचारा पूरे देश के लिए एक मिसाल है. बता दें कि 31 मई से शुरू हुई इस अनोखी आस्था की यात्रा का समापन शनिवार को पलवल के बंजारी गांव में होगा.
ADVERTISEMENT


